भारत की खुदरा महंगाई दर, जिसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से मापा जाता है, मार्च 2026 में बढ़कर 3.40% पर पहुँच गई है। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के 3.21% के मुकाबले यह मामूली बढ़त है, लेकिन मिडल-ईस्ट में जारी युद्ध जैसी स्थितियों ने इसे प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
जहां एक ओर सब्जियों के दाम बढ़े हैं, वहीं दूसरी ओर ईंधन की कीमतों में हालिया वृद्धि और सोने-चांदी की रिकॉर्ड कीमतों ने महंगाई के आंकड़ों को ऊपर धकेला है। हालांकि, यह राहत की बात है कि महंगाई अब भी भारतीय रिजर्व बैंक के 4% के मध्यम लक्ष्य से नीचे बनी हुई है।
US-ईरान युद्ध का असर: तेल और ईंधन की कीमतें बढ़ीं
मिडल-ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर भारत की तेल आपूर्ति पर पड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार, 'वेस्ट एशिया क्राइसिस' के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
LPG की कीमतों में उछाल: 7 मार्च 2026 को घरेलू 14.2 किलो वाले LPG सिलेंडर में ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर में ₹114.50 की बढ़ोतरी की गई थी।
इस वृद्धि के कारण 'बिजली, गैस और अन्य ईंधन' (Fuel and Light) सेगमेंट की महंगाई दर फरवरी के 1.52% से बढ़कर मार्च में 1.65% हो गई है।
बाज़ार का हाल: क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा?
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बाज़ार में कीमतों का मिला-जुला असर देखने को मिला है।
सबसे ज्यादा महंगा (High Inflation): चांदी के आभूषण (148.61%), सोने/हीरे के आभूषण (45.92%), नारियल/खोपरा (45.52%), टमाटर (35.99%) और फूलगोभी (34.11%)।
सबसे ज्यादा सस्ता (Negative Inflation): प्याज (-27.76%), आलू (-18.98%), लहसुन (-10.18%), अरहर और तूर दाल (-9.56%) और मटर (-7.87%)।
खाद्य महंगाई (Food Inflation): खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर मार्च में 3.87% रही, जो फरवरी में 3.47% थी।
RBI का रुख: 'वेट एंड वॉच' की नीतिआरबीआई (RBI) गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे मजबूत हैं और वह बाहरी झटकों को सहने में सक्षम है। हालांकि, मौजूदा स्थिति को एक 'सप्लाई शॉक' के रूप में देखा जा रहा है।
महंगाई का लक्ष्य: सरकार ने अगले 5 वर्षों (2026-2031) के लिए भी खुदरा महंगाई का लक्ष्य 4% (प्लस/माइनस 2%) ही रखा है।
भविष्य का अनुमान: रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए औसत महंगाई दर 4.6% रहने का अनुमान जताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की स्थिति और वैश्विक तनाव ही आगे की दिशा तय करेंगे।
महंगाई मापने के तरीके में बड़ा बदलाव
यह मार्च 2026 की रिपोर्ट इसलिए भी अहम है क्योंकि यह नए 2024 बेस ईयर के आधार पर जारी की गई है। सरकार ने खपत के आधुनिक पैटर्न को देखते हुए बास्केट में OTT सब्सक्रिप्शन, डिजिटल स्टोरेज और वैल्यू-एडेड डेयरी उत्पादों को शामिल किया है, जबकि पुराने पड़ चुके VCR और ऑडियो कैसेट जैसी चीजों को हटा दिया गया है। इंडेक्स में खाद्य पदार्थों का हिस्सा 45.9% से घटाकर 36.75% कर दिया गया है।










