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एंटीसोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर के ये हैं लक्षण, ऐसे करें बचाव

ऐसे लोग रिश्तों में कपटी और सामनेवाले को डराकर रखने वाले होते हैं।

एंटीसोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर के ये हैं लक्षण, ऐसे करें बचाव

एंटीसोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर व्यवहारों का एक ऐसा दीर्घकालिक पैटर्न है, जो कार्यकलापों और प्रक्रियाओं को दुर्बल बना देता है।

सामाजिक नियमों को अनदेखा करने की इनकी प्रवृत्ति के चलते यह दूसरों का शोषण करने में आनंदित होते हैं। वे दूसरों की दयालुता, सहृदयता या निष्पक्षता का अनुचित लाभ उठाते हैं।

जिन्हें ये तकलीफ पहुंचाते हैं, उनके प्रति उदासीन होते हैं या उन्हें तिरस्कारपूर्ण दृष्टि से देखते हैं। ऐसे लोग दूसरों के साथ घनिष्‍ठ संबंध नहीं रख पाते।

किसी भी रिश्ते में इनकी ओर से कुछ तिरस्कार या अपमान शामिल होता है।

फिर भी, इस रोग से पीड़ित व्यक्ति कभी-कभी आकर्षक होते हैं एवं झूठ बोलकर एवं बातों को तोड़ मरोड़कर पेश कर स्वयं को विश्वसनीय साबित करने का अच्छा अभिनय कर सकते हैं, ताकि रिश्तों को कायम रखा जा सके।

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उपचार-

  • कोग्निटिव थेरेपी सोच के सोशियोपैथिक तरीके को बदलने की कोशिश करता है।
  • बिहेवियर थेरेपी में प्रशंसा एवं दंड के उपयोग के द्वारा अच्छे व्यवहार को प्रोत्साहित किया जाता है।
  • सामान्य आबादी में यह रोग पुरुषों में लगभग तीन प्रतिशत और महिलाओं में एक प्रतिशत पाया जाता है। जबकि मोनोरोगियों में इस रॊग का अनुपात तीन से तीस प्रतिशत पाया जाता है।
  • सामान्यतः युवा अवस्था में इस बीमारी का गंभीर रूप देखा गया है।
  • लेकिन यह रोग मध्य आयु वाले लोगों को भी होता है। इस रोग के उपचार की बहुत नई वा आदर्श तकनीक फिलहाल मौजूद नहीं है।
  • इस रोग से बचाव का कोई प्रमाणिक उपाय नहीं है। किन्तु व्यक्ति के सामाजिक वातावरण में सुधार से समस्या की गंभीरता में कमी लाई जा सकती है।
  • खासकर अगर ये सुधार जीवन के शुरूआती दौर में हो।

लक्षण-

  • इन लोगों का स्‍वभाव हमेशा चिड़चिड़ापन रहता है।
  • ये मानसिक समस्याएं, रोगविज्ञान संबंधी जोखिम, अल्कोहल और कई प्रकार के मूड और एनेक्जायटी डिसार्डर के शिकार हो सकते हैं।
  • सबसे खतरनाक बात यह है कि इनमें दूसरों और अपनी जान लेने की प्रवृति भी हो सकती है।

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कारण-

  • इस समस्या (एंटीसोशल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर) के शिकार कुछ व्यक्ति मात्र दूसरों को धोखा देने और उन्हें नुकसान पहुंचाने को ही अपना लक्ष्य समझते हैं।
  • लगता है कि ये लोग अपने सिवा किसी औऱ की परवाह नहीं करते। वे दूसरों की भावनाओं को समझ सकते हैं, लेकिन इन्हें अपनी वजह से दूसरों को हुए कष्ट के लिए कोई शर्म महसूस नहीं होती।
  • इसकी जगह, दूसरों की कमजोरी की जानकारी का उपयोग वह स्वयं के लिए समर्थन या अनुग्रह हासिल करने के लिए या किसी को अपने पक्ष में कर कोई लाभ हासिल करने के लिए करते हैं।
  • वे किसी को पीड़ा देने की बात स्वीकार नहीं करते या किसी की पीड़ा के लिए स्वयं को जिम्मेदार नहीं मानते।
  • ये मानसिक समस्याएं, रोगविज्ञान संबंधी जोखिम, अल्कोहल और सबस्टांस अब्यूज और कई प्रकार के मूड और एनेक्जायटी डिसार्डर के शिकार हो सकते हैं।
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