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उद्धव ठाकरे जन्मदिन: 60 साल के हुए उद्धव, जानें फोटोग्राफर से कैसे बने नेता

उद्धव ठाकरे की शिवसेना को चलाने में कभी दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन धीरे-धीरे वर्ष 1994 तक उद्धव ठाकरे की राजनीति में एंट्री हो गई थी। बताया जाता है कि राजनीति में उद्धव ठाकरे की कतई दिलचस्पी नहीं थी।

उद्धव ठाकरे जन्मदिन: 60 साल के हुए उद्धव, जानें फोटोग्राफर से कैसे बने नेता
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उद्धव ठाकरे जन्मदिन: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का आज 60वां जन्मदिन है। इसी के साथ उद्धव ठाकरे ने अपनी जिंदगी के 60 साल का सफर पूरा किया है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक अलग ही मुकाम हासिल किया है। उद्धव ठाकरे अपने पिता और शिवसेना के संस्थापक बालासाहब ठाकरे का सपना साकार करने के लिए कांग्रेस-एनसीपी से हाथ मिलाकर उद्धव ठाकरे राज्य के मुख्यमंत्री बने। राजनीति में आने से पहले उद्धव ठाकरे मशहूर फोटोग्राफर रहे हैं चलिए उनके जन्मदिन के मौके पर जानते हैं वे फोटोग्राफर से राजनेता कैसे बने?

फोटोग्राफर कैसे बना राजनेता?

बताया जाता है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना को चलाने में कभी दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन धीरे-धीरे वर्ष 1994 तक उद्धव ठाकरे की राजनीति में एंट्री हो गई थी। बताया जाता है कि राजनीति में उद्धव ठाकरे की कतई दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन उनकी मां मीनाताई की इच्छा थी कि उद्धव राजनीति में प्रवेश करें।

उद्धव ठाकरे की मां चाहती थी कि उनका बेटा कम से कम बालासाहेब का साथ दें और उनकी राजनीति को आगे बढ़ाए। बड़े बेटे जयदेव से बाल ठाकरे की किसी बात को लेकर कहासुनी रहती थी इस कारण इन दोनों में मनमुटाव रहता था। जब उद्धव ठाकरे 34 साल के थे तब उनकी मां ने उनसे कहा था कि तुम पार्टी के कार्यक्रमों में जाया करो। उद्धव ठाकरे ने अपनी मां की आज्ञा का पालन करते हुए पार्टी के कार्यक्रमों में जाना शुरू किया।

इस समय उद्धव ठाकरे पहली बार पार्टी कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे तो उस समय विधानसभा चुनाव का माहौल बना हुआ था। राज के नेतृत्व में 'भारतीय विद्यार्थी सेना' ने नागपुर में एक मोर्चा निकाला था। इसमें उद्धव ठाकरे पहुंचे। इस दौरान एक दम शांत थे लेकिन लोगों को मालूम नहीं था कि यह तूफान से पहले की शांति थी।

फिर उद्धव ठाकरे ने एक-दो साल में ही पार्टी में अपने पैरों को जमाना शुरू कर दिया था। क्योंकि उन्हें समझ आ गया था कि पार्टी में पैर जमाने का इससे अच्छा समय और कोई नहीं हो सकता। इस दौरान उन्होंने पार्टी के अंदरूनी कामों में भी अपनी पकड़ जमाना शुरू कर दी थी। बाल ठाकरे भी तमाम कार्यकर्ताओं को उनके कामों के लिए उद्धव ठाकरे के पास भेजने लगे थे। कार्यकर्ताओं ने भी उद्धव को अपने कार्यकर्मों में बुलाना शुरू कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो उद्धव ठाकरे ने अपना पहला दांव वर्ष 1997 के बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (बीएमसी) चुनाव में लगाया। टिकट बंटवारे में उद्धव की मनमानी हुई। राज ठाकरे कुछ साइड में कर दिए गए। राज ठाकरे नाराज हो गए थे। उद्धव ठाकरे धीरे-धीरे महाराष्ट्र की राजनीति को काफी समझ चुके थे और उन्होंने शिवसेना पर पूरा कब्जा मजबूत बना लिया था। वर्ष 2002 के बीएमसी चुनाव में टिकट बंटवारे में पूरी तरह से उद्धव ठाकरे की चली थी और शिवसेना फिर एक बार जीती। राज ठाकरे के लोगों के फिर एक बार टिकट कटे। राज और नाराज हुए। पार्टी के अंदर कई खेमे बन गए। माने उद्धव अब खुलकर मैदान में आ चुके थे। और साबित कर चुके थे कि वे शिवसेना का हिसाब किताब समझ रहे हैं। और बढ़िया समझ रहे हैं। इस तरह उद्धव ठाकरे ने राजनीति में अपने पैर जमाए और महाराष्ट्र मुख्यमंत्री बने।

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