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CJI रंजन गोगोई 17 नवंबर को हो रहे रिटायर, आज कामकाज के आखिरी दिन इन 10 अहम मामलों पर जारी किए नोटिस

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का कार्यकाल 17 नवंबर को खत्म हो रहा है। अपने कामकाज के आखिरी दिन उन्होने एस. ए बोबडे के साथ मीटिंग की और 10 अहम मामलों पर नोटिस जारी किए।

आज खत्म हो रहा CJI रंजन गोगोई का कार्यकाल, कामकाज के आखिरी दिन एस.ए बोबडे के साथ की बैठक
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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (Chief Justice Ranjan Gogoi) आज रिटायर होने वाले है। अपना कार्यकाल के आखिरी दिन उन्होंने जस्टिस शरद अरविंद बोबडे के साथ बैठक की और सूचीबद्ध 10 मामलों में नोटिस जारी किया। शाम साढ़े 5 बजे सीजेआई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देशभर के सभी जजों को संबोधित करेंगे।

इस दौरान उन्होंने कई मामलों में 47 फैसले सुनाई, जिनमें तो कई ऐतिहासिक फैसले भी शामिल रहे। सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश, राफेल डील, अयोध्या मामला, चीफ जस्टिस के ऑफिस को आरटीआई के तहत शामिल करना समेत कई फैसले चीफ जस्टिस गोगोई द्वारा लिये गए।

18 नवंबर 1954 में असम में जन्में रंजन गोगोई ने अपने करियर में कई उतार चढ़ाव देखें। साल 1978 में उन्होंने एडवोकेट के तौर पर अपनी करियर की शुरुआत करते हुए एक बार काउंसिल ज्वॉइन की। उनके पिता केशव चंद्र गोगोई असम के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके है। अपने करियर को आगे बढ़ाते हुए साल 2001 में वो गुवाहाटी हाईकोर्ट के जज बनें जबकि साल 2010 में रंजन गोगाई पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में जज की कुर्सी पर आसीन हुए। इसके बाद 23 अप्रैल 2012 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्त कर दिया गया। उन्होंने अपना काम बड़ी मेहनत और निष्पक्ष होकर किया। साल 2018 के अक्टूबर महीने में वो देश के 46वें सीजेआई के रुप में कुर्सी पर काबिज हुए।



चलिए अब बात करते है, ऊपर बताए गए उनके ऐतिहासिक फैसलों के बारे में, हाल में उन्होंने सदियों से चलते आ रहे अयोध्या मामले पर फैसला सुनाया। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व में 5 जजों की बेंच ने की थी। सुनवाई पूरी होने के बाद राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या की विवादित जमीन पर राम मंदिर बनाने के हक में फैसला किया और कहा कि सरकार जल्द ही राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाए। वहीं मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में 5 एकड़ की जमीन देने के लिए भी कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार को आदेश जारी दिया।



इसके अलावा, चीफ जस्टिस के ऑफिस को आरटीआई के दायरे में लाना, ये भी ऐतिहासिक फैसला है... इस मामले को लेकर रंजन गोगाई के नेतृत्व वाली बेंच ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि चीफ जस्टिस का ऑफिस भी पब्लिक अथॉरिटी है। इसलिए जनता चीफ जस्टिस के ऑफिस से आरटीआई के तहत जानकारी मांग सकती है। आपको बता दें कि इससे पहले चीफ जस्टिस के ऑफिस से संबंधित कोई भी जानकारी आरटीआई के तहत हासिल नहीं की जा सकती थी।

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