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खाद्य सुरक्षा मानकों के कड़े मानदंड की जरूरत, मैगी जैसी कितनी वस्तुएं बाजार में

यूपी के बाराबांकी में सबसे पहले मैगी के नमूने की जांच की गई, जिसमें सैंपल फेल पाए गए।

खाद्य सुरक्षा मानकों के कड़े मानदंड की जरूरत, मैगी जैसी कितनी वस्तुएं बाजार में
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क्वालिटी को लेकर उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ मैगी विवाद पूरे देश में पसर गया है। यूपी के बाराबांकी में सबसे पहले मैगी के नमूने की जांच की गई, जिसमें सैंपल फेल पाए गए। बाराबंकी प्रशासन ने मैगी के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए। उसके बाद मैगी का इंडोर्समेंट करने वाले अमिताभ बच्चन, माधुर दीक्षित और प्रीति जिंटा के खिलाफ बिहार में शिकायत की गई। देखते ही देखते गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल और दिल्ली में भी मैगी के नमूनों की जांच शुरू हो गई। फौरी तौर पर केरल ने अपनी सरकारी दुकानों में मैगी की बिक्री पर रोक लगा दी। दिल्ली में विभिन्न इलाकों से मसाला (टेस्ट मेकर) के 13 नमूने लिए गए। इनमें से 10 में सीसे की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई है। मसाले के पांच नमूनों में मोनोसोडियम ग्लूटामेट पाया गया है, जबकि लेबल पर इसकी जानकारी नहीं दी गई है, जो कि गलत जानकारी देने में आता है। दिल्ली में 15 दिनों के लिए मैगी पर बैन लगा दिया गया।

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बिग बजार, ईजीडे, केंद्रीय भंडार, सैन्य कैंटीन से भी टेंपररी मैगी हटा ली गई है। देश भर में सरकार के विभिन्न स्तर पर मैगी के नमूनों की जांच की जा रही है। सभी को इस जांच का इंतजार है। कंपनी को भी और लोगों को भी। मैगी विवाद में इसलिए आया है कि इसमें कथित तौर पर 'रासायनिक तत्व-सीसा (लेड)' और एमएसजी (मोनोसोडियम ग्लूटामेट) की मात्रा सरकारी मानक से अधिक पाई गई है। लेड की तय मात्रा अधिकतम 2.4 पीपीएम होनी चाहिए, जबकि शुरूआती जांच में यह मात्रा 15 से 17 पीपीएम पाई गई है। लेड जहरीला तत्व है और इससे ब्लड प्रेसर, किडनी और दिल की बीमारी होती है।

मोनोसोडियम ग्लूटामेट को लेकर अभी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। किसी भी उत्पाद में लेड और एमएसजी की तय से अधिक मात्रा सेहत से खिलवाड़ है। हालांकि मैगी बनाने वाली कंपनी नेस्ले इस बात से इनकार कर रही है कि उसके इस उत्पाद में तय मात्रा से अधिक सीसा या एमएसजी है। नेस्ले ने दावा किया है उसकी लैब टेस्टिंग ग्लोबल स्टैंडर्ड की है। इस विवाद से नेस्ले को गहरा धक्का भी लगा है। मैगी की बिक्री में 50 फीसदी तक की कमी आई है और कंपनी के शेयर में 10 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है। नौ साल में नेस्ले के शेयरों में आई अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है।
इस समय अहम सवाल है कि मैगी में लेड और एमएसजी के सीमा से अधिक होने के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या हमारे खाद्य सुरक्षा मानक इतने कमजोर हैं या हमारे खाद्य सुरक्षा अफसर इतने लापरवाह हैं कि कोई भी कंपनी इसका लाभ उठा ले और आवाम की सेहत को संकट में डाल दे। इस समय कई सारे ऐसे फूड व पेय प्रोडक्ट बाजार में हैं, जिनमें प्रिजरवेटिव के नाम पर खतरनाक रसायन है। यह तब है जब देश में खाद्य सुरक्षा को नियंत्रित करने के लिए सरकारी सिस्टम है। मैगी विवाद दर्शाता है कि हमारे सरकारी सिस्टम में और सुधार की जरूरत है, प्रोसेस्ड फूड व पेय के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के कड़े मानक बनाने की जरूरत है, ताकि कोई भी कंपनी भारत में घटिया उत्पाद बनाने और बेचने की जुर्रत नहीं कर सके।
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