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CJI NV Ramana: जस्टिस एन वी रमना बने देश के 48वें मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिलाई शपथ, जानें इनके बारे में

एन वी रमना (NV Ramana) का चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (Chief Justice of India-CJI) के तौर पर कार्यकाल 26 अगस्त 2022 तक होगा।

CJI NV Ramana: जस्टिस एन वी रमना बने देश के 48वें मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिलाई शपथ, जानें इनके बारे में
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CJI NV Ramana: जस्टिस नुतालपति वेंकट रमना (एन वी रमना- NV Ramana) भारत के 48वें मख्य न्यायाधीश (CJI) बने हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) ने एनवी रमना को मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ (Oath) दिलाई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शपथ समारोह के कार्यक्रम में पीएन नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू समेत सुप्रीम कोर्ट के कई जज मौजूद रहे। जानकारी के अनुसार, अल्पभाषी और सौम्य स्वभाव के जस्टिस रमना का कार्यकाल लगभग 16 महीने का होगा।

खबरों से मिली जानकारी के मुताबिक, एन वी रमना (NV Ramana) का चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (Chief Justice of India-CJI) के तौर पर कार्यकाल 26 अगस्त 2022 तक होगा। यानी वह 16 महीने इस पद पर बने रहेंगे। बता दें कि एन वी रमना का जन्म 27 अगस्त 1957 को आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के कृष्णा जिले (Krishna district) के पोन्नावरम गांव (Ponnavaram Village) में हुआ था। एन वी रमना कॉलेज के दिनों में छात्र राजनीति से जुड़े रहे और कुछ समय तक पत्रकारिता (Journalism) भी की।

एन वी रमना ने वर्ष 1983 में फरवरी में वकालत शुरू की थी। वे आंध्र प्रदेश के एडिशनल एडवोकेट जनरल (Additional Advocate General) रहने के अलावा केंद्र सरकार के भी कई विभागों के वकील रहे है। वे वर्ष 2000 में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट (Andhra Pradesh High Court) के स्थायी जज (Permanent judge) बने। एन वी रमना साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट में अपनी नियुक्ति से पहले दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के मुख्य न्यायाधीश थे।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि बीते कुछ सालों में जस्टिस रमना (Justice NV Ramana) का सबसे चर्चित फैसला जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में इंटरनेट (Internet) की बहाली का रहा है। उन्होंने सांसदों-विधायकों (MPs-MLAs) के खिलाफ लंबित मुकदमों की तेज सुनवाई के लिए हर राज्य में स्पेशल कोर्ट (Special court) बनाने का निर्देश देने वाली बेंच (Bench) की अध्यक्षता भी की थी। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के चीफ जस्टिस (Chief Justice) के कार्यालय को सूचना अधिकार कानून (RTI) के दायरे में लाने का फैसला देने वाली बेंच के भी जस्टिस रमना (Justice Ramana) सदस्य रह चुके हैं।

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