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प्रमोद भार्गव का लेख: कोरोना आत्मघाती दस्ते बने रोहिंग्या

भारत में कोरोना संक्रमण को बढ़ावा देने की साजिश में जुटे हैं। इसीलिए भारत में जितने भी कोरोना पाॅजीटिव हैं, उनमें से 30 से 40 प्रतिशत इन्हीं लोगों में से बताए जा रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश में एक जमाती में कोरोना की पुष्टि, निगेटिव के बाद निकला पॉजिटिव

देश में लाखों की संख्या में घुसपैठ करके रह रहे रोहिंग्या मुसलमान कोरोना-आत्मघाती दस्ते बनने की गुप्तचर खबरें हैरानी में डालने वाली हैं। इनके तार निजामुद्दीन तब्लीगी मरकज से भी जुड़े हैं। राजधानी दिल्ली ही नहीं पड़ोसी राज्य उत्तर-प्रदेश के लिए भी रोहिंग्या बड़ी चुनौती बन गए हैं। 23 करोड़ की बड़ी आबादी वाले इस राज्य के आठ जिलों में 369 रोहिंग्या छिपे होने की खबरें हैं। इधर इलाहाबाद विवि के प्रोफेसर मोहम्मद शाहिद को आठ देशों के जमातियों को एक मस्जिद में शरण दिलाने के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। इसके कंप्यूटर और मोबाइल मेल व काॅल डिटेल से खुफिया एजेंसियों को चैंकाने वाले इनपुट मिले हैं। शाहिद ने इंडोनेशिया के सात और थाइलैंड के नौ जमातियों को मस्जिद में मरकज के निर्देश पर गोपनीय रूप में ठहराया था। इन सब पर आशंका है कि ये किसी चरमपंथी संगठन के इशारे पर भारत में कोरोना संक्रमण को बढ़ावा देने की साजिश में जुटे हैं। इसीलिए भारत में जितने भी कोरोना पाॅजीटिव हैं, उनमें से 30 से 40 प्रतिशत इन्हीं लोगों में से बताए जा रहे हैं।

दरअसल गृह मंत्रालय ने नई दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में इन रोहिंग्यों को तलाशने के निर्देश दिए है। एक अध्ययन से पता चला है कि रोहिंग्या अपने निर्धारित शिवरों से लापता हैं। हैदराबाद और बैंगलुरू के शरणार्थी हरियाणा के मेवात में आयोजित तब्ालीगी जमात के कार्यक्रम में भी शामिल हुए थे। इसी तरह दिल्ली के श्रम विहार और शाहीन बाग में रह रहे रोहिंग्या मरकज में शामिल हुए थे, जो नहीं लौटे। ये कोविड-19 महामारी फैलाने में लगे हुए हैं, इसलिए इनकी जांच जरूरी है, जिससे कोरोना समूह में स्थानांतरित न होने पाए? खुफिया एजेंसियों को सूत्रों से पता चला है कि कुछ सालों के भीतर 1200 मुस्लिम रोहिंग्या म्यामार से दिल्ली आए। इनमें से 300 तो दूसरे राज्यों में चले गए, लेकिन 900 दिल्ली की कालोनियों में बस गए। इनके पास संयुक्त राष्ट्र संघ का शरणार्थी कार्ड भी है। वैसे इन रोहिंग्यों की संख्या 40 से 60,000 के बीच है, जो दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद, कोलकाता और बैंगलुरू में रह रहे हैं।



कोरोना संक्रमण के प्रसार की भूमिका के निर्वाह में लगे ये तब्ालीगी और रोहिंग्या कोरोना के साथ-साथ आतंक का पर्याय भी बने हैं। इन्हें विदेशों से मोटी धनराशि मिलने की जानकारी भी खुफिया एजेंसियों को मिली है। ऐसे मकसद पूर्ति के लिए ही पाकिस्तान कोरोना संक्रमितों को घाटी में भेज रहा है। पीओके में इसके लिए आतंकवादियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। घाटी से शाहिद नाम का युवक पीओके में आतंकी गतिविधियों का प्रशिक्षण लेने गया था। उसने अपने पिता को फोन पर बताया था कि शिविर में कई लोग कोरोना संक्रमित हैं। उनका इलाज कराने की बजाय उन्हें जम्मू-कश्मीर में भेजने की तैयारी है, जिससे वहां ज्यादा से ज्यादा लोग संक्रमित हो सके। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसे समय में जब भारत समेत पूरी दुनिया इस महामारी के खतरे से जूझ रही है, तब भी पाकिस्तान भारत को तंग करने से बाज नहीं आ रहा है।

स्थानीय बनाम विदेशी नागरिकों का मसला कई राज्यों में सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक जीवन को लंबे समय से झकझोर रहा है। दरअसल बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए शरणार्थी बने रहते, तब तक तो ठीक था, अलबत्ता भारतीय गुप्तचर संस्थाओं को जो जानकारियां मिल रही हैं, उनके मुताबिक पाकिस्तानी गुप्तचर संस्था इन्हें प्रोत्साहित कर भारत के विरुद्ध उकसा रही है। सऊदी अरब से धन की आमद इन्हें धार्मिक कट्टरपंथ का पाठ पढ़ाकर आत्मघाती जिहादियों की नस्ल बनाने में लगी है। जाहिर है, ये जिहादी भारत के लिए किसी भी दृष्टि से शुभ नहीं हैं। बावजूद विदेशी चंदे से पोषित तथाकथित बुद्धिजीवी अरुधंति राय जहर उगल रही हैं। बौद्धिक कुपच की शिकार अरूधंति का बयान उस समय आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महामारी से निपटने के लिए न केवल नेतृत्व कर रहे हैं, बल्कि उनके इस निर्विवाद नेतृत्व को दुनिया ने स्वीकार भी कर लिया है। भारत ने कोविड-19 से बचने की कारगर दवा हाईड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा की करोड़ों खुराक निर्यात कर दी हैं। यही नहीं भारत ने अपने पड़ोसी सार्क देश्ाों को 75 करोड़ की आर्थिक मदद भी की है। लेकिन अरुधंति जैसे बौद्धिक चीन और पाकिस्तान की निर्लज्ज हरकतों पर मौन रहते हैं। जबकि पाकिस्तान, मरकज और रोहिंग्या मुसलमान खुले तौर पर कोरोना संक्रमण के जरिए हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध और पारसियों के सामूहिक नरसंहार में लगे दिखाई दे रहे हैं, लेकिन यह अंरुधति को नहीं दिखता।

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