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Video: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव। राहुल गांधी को न बोलने देने, सांसद निलंबन और निष्पक्षता पर सवाल- क्या लोकतांत्रिक मर्यादा संकट में है?

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक असाधारण और गंभीर घटनाक्रम सामने आया है। विपक्ष के 118 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया है। 75 वर्षों में यह केवल चौथी बार है जब सदन के सर्वोच्च पद पर बैठे अध्यक्ष की निष्पक्षता और कार्यशैली पर औपचारिक चुनौती दी गई है।

विवाद के बीच नैतिकता का हवाला देते हुए ओम बिरला ने फैसला आने तक सदन की कार्यवाही से खुद को अलग करने का निर्णय लिया है। विपक्ष का आरोप है कि सत्ता पक्ष के प्रति झुकाव के कारण वह संतुलन टूट गया है, जिसकी अपेक्षा एक अध्यक्ष- यानी सदन के ‘पंच’- से की जाती है।

इस अविश्वास प्रस्ताव की पृष्ठभूमि में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने से रोके जाने, 8 सांसदों के निलंबन और विपक्षी आवाज को दबाने के आरोप हैं। विपक्ष का कहना है कि जब रक्षक ही निष्पक्ष न रहे, तो लोकतांत्रिक मर्यादा खतरे में पड़ जाती है।

सबसे बड़ा सवाल यही है-
क्या लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका पर अविश्वास, संसद की आत्मा पर उठता प्रश्न है?

सवाल एक नहीं बहुतेरे हैं, जिन पर हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने विशेष “चर्चा” की।   
इस खास पेशकश में शामिल हुए-  राजनीति और पत्रकारिता से जुड़े दिग्गज 

  • सुनीता दुग्गल - पूर्व सांसद, भाजपा
  • श्रवण गर्ग - वरिष्ठ पत्रकार
  • सुमित मेहरोत्रा - प्रवक्ता, TMC
  • डॉ. अजय उपाध्याय - प्रवक्ता, AICC

किसने क्या कहा? जानने के लिए देखें पूरी चर्चा 

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