16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों को पत्र लिखकर सहयोग की अपील की है। इस पत्र के साथ ही महिला आरक्षण यानी ‘नारी शक्ति वंदन’ पर सियासी घमासान तेज हो गया है।
सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसके समय और मंशा पर सवाल उठा रहा है। चर्चा है कि सरकार संशोधन के जरिए इस कानून को जल्द लागू करने की रणनीति बना रही है, जिससे आगामी चुनावों में इसका असर दिख सकता है।
ऐसे में संसद का यह विशेष सत्र ‘नारी शक्ति’ बनाम ‘सियासत’ की सीधी टक्कर में बदलता नजर आ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यही है-
क्या महिला आरक्षण सच में सशक्तिकरण का कदम है या चुनावी रणनीति?
इसी मुद्दे पर हरिभूमि और INH के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी के साथ विशेष चर्चा में राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं, चुनाव विशेषज्ञों और वरिष्ठ पत्रकारों ने अपनी राय रखी।
Debate Panel
- सुनीता दुग्गल – पूर्व सांसद
- सुरेंद्र राजपूत – प्रवक्ता, कांग्रेस
- डॉ. आलोक शुक्ला – पूर्व उप चुनाव आयुक्त
- अजय शुक्ला – वरिष्ठ पत्रकार
- राम प्रकाश पांडेय – प्रवक्ता, टीएमसी
महिला आरक्षण पर किसने क्या कहा? ऊपर दिए गए वीडियो में देखें पूरी चर्चा-










