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More Screen Time: ज्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में इस पर कंट्रोलिंग जरूरी है।

More Screen Time: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। ऑनलाइन क्लास से लेकर गेम्स और वीडियो तक हर चीज स्क्रीन पर सिमट गई है। लेकिन जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों की सेहत पर धीरे-धीरे बुरा असर डाल रहा है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर समय रहते बच्चों के स्क्रीन टाइम को कंट्रोल नहीं किया गया, तो यह कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं का कारण बन सकता है। आइए जानते हैं ऐसी 5 बड़ी परेशानियों के बारे में, जो ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल से बच्चों में शुरू हो सकती हैं।

ज्यादा स्क्रीन टाइम गुजारने के नुकसान

आंखों की समस्या और कमजोर नजर
लगातार मोबाइल स्क्रीन देखने से बच्चों की आंखों पर दबाव बढ़ता है। इससे आंखों में जलन, सूखापन और धुंधला दिखना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक यह आदत नजर कमजोर होने का कारण भी बन सकती है।

नींद में कमी और थकान
रात में मोबाइल इस्तेमाल करने से नींद पर सीधा असर पड़ता है। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है, जिससे बच्चों को नींद आने में दिक्कत होती है। इससे दिनभर थकान और चिड़चिड़ापन बना रहता है।

मानसिक तनाव और व्यवहार में बदलाव
ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के दिमाग पर भी असर डालता है। इससे ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल, गुस्सा, चिड़चिड़ापन और सोशल इंटरेक्शन में कमी देखने को मिल सकती है। बच्चे धीरे-धीरे अकेले रहना पसंद करने लगते हैं।

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मोटापा और शारीरिक गतिविधि में कमी
मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चे फिजिकल एक्टिविटी से दूर हो जाते हैं। घंटों बैठकर स्क्रीन देखने से वजन बढ़ने लगता है और मोटापे का खतरा बढ़ जाता है, जो आगे चलकर अन्य बीमारियों की वजह बन सकता है।

पढ़ाई पर असर और ध्यान की कमी
स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों का ध्यान पढ़ाई से हटने लगता है। वे जल्दी बोर हो जाते हैं और पढ़ाई में मन नहीं लगता। इसका सीधा असर उनके अकादमिक परफॉर्मेंस पर पड़ता है।

क्या करें बचाव के लिए?

बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करना बेहद जरूरी है। उनके लिए आउटडोर एक्टिविटी, खेल-कूद और किताब पढ़ने जैसी आदतों को बढ़ावा दें। साथ ही, सोने से पहले मोबाइल इस्तेमाल से बचने की आदत डालें। पैरेंट्स को खुद भी उदाहरण बनकर बच्चों को सही दिशा दिखानी चाहिए।

(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)

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लेखक: (कीर्ति)

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