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सुप्रीम कोर्ट ने कहा की कि मनोरंजन के नाम पर किसी समुदाय विशेष के प्रति नकारात्मक धारणा बनाने वाले शीर्षकों को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।

नई दिल्ली: बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक नीरज पांडे की आगामी फिल्म 'घूसखोर पंडत' कानूनी विवादों के भंवर में फंस गई है। सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म के शीर्षक पर गहरी नाराजगी जताते हुए निर्देशक को कड़ी फटकार लगाई है।

कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक फिल्म का नाम नहीं बदला जाता, तब तक इसे सिनेमाघरों में रिलीज करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। न्यायमूर्ति की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे शीर्षक समाज के किसी विशेष वर्ग की भावनाओं को आहत कर सकते हैं और व्यावसायिक लाभ के लिए इस तरह के आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है।

​शीर्षक पर जातिगत टिप्पणी का आरोप और विवाद

​फिल्म के नाम 'घूसखोर पंडत' को लेकर कुछ सामाजिक संगठनों ने याचिका दायर की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि यह शीर्षक एक विशिष्ट समुदाय को निशाना बनाता है और उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी इन दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह कतई नहीं है कि आप किसी वर्ग की प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ करें। कोर्ट ने नीरज पांडे से पूछा कि क्या इस शीर्षक के बिना फिल्म की कहानी अधूरी है?

​सुप्रीम कोर्ट का सख्त अल्टीमेटम: 'बदलना होगा नाम'

​सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कड़े शब्दों में निर्देशक को निर्देश दिया कि वे फिल्म के लिए एक नया और मर्यादित शीर्षक तलाशें। कोर्ट ने कहा, "आप समाज में तनाव पैदा करने वाले नाम रखकर फिल्म प्रमोट नहीं कर सकते।

जब तक आप नया और संतोषजनक टाइटल पेश नहीं करते, फिल्म की रिलीज पर रोक जारी रहेगी।" अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सेंसर बोर्ड (CBFC) को भी ऐसे नामों को अनुमति देने से पहले सामाजिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए।

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