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जब कंसंट्रेट होगा मन तब बेहतर होगी परफॉर्मेंस

कुछ लोगों के जरूरी हों या रोजमर्रा के काम, कभी भी समय पर पूरे नहीं होते हैं। इसकी वजह उनका कंसंट्रेट होकर काम न कर पाना होता है। दरअसल, वे कई वजहों से डिस्ट्रैक्ट हो जाते हैं। पर्सनल हो या प्रोफेशनल लाइफ, इस तरह की आदत से आपकी परफॉर्मेंस हर जगह प्रभावित होती है। किसी काम पर कंसंट्रेट न होने की क्या वजहें हैं, इनसे कैसे बचा जा सकता है, आपके लिए बहुत जरूरी सलाह।

जब कंसंट्रेट होगा मन तब बेहतर होगी परफॉर्मेंस
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ऐसे करें कंसंट्रेट (फाइल फोटो)

मालती ने आज सुबह-सुबह तय किया कि बहुत दिनों से पेंडिंग एक फाइल को आज निपटा लेगी। नहा-धोकर वह फाइल निकालने जा रही थी, तभी व्हाट्सएप पर एक दो मैसेज आ गए, जिनमें शेयर मार्केट के उतार-चढ़ाव के बारे में कुछ सूचनाएं थीं। मालती ने उसी वक्त अपनी इंवेस्टमेंट, फाइनेंस से जुड़ी फाइलें निकाल लीं और उन्हें देखने लगी। तभी टिंग की आवाज के साथ एक फेसबुक नोटिफिकेशन पर उसकी नजर पड़ी, आठ साल तक के बच्चों के लिए एक कॉम्पिटिशन के बारे में सूचना थी, जिसमें बच्चों को डांस करते हुए दस मिनट का वीडियो बनाकर भेजना था। मालती की सात वर्षीय बेटी अंशुला डांस बहुत अच्छा करती है, तो वह उसका वीडियो बनाने की सोचने लगी। इसी बीच उसकी कॉलेज फ्रेंड का फोन आ गया, मालती उससे गपशप करने में बिजी हो गई। फोन से फ्री हुई तो उसे वीडियो बनाने की याद आई। लेकिन अंशुला डांस करने के मूड में नहीं थी। इससे मालती का मूड ऑफ हो गया। इसके बाद वह कोई काम नहीं कर पाई। इस तरह उसका सारा दिन बर्बाद हो गया। ऐसा कई लोगों के साथ होता है, असल में इसकी वजह कंसंट्रेट होकर अपने काम ना करने की आदत है। इस तरह की आदत का सबसे बड़ा नुकसान है कि व्यक्ति की प्रोडक्टिविटी कम हो जाती है, पेंडिंग कामों का पहाड़ खड़ा हो जाता है। लेकिन आप मनोवैज्ञानिकों द्वारा बताए गए कुछ उपाय अपना लें तो इस समस्या से बच सकती हैं।

एक समय में एक काम

यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी में मनोविज्ञान की एसोसिएट प्रोफेसर अमीषी झा कहती हैं, 'सबसे पहले आप अपना पूरा ध्यान उसी काम में फोकस करें, जो अपने हाथ में लेने का निश्चय किया है। इस बीच दूसरे कामों के बारे में सोचना या उन पर ध्यान देना बंद कीजिए। एक काम में मन लगाने और इस बीच दूसरे काम के बारे में ना सोचने पर आपका दिमाग और शारीरिक ऊर्जा अपनी पूरी शक्ति से काम करेगी, इससे काम न सिर्फ जल्दी बल्कि अच्छा भी होगा।'

ब्रेन को थोड़ा ब्रेक दें

बेहतर ढंग से अपने काम को अंजाम देने के लिए दिमाग को आराम देना भी जरूरी है। इस बारे में फोर्टिस हॉस्पिटल, कोलकाता के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉक्टर संजय गर्ग कहते हैं, 'अगर आपका काम लंबा है, इसमें अधिक वक्त लगने की उम्मीद है तो बेहतर होगा कि बीच-बीच में इससे ब्रेक लें और इस दौरान कुछ छोटे-मोटे और हल्के काम निपटा लें। दिमाग लगातार और लंबे समय तक एक समान ऊर्जा से काम नहीं कर पाता। उसे बीच-बीच में आराम की जरूरत होती है, जिससे वह एनर्जी रिस्टोर करके दोबारा काम कर सके।'

सोशल मीडिया से रहें दूर

हमारे दिमाग को एक काम में कंसंट्रेट होने से रोकने में एक बड़ी बाधा सोशल मीडिया भी बन गया है। समाजशास्त्री प्रीति सुराना कहती हैं, 'आज के डिजिटल युग में हमें डिस्टर्ब करने वाले बहुत से फैक्टर्स हो गए हैं। हमारा दिमाग एक साथ सभी चीजों के बारे में नहीं सोच सकता। ऐसे में आप अगर कभी फेसबुक, कभी व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और ट्विटर देखते हुए, कोई गंभीर काम करने की सोच रही हैं तो उसे पूरी एफिशिएंसी से नहीं कर पाएंगी। आप जल्दी ही मानसिक और शारीरिक थकान का शिकार हो जाएंगी।' इससे साफ जाहिर होता है कि प्रोफेशनल हो या पर्सनल, जरूरी काम करते वक्त सोशल मीडिया से दूर रहें।

खुद को रिवॉर्ड दें

बोस्टन अटेंशन एंड लर्निंग लेबोरेटरी में विशेषज्ञ माइकल इस्टरमैन कहते हैं, 'अपने दिमाग को सही ढंग से कंसंट्रेट होकर काम करने के लिए छोटे-छोटे रिवॉर्ड खुद को दें।' जैसे कोई टास्क पूरा होने पर आप एक कप कॉफी पिएंगी, बच्चे का होमवर्क करवाने के बाद आप पसंदीदा स्नैक्स की बाइट लेंगी। आज दिन भर के लिए तय किए गए काम पूरे हो गए तो कल अपनी मनपसंद किताब पढ़ेंगी। इससे आप जिन कामों को बोरिंग समझती हैं, उनमें भी मन लगा सकेंगी।

इनको भी करें अप्लाई

अपने दिमाग को कंसंट्रेट करने और बेहतर परफॉर्म करने के लिए कुछ और छोटी-छोटी बातों पर अमल कर सकती हैं।

लिस्ट बनाएं : लिस्ट बनाकर काम करने की आदत डालें। एक-एक काम को करते हुए उस पर टिक मार्क लगाते जाएं।

डे ड्रीमिंग करें : काम के बीच आराम के क्षणों में विचार करें कि अगर आप पूरे अनुशासन से काम निपटाती हैं तो सफलता मिलनी तय है। ऐसे विचार आपको काम समय पर करने के लिए मोटिवेट करेंगे।

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डी-स्ट्रेस करें : स्ट्रेस में दिमाग कभी ठीक से काम नहीं करता। इसलिए मेडिटेशन, म्यूजिक की मदद से दिमाग को कूल रखें।

पूरी नींद लें : दिन भर में 7 घंटे की नींद ब्रेन को एक्टिव और एनर्जेटिक रखने के लिए जरूरी है। रोज कम से कम 7 घंटे जरूर सोएं।

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