Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

दिल्ली की हवाओं में घुलते जहर का कौन जिम्मेदार, केजरीवाल या मोदी सरकार?

देश की राजधानी दिल्ली भले ही अपनी जनता को रैपिड मैट्रो, मेट्रो जैसी सुविधाएं दे रही हो पर साफ हवा देने के मामले में वो अभी भी निचले पायदान पर ही खड़ी है।

दिल्ली की हवाओं में घुलते जहर का कौन जिम्मेदार, केजरीवाल या मोदी सरकार?
X

देश की राजधानी दिल्ली भले ही अपनी जनता को रैपिड मैट्रो, मेट्रो जैसी सुविधाएं दे रही हो पर साफ हवा देने के मामले में वो अभी भी निचले पायदान पर ही खड़ी है। जहां एक ओर राजधानी की जनता हुक्मरानों से साफ हवा देने की गुहार लगा रही है तो वहीं दूसरी तरफ सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोपों का दौर जारी है।

बीते एक साल के दौरान राजधानी का हाल साफ हवा के मामले में बद से बदत्तर होता जा रहा है। राजधानी में सर्दियों के समय फैले प्रदूषण (फॉग) में पराली को लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच लंबा विवाद चला था।

इस बार फिर राजधानी पर धूल का गुबार छाता जा रहा है और इसे लेकर फिर विवाद जारी है। फिलहाल सरकार के आदेशों के बाद दिल्ली में निर्माण कार्य और स्ट्रोन पर रोक लग गई है पर फिर भी राजधानी में इमरजेंसी जैसे हालात ही बने हुए हैं।

इस मामले में केंद्र सरकार और राज्य सरकार एक-दूसरे पर तोहमत लगाने पर लगे हैं। लेकिन मामले को लेकर कोई भी आम जनता की परेशानियां नहीं जान पा रहा है। साफ हवा न मिल पाने के बाद अब सिर्फ हाई कोर्ट का ध्यान ही आम जनता की तरफ जा रहा है।

साफ हवा और साफ पानी आदमी की मौलिक सुविधाएं हैं पर यही सुविधाएं सरकार अपने नागरिकों को मुहैया नहीं करा पा रही है। इस क्षेत्र में शायद सरकारों को एक बार फिर अपनी बनाई नीतियों पर सोचना होगा।

देश के शीर्ष नेता राजधानी में रह रहें हैं। इसके बावजूद भी वे मामले को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। आम जनता की आवाज और उसकी जान की कीमत कोई भी समझना नहीं चाह रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया एयर कंडिशन कमरों में धरने पर बैठ बस राजनीति करने में लगे हुए हैं।

आम आदमी की जान की कीमत उनके वोट बैंक के आगे छोटी हो गई है। दिल्ली सरकार ने पिछले साल ही दिल्ली में आने वाले ट्रकों से ग्रीन सेस के नाम पर भारी कमाई की है, जिसका इस्तेमाल दिल्ली को स्वच्छ बनाने में किया जाना था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इन दिनों न तो सरकार के बाशिंदे दिखाई दे रहें हैं और न हीं दिल्ली को स्वच्छ बनाने की दिशा में किया गया कोई काम नजर आ रहा है।

यदि खुद दिल्ली सरकार की रिपोर्ट की मानें तो उसके मुताबिक 2015 के दौरान सिर्फ दिल्ली में 6502 मौंते प्रदूषण की वजह से हुई थीं। वहीं वर्ष 2016 में ये आंकड़ा बढ़कर 40 प्रतिशत यानि मरने वालों की संख्या 9149 पहुंच गई। इस साल ये आंकड़ा फिर तेजी से बढ़ता जा रहा है।

राजधानी की हवा में तेजी से जहर की मात्रा बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों की मानें तो दिल्ली की हवा आने वाले दिनों में यहां के लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है और मौत की संख्या में भी इजाफा हो सकता है। बीते 4 दिनों में दिल्ली में धूल का गुबार छाया हुआ है। इससे राजधानी के लोगों को सांस लेने में भी परेशानी हो रही है।

दिल्ली का पॉल्यूशन इंडेक्स (पीएम) सामान्य स्तर 10 से चार गुना ज्यादा हो गया है। वहीं पीएम 2.5 सुरक्षित मानकों से दोगुना रहा है। सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली की हवा को खराब हवा की कैटेगरी में रखा जा रहा है। दिल्ली की हवा में बढ़ते जा रहे प्रदूषण में ना सिर्फ बच्चे, बूढ़े प्रभावित हो रहें है बल्कि युवाओं का हाल भी बदहाल हैं।

वर्तमान में राजस्थान से उठ रही धूल को दिल्ली के प्रदूषण का कारण बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि राजस्थान में तेज रफ्तार के साथ हीट वेव चल रही है। पर दिल्ली का सवाल वहीं का वहीं खड़ा हुआ है कि कब तक दिल्ली अपने आस-पास के राज्यों से आने वाली हवाओं की मार झेलती रहेगी।

राजधानी के लोंगों की सुध आखिरकार सरकार कब लेगी। इस मामले में पर्यावरण और स्वास्थ मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का भी बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि हर नागरिक को स्वयं के द्वारा उत्सर्जित किए जाने वाले कार्बनिक तत्वों की निगरानी करनी होगी।

दिल्ली की हवा को अब दिल्ली की जनता और सरकार को ही सुधारना होगा क्योकि यदि ऐसा नहीं किया गया तो न सिर्फ आज के लिए बल्कि आगे आने वाली पीढ़ी के लिए भी पर्यावरण का ये हाल घातक साबित हो सकता है।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top