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चिंतन: विमानन क्षेत्र को वैश्विक स्तर का बनाने की पहल

पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट मीटिंग में नई एविएशन पॉलिसी को मंजूरी दे दी गई।

चिंतन: विमानन क्षेत्र को वैश्विक स्तर का बनाने की पहल
नई विमानन पॉलिसी से चालू वित्त वर्ष के दौरान करीब नौ हजार करोड़ रुपये के घाटे के भंवर में फंसे भारतीय एविएशन सेक्टर को संजीवनी मिल सकती है। नई पालिसी देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर (रेल, रोड, बंदरगाह और एयरपोर्ट) को वर्ल्ड क्लास बनाने में जुटी मोदी सरकार का विमानन क्षेत्र में सुधार के लिए बड़ा कदम है। यह पहली समेकित राष्ट्रीय एविएशन पॉलिसी है। इसमें एयापोर्ट के विकास के साथ-साथ यात्री सुविधाओं पर भी जोर दिया गया है।
अक्सर कहा जाता है कि भारत का एविएशन सेक्टर अभी भी वर्ल्ड क्लास का नहीं है। हमारे पास दिल्ली, मुंबई जैसे दो-तीन ही इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के एयरपोर्ट हैं। जबकि देश में एविएशन सेक्टर में भारी संभावनाएं हैं। यह क्षेत्र सालाना 14 फीसदी की दर से ग्रोथ कर रहा है। दुनिया के टॉप-5 कंट्री में शुमार भारतीय एविएशन सेक्टर का अभी तक उचित दोहन नहीं किया गया है। टियर दो और टियर तीन र्शेणी के शहरों को तो हवाई रूट से जोड़ा ही नहीं गया है।
जबकि आर्थिक तरक्की के साथ इन शहरों में हवाई यात्री बढ़े हैं। 30 फीसदी एयर ट्रैफिक आज नन-मेट्रो शहरों में है, कुछ ही सालों में यह 45 फीसदी पर पहुंचेगा। उद्योग संगठनों के मुताबिक सालाना 15 से 20 फीसदी की रफ्तार से हवाई यात्रियों की संख्या बढ़ रही है। मिड सेगमेंट प्लेन में बड़ी संभावनाएं है। सरकार की योजना 200 छोटे शहरों में एयरपोर्ट बनाने की है। इस मायने में नई एविएशन पॉलिसी से निश्चित ही जहां एयरपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने में मदद मिलेगी, वहीं यात्रियों को भी लाभ होगा।
अब एक घंटे के सफर के लिए सभी शुल्क सहित 2500 रुपये व 30 मिनट के लिए 1200 रुपये किराया देने होंगे। इससे घरेलू क्षेत्रीय जोन में विमान यात्रा को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रेलवे पर बोझ कम होगा। अब यात्रियों को घरेलू टिकट कैंसिल कराने पर रिफंड पंद्रह दिनों के अंदर मिल जाएगा, जबकि अंतरराष्ट्रीय हवाई टिकट कैंसिल करवाने पर 30 दिन के अंदर रिफंड मिलेगा। अगर कोई यात्री अपना टिकट कैंसिल करवाता है तो कैंसिलेशन चार्ज के तौर पर 200 रुपये से ज्यादा वसूला नहीं जा सकता। इससे छोटे शहरों के बीच एयर लिंक में इजाफा होगा।
विमानन कंपनियों के लिए खास है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 20 ही विमानों की जरूरत होगी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सेवा शुरू करने के लिए पांच साल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। विमान में ओवर बुकिंग होने पर अगर यात्री को सवार नहीं होने दिया जाता है तो उसकी मुआवजा राशि बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दी गई है। उड़ान के वक्त से 24 घंटे के अंदर फ्लाइट कैंसिल होती है तो मुआवजे की राशि 10 हजार रुपये तक होगी। प्रोमो और स्पेशल फेयर्स समेत सभी पर रिफंड्स लागू होंगे। 15 किलो के सामान के बाद 5 किलो तक के लिए 100 रुपये प्रति किलो से ज्यादा चार्ज नहीं किए जाएंगे।
ये सभी नियम अच्छी पहल है। दरअसल, नई पॉलिसी का मकसद ऐसी एविएशन इन्फ्रास्ट्रक्चर भी तैयार करना है, जो 2022 तक 30 करोड़ घरेलू यात्रियों को, 2027 तक 50 करोड़ घरेलू यात्रियों को और 2027 तक ही 20 करोड़ अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों को सेवा देने में सक्षम हो। भारत वर्ष 2022 तक दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक उड्डयन बाजार बनना चाहता है। लेकिन किंगफिशर की कंगाली, एयर इंडिया का लगातार बढ़ता घाटा और अब स्पाइसजेट की तंगहाली जैसे चुनौतियों से भी नई पॉलिसी को पार पाना होगा।
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