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सुरक्षा तंत्र की मजबूती वक्त की जरूरत!

अलकायदा और आईएसआईएस भी भारत के लिए चिंता का कारण बन गए हैं।

सुरक्षा तंत्र की मजबूती वक्त की जरूरत!
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भारत आंतरिक और बाहरी दोनों मोर्चों पर सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है। लाल गलियारे के नाम से चर्चित देश के करीब दो सौ जिले जहां नक्सलवाद से प्रभावित हैं वहीं देश के पूर्वोत्तर राज्यों में भी कई अलगाववादी गुट हिंसक गतिविधियों में सक्रिय हैं। सिमी का नया रूप आईएम भी चिंता का सबब बना हुआ है। वहीं पाक प्रायोजित आतंकवाद का भी भारत लंबे अरसे से शिकार है। इसके पुख्ता साक्ष्य हैं कि पाकिस्तान अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ दहशत फैलने के लिए होने दे रहा है। आतंकवादी संगठनों को वहां की सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई का संरक्षण मिल रहा है।
हाल के दिनों में अलकायदा और आईएसआईएस भी भारत के लिए चिंता का कारण बन गए हैं। क्योंकि विगत दिनों अलकायदा प्रमुख अल जवाहिरी और आईएसआईएस प्रमुख अबु अल बगदादी के अलग-अलग वीडियो सामने आए थे जिसमें दोनों भारत में अपना जाल फैलाने का जिक्र करते देखे गए थे। भारत के कुछ युवा इन अतिवादी संगठनों से प्रभावित भी हो रहे हैं, जो कि चिंता की बात है। इसी साल जून में मुंबई के चार दोस्तों के आईएसआईएस में शामिल होने की खबर आई थी। हालांकि इनमें से एक को एनआईए की टीम ने शनिवार को गिरफ्तार किया है। इन सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के बीच पहली बार राष्टÑीय राजधानी दिल्ली के बाहर गुवाहाटी में दो दिनों तक चला राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और खुफिया प्रमुखों का 49वां वार्षिक सम्मेलन काफी अहम हो जाता है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह की चिंता उचित है कि भारत को आंतरिक और बाहरी मोर्चों पर दोहरा खतरा है, लिहाजा सुरक्षा बलों को ज्यादा चौकन्ना और चुस्त-दुरुस्त रहना पड़ेगा। हालांकि सीमाओं की सुरक्षा कर रही भारतीय सेना तो मजबूत दिखाई दे रही है।
हाल के दिनों में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज होने से उसमें और पैनापन आया है, लेकिन दूसरी तरफ देश की पुलिस में सुधार की काफी जरूरत है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्मार्ट पुलिस का मंत्र काफी अहम है। अर्थात पुलिस स्ट्रिक्ट (सख्त), सेंसेटिव (संवेदनशील), मॉडर्न (आधुनिक) एण्ड मोबाइल (गतिमान), एलर्ट (सतर्क), एकाउंटेबल (जवाबदेह), रिलायबल (भरोसेमंद) और रिस्पॉन्सिबल (जिम्मेदार) होने के साथ ही टेक्नोसेवी (तकनीकी रूप से दक्ष) और ट्रेंड (कुशल) हो। इसमें कोई दो राय नहीं कि राज्यों की पुलिस इन बिंदुओं को ध्यान में रखकर काम करे तो उसकी कार्यक्षमता व संस्कृति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। इन सबके बीच देश का खुफिया तंत्र भी अपना खास महत्व रखता है।
राष्ट्र की सुरक्षा खुफिया तंत्र पर काफी हद तक निर्भर है। प्रधानमंत्री ने कहा भी कि जिस व्यवस्था के पास उन्नत गुप्तचर हों, उसे न तो शस्त्र की जरूरत होती है और न ही शस्त्रधारी की। देश में पुलिस सुधार की मांग लंबे समय से हो रही है। अब समय आ गया है कि राज्य सरकारें इसके लिए आगे आएं। क्योंकि आंतरिक सुरक्षा पुलिस तंत्र पर निर्भर है। यदि पुलिस स्मार्ट नहीं होगी तो सीमाएं सुरक्षित होने के बाद भी देश सुरक्षित नहीं हो पाएगा।
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