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चिंतन : इशरत जहां पर कांग्रेस का ''डर्टी गेम'' उजागर

इशरत जहां मामले पर भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रही तथ्यों की लड़ाई

चिंतन : इशरत जहां पर कांग्रेस का
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इशरत जहां मामले पर भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रही तथ्यों की लड़ाई अब संसद पहुंच गई है। इसमें अब कांग्रेस पूरी तरह घिर गई है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में इस मामले के पूरे सच को बता कर एक तरह से कांग्रेस के डर्टी गेम को उजागर कर दिया है। गृहमंत्री ने बताया कि 'यूपीए सरकार ने इशरत जहां मामले में तथ्यों में गड़बड़ी की है। गुजरात हाईकोर्ट में जो हलफनामा पेश किया गया, उसमें इशरत को लश्कर का आतंकी बताया गया था। लेकिन बाद में दूसरे हलफनामे में उसके आतंकी होने की बात को कमजोर कर दिया गया। बाद में इशरत के लश्कर आतंकी होने की बात छिपाई गई।
इस मामले से संबंधित कई दस्तावेज गृह मंत्रालय से गायब है। हलफनामे में तथ्यों के साथ छेड़छाड़ हुई।' अब तक यह सामने आ चुका है कि पहले इशरत को लश्कर-ए-तैयबा का ऑपरेटिव बताने वाला हलफनामा छह अगस्त 2009 को गुजरात उच्च न्यायालय में दाखिल किया गया था, लेकिन अगले महीने ही 24 सितंबर को दूसरा हलफनामा दाखिल कर उसे आतंकवादी मानने से इनकार कर दिया गया। राजनाथ ने कहा कि यूपीए सरकार का यह पूरा 'फ्लिप फ्लॉप' गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को फंसाने व बदनाम करने की गहरी साजिश का हिस्सा था। गृहमंत्री के इस कथन में दम लगता है, क्योंकि जिस समय इशरत जहां एनकाउंटर केस का दूसरा हलफनामा कोर्ट में पेश किया गया था उस समय केंद्र की यूपीए सरकार में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम गृहमंत्री थे।
इसका मतलब है कि हलफनामे में तथ्यों में हेरफेर चिदंबरम की शह पर हुआ। यह भी मानने वाली बात नहीं है कि हलफनामा बिना गृहमंत्री की जानकारी के बदला गया होगा। इशरत केस से जुड़े चिदंबरम के समय के ही पूर्व गृहसचिव जीके पिल्लई और होम मिनिस्ट्री के एक पूर्व अफसर आरवीएस मणि भी कह चुके हैं कि चिदंबरम के इशारे पर ही हलफनामा बदला गया। खुद चिदंबरम भी मान चुके हैं कि हलफनामा बदला गया, लेकिन उन्होंने सफाई दी कि उसमें सुधार किया गया। यूपीए सरकार के समय 2013 में फाइल चार्जशीट में सीबीआई ने इशरत जहां मुठभेड़ को फर्जी बताया था।
अभी भी यह मामला सीबीआई के पास है और कोर्ट में है। इस पूरे मामले को देखने पर कांग्रेस की नीयत में खोट साफ दिखती है। उस समय की फाइलों का गायब होना संदेह को और गहराता है। जिस पार्टी ने देश पर सबसे अधिक समय तक राज किया है और जिसकी सरकार के समय देश ने सबसे अधिक आतंकवाद झेला है, उसकी सरकार के गृहमंत्री कथित रूप से एक मुख्यमंत्री को फंसाने व अल्पसंख्यकों की तुष्टिकरण के लिए किसी के आतंकी होने का सच छिपाएगी। आतंकवाद जैसे गंभीर मसले पर कोई राष्ट्रीय पार्टी ऐसा कैसे कर सकती है। आतंकवाद को कांग्रेस मजहबी रंग कैसे दे सकती है।
बटला हाउस एनकाउंटर के समय भी कांग्रेस को शहीद एमएल शर्मा नहीं दिखाई पड़े, पार्टी को इस एनकाउंटर को फर्जी साबित करने की जल्दी थी। कांग्रेस ने ही देश में भगवा आतंकवाद का वितंडा खड़ा किया था। आज अगर मुंबई हमले के आरोपी पाक-यूएस नागरिक डेविड कोलमैन हेडली ने इशरत के लश्कर आतंकी होने का खुलासा नहीं किया होता तो देश को कांग्रेस सरकार की करतूत का पता ही नहीं चलता। यह कांग्रेस का डर्टी गेम ही था कि इशरत के परिवार को अभी भी लगता है कि उसकी बेटी आतंकी नहीं थी। ऐसे में केंद्र सरकार ने संसद में इशरत जहां के सच को देश के सामने लाकर साहसभरा सराहनीय काम किया है।
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