Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

ओबामा ने भारत के साथ संबंधों को दी नई ऊंचाई

143 साल बाद 2008 में बराक ओबामा के तौर पर पहली बार कोई अश्वेत अमेरिका का राष्ट्रपति बना था।

ओबामा ने भारत के साथ संबंधों को दी नई ऊंचाई
X
बराक ओबामा अमेरिकी लोकतंत्र के इतिहास में एक अनूठे राष्ट्रपति के रूप में दर्ज होंगे। दासप्रथा खत्म होने के 143 साल बाद 2008 में बराक ओबामा के तौर पर पहली बार कोई अश्वेत अमेरिका का राष्ट्रपति बना। खास बात ये ही रही कि अमेरिकी लोकतंत्र में अब्राहम लिंकन और मार्टिन लूथर किंग जैसे अश्वेत नेताओं को बहुसंख्यक श्वेत समुदायों ने तहेदिल से कभी नहीं अपनाया, जबकि बराक ओबामा को श्वेत समुदायों का भी भारी समर्थन मिला। वे अपार जनमत के साथ जब अमेरिका के राष्ट्रपति बने, उस समय अमेरिका भयानक मंदी के दौर से गुजर रहा था। सबप्राइम संकट की वजह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी, लैहमन ब्रदर्स समेत 300 से अधिक बैंक डूब चुके थे। दिनोंदिन डालर गिर रहा था। बहुत ही सूझबूझ से राष्ट्रपति ओबामा ने न केवल अमेरिका को मंदी से उबारा, बल्कि उन्होंने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाई। व्हाइट हाउस के आंकड़ों के मुताबिक ओबामा के आठ साल के कार्यकाल में 1 करोड़ 37 लाख नई नौकरियां उपलब्ध हुईं।
वहीं अमेरिका में बेरोजगारी दर भी कम होकर 5 प्रतिशत पर आ गई। ओबामा ने अमेरिकी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए बारह देशों के साथ टीपीपी समझौता किया। कहा जाता है कि टीपीपी में विश्व व्यापार संगठन यानी डब्ल्यूटीओ के प्रभाव को क्षीण करने की क्षमता है। अपने दो कार्यकाल में ओबामा ने एक शक्तिमान राष्ट्र के रूप में अमेरिका की साख व प्रतिष्ठा को और मजबूत किया। ओबामा के कार्यकाल का सबसे बड़ा फैसला 9/11 को अंजाम देने वाला आतंकी और अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन का खात्मा करने का मिशन था। ओबामा के कार्यकाल के दौरान भारत के साथ रिश्ते और प्रगाढ़ हुए। संबंधों में गर्मजोशी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरे आठ साल में भारत ही ऐसा देश रहा, जहां ओबामा दो बार आए। 2005 में जब मनमोहन की सरकार और रिपब्लिकन राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के बीच असैन्य परमाणु करार हुआ था, उसके बाद ओबामा की सरकार ने भारत के साथ असैन्य परमाणु रिश्ते को और आगे बढ़ाया। शीत युद्ध के कटु अनुभव के बाद सही मायने में ओबामा के दौर में ही भारत और अमेरिका अहम वैश्विक साझेदार बने।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बराक ओबामा ने बहुत जल्दी मजबूत रिश्ते कायम किए। भारत और अमेरिका ने रक्षा क्षेत्र में बड़ा समझौता किया, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं व सैन्य हवाई पट्टियों आदि का उपयोग कर सकते हैं। भारत को एमटीसीआर की सदस्यता दिलाने में ओबामा ने अहम योगदान दिया। भारत को एनएसजी में प्रवेश दिलाने के लिए भी उन्होंने काफी कोशिश की है। चीनी अड़ंगा के बावजूद एनएसजी में भारत की एंट्री की सूरत बनती दिख रही है। मोदी और ओबामा ने वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। ओबामा सरकार ने इस्लािमक स्टेट समेत पश्चिम एशिया के कई आतंकी संगठनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की।
खुद बराक ओबामा आतंकवाद के खात्मे की वकालत करते रहे। वे पीएम मोदी के आतंकवाद पर कड़े रुख का समर्थन करते रहे। अपने कार्यकाल के आखिरी साल में बराक ओबामा ने क्यूबा की यात्रा कर शीत युद्ध के समय से चली आ रही दशकों पुरानी शत्रुता को खत्म करने की पहल की थी। अमेरिका ने 55 साल तक क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे थे। इसके बाद ओबामा 88 साल बाद क्यूबा की यात्रा करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने थे। बराक ओबामा ने बीते साल जापान के हिरोशिमा का ऐतिहासिक दौरा किया। वे हिरोशिमा की यात्रा करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने। ओबामा ने अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए देश में समलैंगिक विवाह को कानूनी बनाया।
अब अमेरिका के सभी 50 राज्यों में समलैंगिक विवाह संबंधी कानून है। ओबामा ने अमेरिकियों को सस्ते में इलाज मुहैया कराने के लिए ओबामा हेल्थ केयर योजना शुरू की। ओबामा लोकतंत्र को मजबूत करने, सबको साथ लेकर चलने, आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख अपनाने और विश्व में शांति की पहल करने वाले अमेरिकी नेता के रूप में सदा सराहना पाते रहेंगे। वैश्विक शांति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के चलते ही ओबामा शांति के नोबेल सम्मान से नवाजे गए। ओबामा संयुक्त राष्ट्र में अपेक्षित सुधार नहीं करा पाए। अब जब ट्रंप अमेरिका की कमान संभालेंगे, तो उम्मीद की जानी चाहिए कि वे ओबामा की तरह वैश्विक संबंधों को मजबूत करेंगे।
अब जब रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को अमेरिका की कमान संभालने जा रहे हैं, उससे पहले शिकागो में अपने विदाई भाषण में बराक ओबामा अमेरिका के भविष्य को लेकर चिंतित दिखे। उन्होंने लोकतंत्र को नस्लवाद, असमानता और नुकसानदेह राजनीतिक माहौल से खतरा बताते हुए अमेरिकियों से इसकी रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। ओबामा ने अफसोस जताया कि वर्ष 2008 में देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति के रूप में उनके ऐतिहासिक चुनाव के बाद भी नस्लवाद हमारे समाज में ताकतवर और अक्सर विभाजनकारी ताकत के रूप में बरकरार है। हमें अमेरिका में रह रहे प्रवासियों के बच्चों पर निवेश करना होगा क्योंकि ये आने वाले दिनों में हमारी वर्कफोर्स का हिस्सा बनेंगे। उन्होंने कहा कि, आज चीन और रूस जैसे देश क्यों दुनिया में अमेरिका की जगह नहीं ले पाते, क्योंकि हमारा लोकतंत्र ही हमारी ताकत है।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top