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क्या है पीटा एक्ट, कैसे बचकर निकल जाते हैं अपराधी

देह व्यापार में संलिप्त लोगों के पकड़े जाने पर पुलिस पीटा एक्ट के तहत कार्रवाई तो करती है, लेकिन मामला कोर्ट में पहुंचने के बाद ठंडा पड़ जाता है। पिछले दो वर्ष में पुलिस ने 20 ज्यादा पीटा एक्ट के मामले दर्ज किए हैं। पिछले पांच वर्षों में कोर्ट में पीटा एक्ट के जितने भी मामले पहुंचे हैं, पुलिस किसी भी मामले में आरोपियों को सजा दिलाने में नाकाम साबित हुई है।

क्या है पीटा एक्ट, कैसे बचकर निकल जाते हैं अपराधी
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देह व्यापार में संलिप्त लोगों के पकड़े जाने पर पुलिस पीटा एक्ट के तहत कार्रवाई तो करती है, लेकिन मामला कोर्ट में पहुंचने के बाद ठंडा पड़ जाता है। पिछले दो वर्ष में पुलिस ने 20 ज्यादा पीटा एक्ट के मामले दर्ज किए हैं। पिछले पांच वर्षों में कोर्ट में पीटा एक्ट के जितने भी मामले पहुंचे हैं, पुलिस किसी भी मामले में आरोपियों को सजा दिलाने में नाकाम साबित हुई है।

शहर के आउटर और पॉश कालोनियों में निजी और सार्वजनिक स्थानों में देह व्यापार संचालित होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस पाइंटर भेजकर छापे की कार्रवाई करती है। पाइंटर के निशानदेही पर पुलिस जहां छापा मारने जाती है। वहां अश्लील गतिविधि संचालित होने की स्थिति में और दो से अधिक लोगों की मौजूदगी होने पर पुलिस पीटा एक्ट के तहत कार्रवाई कर चालान न्यायालय में प्रस्तुत करती है। पुलिस द्वारा पूरी मशक्कत करने के बाद आरोपियों को पकड़ना और आरोपियों को कोर्ट की दहलीज तक पहुंचाने के बावजूद इसके आरोपियों का कोर्ट से बाइज्जत बरी हो जाना कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाती है।

जमानतदार तक नहीं मिलते

पुलिस ने अब तक पीटा एक्ट की जितनी भी कार्रवाई की है। आरोपियों के जमानत लेने कोई सामने नहीं आता, बावजूद इसके आरोपी कोर्ट से बाइज्जत बरी हो जाते हैं। जानकारों की मानें तो पर्दे के पीछे से देह व्यापार संचालित करने वाले गिरोह के लोग मामला ठंडा पड़ने के बाद आरोपियों के जमानत के लिए कोर्ट में आवेदन लगाते हैं। सामाजिक बदनामी से बचने के लिए जमानतदार ऐसा करते हैं।

यह है पीटा एक्ट की सजा

पीटा (प्रिवेंशन ऑफ इम्मोरल ट्रैफिकिंग एक्ट) एक्ट अनैतिक देह व्यापार को रोकने के लिए 1956 में कानून बनाया गया है। 1986 में इसमें संशोधन किया गया। इस कानून के तहत अनैतिक देह व्यापार करने वाली कॉलगर्ल को तीन से छह माह की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। ग्राहक के लिए कानून में अलग-अलग सजा है। पब्लिक प्लेस या नोटिफाइड एरिया में गिरफ्तार होने पर तीन माह की सजा। कॉलगर्ल अगर 18 साल से कम उम्र की हो तो ग्राहक को 7 से 10 साल की सजा हो सकती है।

इसलिए बच निकलते हैं आरोपी

विधि विशेषज्ञों के मुताबिक पीटा एक्ट की कार्रवाई में आरोपियों के बचने की सबसे बड़ी वजह इसमें पुलिस ही गवाह रहती है। इसमें जो स्वतंत्र गवाह होते हैं, वे भी पुलिस द्वारा भेजे गए पाइंटर होते हैं। कोर्ट में पाइंटर आरोपियों को पहचानने से इनकार कर देते हैं या फिर वे अभियुक्तों के साथ सांठ-गांठ कर कोर्ट में बयान बदल देते हैं। इस वजह से कोर्ट में सबूतों के अभाव में आरोपियों को संदेह का लाभ मिल जाता है।

दो साल में 20 से ज्यादा मामले

राजधानी के विभिन्न थानों की पुलिस ने पिछले दो वर्ष में पीटा एक्ट के तहत 20 से ज्यादा कार्रवाईयां की हैं। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक वर्ष 2017 में पीटा एक्ट की चार कार्रवाईयां हुई हैं। इसी तरह वर्ष 2018 में पीटा एक्ट की 20 कार्रवाईयां पुलिस ने की हैं। चालू वर्ष में पुलिस ने विधानसभा थाना क्षेत्र, शंकर नगर, राजेंद्र नगर, पुरानी बस्ती और पंडरी स्थित श्याम प्लाजा के स्पॉ सेंटर में पुलिस ने दो बार छापा मारकर पीटा एक्ट की कार्रवाई की है।

कार्रवाई तो करते हैं

हम मजबूत कार्रवाई करते हैं। पीटा एक्ट में आरोपियों को सजा नहीं मिलने का सबसे बड़ा कारण पाइंटर लोकल होते हैं, वो आरोपियों के प्रभाव में आकर अपना बयान बदल देते हैं। इस वजह से आरोपी बाइज्जत बरी हो जाते हैं। - प्रफुल्ल ठाकुर, एएसपी सिटी

साक्ष्यों का अभाव

इस तरह के प्रकरण में पुलिस वाले ही साक्षी होते हैं। जो स्वतंत्र साक्ष्य रहते हैं, उनकी कहीं न कहीं आरोपियों के साथ सांठ-गांठ रहती है। इस तरह साक्ष्यों के अभाव में आरोपी कोर्ट से बरी हो जाते हैं। - योगेंद्र ताम्रकार, विशेष अपर लोक अभियोजक

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