retail inflation: भारत की खुदरा महंगाई दर जनवरी में नई कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स सीरीज के तहत 2.75% दर्ज की गई। यह नई सीरीज के तहत जारी पहला बड़ा आंकड़ा है, जिसमें बेस ईयर 2012 से बदलकर 2024 कर दिया गया है। इससे पहले पुरानी सीरीज के मुताबिक, दिसंबर में महंगाई 1.33% और नवंबर में 0.71% थी। नए डेटा के मुताबिक लगातार तीसरे महीने कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सीपीआई इंडेक्स नवंबर के 104.01 से बढ़कर दिसंबर में 104.10 और जनवरी में 104.46 पर पहुंच गया।
नई सीपीआई सीरीज में सबसे बड़ा बदलाव खाने-पीने के सामान के वजन में कमी है। पहली बार फूड का वेटेज 40 फीसदी से नीचे आ गया है जबकि नॉन-फूड कैटेगरी अब 60% से ज्यादा हो गई। इससे आगे चलकर महंगाई के आंकड़े खाने की कीमतों में उतार-चढ़ाव से कम प्रभावित होंगे। साथ ही ग्रामीण खपत को ज्यादा वजन दिया गया है क्योंकि कुल मांग में उसकी हिस्सेदारी बढ़ रही।
फूड इंफ्लेशन नई सीरीज में 2.13% रही। फूड एंड बेवरेजेस का वजन करीब 37% है और इसमें टमाटर की महंगाई 64.8% तक पहुंच गई। नारियल और नारियल तेल की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी रही। वहीं पर्सनल केयर कैटेगरी में महंगाई 19.02% दर्ज हुई, जिसमें चांदी के गहनों की कीमतें 160% और सोने की कीमतें 47 फीसदी तक बढ़ीं।
एजुकेशन सर्विसेज में महंगाई 3.35% और रेस्टोरेंट व होटल सेवाओं में 2.87% रही, जो राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। नई सीपीआई बास्केट में अब 299 की जगह 350 से ज्यादा सामान शामिल किए गए हैं। इसमें वायरलेस ईयरफोन्स, पेट फूड, सैनिटाइजर, फिटनेस बैंड और एयर प्यूरीफायर जैसे नए प्रोडक्ट जोड़े गए हैं, जो बदलती लाइफस्टाइल और पोस्ट-पैंडेमिक हेल्थ अवेयरनेस को दिखाते हैं।
कैटेगरी वेटेज में भी बदलाव हुआ है। हाउसिंग और फ्यूल का हिस्सा बढ़कर 17.7% हो गया है। हेल्थ सर्विसेज 6.1% और ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन 12.4% तक पहुंच गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि नई सीरीज से अब सर्विस सेक्टर, हाउसिंग और डिस्क्रेशनरी खर्च की ट्रेंड ज्यादा साफ नजर आएगी और महंगाई के आंकड़े ज्यादा संतुलित होंगे।
(प्रियंका कुमारी)











