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Haribhoomi-Inh News: कांग्रेस नेतृत्व मौन, संभाले कौन? 'चर्चा' प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ

पहले ज्योतिरादित्य गए और मध्यप्रदेश में बनी-बनाई कांग्रेस सरकार की विदाई भी हो गई। हालांकि जितिन प्रसाद के दलबदल से यूपी में ऐसा कोई डर नहीं। वहां कांग्रेस की जड़ें ही उखड़ी हुई हैं।

Haribhoomi-Inh News: कांग्रेस नेतृत्व मौन, संभाले कौन? चर्चा प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ
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Haribhoomi-Inh Exclusive: हरिभूमि-आईएनएच के खास कार्यक्रम 'चर्चा' में प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कांग्रेस नेतृत्व मौन, संभाले कौन? पर विस्तार से चर्चा की। प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व मौन, संभाले कौन? दरअसल जिस प्रकार एक के बाद एक कांग्रेस के प्रमुख नेता पार्टी छोड़ कर बीजेपी से हाथ मिलाने लगे हैं। इसे देखकर ऐसा कहना गलत नहीं है। यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद जितिन प्रसाद का जाना इसका प्रमाण माना जाए तो गलत नहीं कहा जाएगा।

पहले ज्योतिरादित्य गए और मध्यप्रदेश में बनी-बनाई कांग्रेस सरकार की विदाई भी हो गई। हालांकि जितिन प्रसाद के दलबदल से यूपी में ऐसा कोई डर नहीं। वहां कांग्रेस की जड़ें ही उखड़ी हुई हैं। खोया कुछ नहीं कांग्रेस ने, क्योंकि जो जितिन प्रसाद खुद तीन तीन चुनाव हार चुके हैं, वे कांग्रेस का कितना कल्याण कर पाते? इस मामले के संबंध में हिमांशु द्विवेदी ने छत्तीसगढ़ पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, उत्तर प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष मदन मोहन शुक्ल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता चौधरी राकेश सिंह और राजनैतिक विशलेषक गिरिजाशंकर महमानों से विस्तार से चर्चा की। इस दौरान प्रधान संपादक ने महमानों से कई तीखे सवाल भी किए।

कांग्रेस नेतृत्व मौन, संभाले कौन, देखें पूरी चर्चा


जानकारी के लिए आपको बता दें कि कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद 9 जून को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए। भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस नेता का भारतीय जनता पार्टी में शामिल होना, कांग्रेस के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है।

भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद जितिन प्रसाद ने कहा कि मेरा तीन पीढ़ियों से कांग्रेस का साथ रहा, ये निर्णय आसान नहीं था। बहुत सोच-विचार और अंतरआत्मा की आवाज के बाद ये निर्णय लिया। आज के परिप्रेक्ष्य में भारत के सामने जो चुनौतियां हैं और देश के हित में बीजेपी और नरेंद्र मोदी जी का नेतृत्व सबसे सक्षम है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि जितिन प्रसाद लंबे समय से कांग्रेस पार्टी से नाराज चल रहे थे जिसके बाद उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया।

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