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आतंकवाद पर एक साथ आए भारत-इजरायल, हिन्दू-यहूदी अस्मिता की लिखी गई नई कहानी

भारत और इजरायल के बीच काफी कुछ सामान्य आतंरिक और कूटनीतिक परिस्थितियां हैं, सामरिक और जन सांख्यिकी चुनौतियां भी एक सामान हैं, इसलिए दोनों देशों के बीच में साझेदारियां, गठजोड़ और वैश्विक समझ समय और परिस्थितियों की मांग है, जो दोनों देश समझते हैं।

आतंकवाद पर एक साथ आए भारत-इजरायल, हिन्दू-यहूदी अस्मिता की लिखी गई नई कहानी

भारत और इजरायल के बीच काफी कुछ सामान्य आतंरिक और कूटनीतिक परिस्थितियां हैं, सामरिक और जन सांख्यिकी चुनौतियां भी एक सामान हैं, इसलिए दोनों देशों के बीच में साझेदारियां, गठजोड़ और वैश्विक समझ समय और परिस्थितियों की मांग है, जो दोनों देश समझते हैं। अब यहां यह प्रश्न उठता है कि भारत और इजरायल के बीच सामान्य परिस्थितियां और समान चुनौतियां कौन सी हैं और वे दोनों देशों को कैसे आतंकित करती हैं तथा एकजुट होकर सामना करने के लिए प्रेरित करती हैं?

सबसे बड़ी सामानता तो यह है कि इजरायल और भारत में अभी राष्ट्रवादी सरकारें हैं, राष्ट्रवादी सरकारें राष्ट्र की सुरक्षा और अस्मिता को लेकर चाक-चौबंद होती हैं। भारत जहां पाकिस्तान के आतंकवाद से ग्रसित है, चीन की उपनिवेशिक और सामंतवादी मानसिकता का भारत सामना कर रहा है वहीं इजरायल फलस्तीनी आतंकवाद से ग्रसित है, वह चारों तरफ से ऐसे मुस्लिम राष्ट्रों से घिरा हुआ है जिनकी सोच जेहादी इस्लाम पर आधारित है। इसके बावजूद इजरायल अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने से वह रुकता नहीं है और जैसे को तैसे के सिद्धांत पर आक्रमकता के साथ सक्रिय रहता है।

खुद की शक्ति पर वह मुस्लिम देशों की सेना को परास्त कर चुका है। जब परिस्थितियां और चुनौतियां एक समान होती हैं, जब सामरिक समस्याएं एक समान होती है तो फिर दोस्ती और साझेदारी की समृद्धि स्वाभाविक होती है। आज इजरायल और भारत के बीच जो कूटनीतिक और सामरिक साझेदारियां विकसित हुई हैं वह चीन, पाकिस्तान जैसे हमारे पड़ोसियों की कुदृष्टि को जमींदोज करने के लिए जरूरी है। अभी- अभी इजरायली पीएम बैंजामिन नेतन्याहू का भारत दौरे ने एक अहम युग की शुरुआत कर दी है।

नेतन्याहू को भारत किस सम्मान के साथ देखता है, इसका एक उदाहरण यहां प्रस्तुत करने के लिए काफी है। आमतौर पर शासकों की आगवानी भारत के प्रधानमंत्री नहीं करते हैं, पर प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद दिल्ली में हवाई अड्डे पहुंचकर बैंजामिन नेतन्याहू का स्वागत किया। नेतन्याहू ने भी मोदी को सिर्फ नरेंद्र कह कर संबोधित किया जो इन दोनों नेताओं के बीच आत्मीय संबधों और साझेदारियों को प्रदर्शित करने के लिए काफी है। भारत और इजरायल के बीच में कुल नौ समझौते हुए हैं।

इन नौ समझौतों में रक्षा, ऊर्जा, फिल्म उद्योग, गैस, तेल और कृषि आदि से संबंधित है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है और भारत ने विदेशी निवेश की सभी बेडि़यों को बंधन को मुक्त कर दिया है, इसलिए इजरायल के निवेशक भारत में निसंकोच निवेश कर सकते हैं। सबसे बड़‍ी बात यह है कि मुंबई हमले के घाव फिर हरे हुए हैं। नेतन्याहू उस बच्चे को भी साथ लेकर आए हैं जो मुबंई हमले में बच गया था। उल्लेखनीय है कि मुंबई पर 2008 में पाक प्रायोजित हमला हुआ था। जेहादी इस्लाम से प्रेरित मुंबई हमले में यहूदी और हिंदू अस्मिता एक समान तौर पर निशाने पर थी।

आतंकियों ने मुंबई के उन क्षेत्रों को निशाना बनाया था जहां पर खासकर यहूदी आबादी रहती थी। यहूदी भारत को अपना दूसरा घर मानते हैं। यहूदियों को भारत में कोई परेशानी नहीं हैए यहूदी भी भारत की अस्मिता और सुरक्षा में कोई समस्या खड़ी नहीं करते हैं, पर पाक और उसके द्वारा पाले गए आतंकवादी यहूदी और हिंदू दोनों को अपने निशाने पर रखते हैं। एक ओर जहां पाक से प्रेरित आतंकी हिंसा के बल पर कश्मीर को हड़पना चाहते हैं तो दूसरी ओर इजरायल और यहूदी की अस्मिता को कुचलकर फलस्तीन की अस्मिता का परचम लहराना चाहते हैं।

उल्लेखनीय है कि फलस्तीन में इजरायल विरोधी आतंकवाद चरम पर रहता है, इसलिए पाकिस्तान ही नहीं बल्कि दुनियाभर के आतंकवादियों के खिलाफ भारत और इजरायल के संयुक्त अभियान और वैचारिक साझेदारियां समय की मांग है। जब तक देश में कांग्रेस की सरकार थी, तब तक इजरायल से भारत के कूटनीतिक संबंध नहीं थे। यह धारणा बन गई थी कि इजरायल से संबंध जुड़ने से मुस्लिम देश नाराज हो जाएंगे। पहली बार इस अवधारणा को तोड़ने की बात पीवी नरसिंह राव की सरकार में हुई थी, लेकिन सही अर्थों में वाजपेयी सरकार ने इजरायल से कूटनीतिक संबंध स्थापित कर नए युग की शुरुआत की थी।

कारगिल आक्रमण के समय अगर इजरायल ने भारत की मदद नहीं की होती तो हमारी सेना समस्याग्रस्त होती यह भी जगजाहिर है। इजरायल ने सीमा सुरक्षा की आधुनिक तकनीकी दी है जो आतंकवादियों की घुसपैठ रोकने में बडी भूमिका निभा रही है।

अमेरिका और सोवियत संघ के बाद इस्राइल ही वह देश है जिसके पास आधुनिक सामरिक शक्तियां हैं, अमेरिका और यूरोप जहां हमें सीमित रक्षा सहायता करने के लिए तैयार तो हैं पर आधुनिक मारक क्षमता वाले हथियार देने के रास्ते में आनाकानी का रवैया अपनाते हैं।

इजरायल ने भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करने का भरोसा दिया है जो स्वागत योग्य और विश्वसनीय है, पर भारत को भी ऐसी सोच से मुक्ति चाहिए।

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