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यमन में गृहयुद्ध विश्व शांति के लिए खतरा

विद्रोहियों के कब्जे से यमन को आजाद करने के लिए सऊदी अरब की अगुआई वाली गल्फ को-आॅपरेशन काउंसिल की सेना पिछले कुछ दिनों से हुती विद्रोहियों पर हवाई हमले कर रही है।

यमन में गृहयुद्ध विश्व शांति के लिए खतरा

अरब प्रायद्वीप के देश यमन में संकट गहरा गया है। वहां विभिन्न गुटों के बीच हिंसक संघर्ष ने भीषण गृहयुद्ध का रूप ले लिया है। विद्रोही हुती व पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला अली सालेह के समर्थकों से यमन की सरकार घिर गई है। जिसके चलते मौजूदा राष्ट्रपति आबिद रब्बो मंसूर हादी को देश छोड़कर रियाद भागना पड़ा है।

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विद्रोहियों के कब्जे से यमन को आजाद करने के लिए सऊदी अरब की अगुआई वाली गल्फ को-आॅपरेशन काउंसिल की सेना पिछले कुछ दिनों से हुती विद्रोहियों पर हवाई हमले कर रही है। इसमें सऊदी अरब को दूसरे अरब देशों जैसे मिस्र, जॉर्डन, सूडान आदि का भी सहयोग मिला हुआ है। उसके इस सैनिक कार्रवाई का अमेरिका भी समर्थन कर रहा है।

सऊदी अरब और उसके समर्थकों का आरोप है कि यमन की मौजूदा संकट के लिए ईरान जिम्मेदार है, क्योंकि उसी ने विद्रोहियों को धन और हथियार दिए हैं। वहीं यमन में सऊदी अरब और अमेरिका की उपस्थिति पर ईरान कड़ा रुख अख्तियार किए हुए है। यमन में ईरान और सऊदी अरब के इशारों पर चलने वाला यह गृहयुद्ध भारत समेत समूचे दक्षिणी-पूर्वी एशिया के लिए चिंता का सबब बना हुआ है।

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हमारा ज्यादातर तेल और गैस इसके अदन की खाड़ी से ही होकर आता है। वहीं हजारों की संख्या में भारतीय नागरिक वहां रोजी रोटी के लिए हर साल जाते हैं। इस गृहयुद्ध ने उन्हें भी संकट में डाल दिया है। हालांकि भारत सरकार वहां फंसे सभी भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए सक्रियता दिखा रही है। उम्मीद है कि आने वाले कुछ दिनों में सभी नागरिक सुरक्षित वतन आ जाएंगे।

यमन पिछले कुछ वर्षों से नकारात्मक खबरों के कारण चर्चा में रहा है। अब्दुल्ला अली सालेह के शासन काल में कुछ शांति आई थी, लेकिन 2011-12 के दौरान अरब स्प्रिंग आंदोलन की आंधी में उनकी भ्रष्ट, निरंकुश सत्ता उखड़ गई थी। उन्हें यमन से भागने की नौबत आ गई। उनके सत्ता से बेदखल होने के बाद गल्फ को-आॅपरेशन काउंसिल के सहयोग से यमन में अंतरिम सरकार का गठन किया गया था। वह सरकार बहुत प्रभावकारी साबित नहीं हुई है।

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माना जा रहा है कि यमन के इस हालात के लिए वहां की सरकार की विभाजनकारी नीतियां ज्यादा जिम्मेदार हैं। उसकी गलत नीतियों ने हुती के हितों की रक्षा की, जिसकी वजह से यह गुट इतना मजबूत होकर उभरा है। हुती शिया समुदाय के लोगों का एक विद्रोही गुट है। आज यमन के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र सहित राजधानी सना और आर्थिक राजधानी अदन पर भी उसका कब्जा है।

यमन की सेना को एक तरह जहां विद्रोहियों से लड़ना पड़ रहा है वहीं दूसरी तरफ अलकायदा और आईएसआईएस भी उनके लिए सिरदर्द बने हुए हैं। आज यमन जिस तरह से कट्टरपंथी ताकतों की लड़ाई में फंसा हुआ है, उसे देखते हुए कहा जाने लगा है कि आने वाले दिनों में वहां भी सीरिया जैसे हालात पैदा हो जाएंगे। अरब स्प्रिंग का यह अंत सचमुच चिंताजनक है। अच्छा होता कि अमेरिका जैसे बडे देश इस झगड़े को शांतिपूर्वक सुलझाने को आगे आते। संयुक्त राष्टÑ को यमन में शांति कायम करने के लिए वैश्विक पहल करनी चाहिए।

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