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Mother s Day 2018: मां के साथ से इन हस्तियों ने पार की बुलंदियों की ऊंचाई

मां के बिना हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। वह हमारे जीवन की धुरी होती है, उसके इर्द-गिर्द ही हमारा संसार बसता है। एक तरफ मां हम पर प्यार लुटाती है, वहीं ऐसी सीख भी देती है, जो हमारे जीवन को संवारती है।

Mother  s Day 2018:   मां   के साथ से इन हस्तियों ने पार की बुलंदियों की ऊंचाई
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मां के बिना हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। वह हमारे जीवन की धुरी होती है, उसके इर्द-गिर्द ही हमारा संसार बसता है। एक तरफ मां हम पर प्यार लुटाती है, वहीं ऐसी सीख भी देती है, जो हमारे जीवन को संवारती है।

अलग-अलग क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियां सहेली से साझा कर रही हैं, अपनी मां से जुड़े कुछ ऐसे ही मधुर-कोमल अहसास।

चित्रा मुद्गल, प्रख्यात साहित्यकार

मैं अपनी मां (बिमला देवी) के त्याग, समर्पण को कभी नहीं भूल सकती हूं। मेरे जीवन को संवारने में उनकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मेरी मां बहुत ही करुणामयी, वात्सल्यमयी थीं।

उनकी हर बात मेरे लिए एक सीख थी। मुझे आज भी याद है, जब मैं छोटी थी तो उन दिनों हमारे घर के आंगन में एक नारियल का पेड़ था। उस पर लगने वाले नारियल को तोड़ने के लिए एक आदमी आया करता था। वह पेड़ पर चढ़कर नारियल तोड़ता था।

जब वह घर लौट रहा होता तो मां उसे भी कई नारियल दे देती थीं। एक बार जब वह लौट रहा था तो जमीन पर गिरे पड़े कुछ नारियल भी उसने उठा लिए। मैंने देखा, तो उसे टोक दिया। यह देखकर मां ने मुझे डपट दिया।

मां बोलीं, ‘हम उसे पेड़ पर चढ़कर नारियल तोड़ने का जितना पैसा दे रहे हैं, वह उसके श्रम की तुलना में कम है। ऐसे में वह अगर एक-दो गिरे पड़े नारियल ले भी जा रहा है तो इसमें हर्ज ही क्या है! हो सकता है, उसके घर में कोई तुम्हारी ही तरह बच्ची हो, जिसके लिए वह नारियल ले जाना चाहता हो।’

मां की इस संवेदनशीलता ने मुझे उस दिन गहरे तक छुआ था। आज अगर मैं लोगों के प्रति संवेदनशील हूं, तो वह मां के स्वभाव के कारण ही संभव हुआ।

उन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया। जब मैंने अपनी पसंद से विवाह किया, तो घर में मां ही थीं, जिन्होंने मुझे मौन समर्थन दिया। मां हमेशा मेरा संबल बनीं, जीवनपथ पर उनकी सीखें मेरे काम आईं। इन सब बातों के लिए मैं हमेशा मां की आभारी रहूंगी।

हालांकि मदर्स-डे मनाने का विचार पश्चिम से हमारे यहां आया है, जहां पारिवारिक मूल्यों के छीजने और रिश्तों में बढ़ती दूरियों से वहां का समाज चिंताग्रस्त है, जबकि हमारे यहां मां को ईश्वर के समतुल्य माना गया है।

लेकिन इस बहाने हम मां के प्यार, त्याग और समर्पण के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करें तो इसमें कोई बुराई नहीं है। मैं यही कहना चाहूंगी कि अपनी मां के प्रति प्यार और सम्मान को सिर्फ एक दिन नहीं हर रोज प्रकट करना चाहिए।

हर्षिता पांडेय, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग

मां के बिना हम कुछ भी नहीं हैं, उनसे ही हमारा अस्तित्व है। मेरे जीवन को गढ़ने में, संवारने में मेरी मां निर्मला पांडेय की बहुत बड़ी भूमिका रही। उन्होंने हमें जीवन में नैतिक मूल्यों की सीख दी।

साथ ही वह मेरी शिक्षा को लेकर बहुत गंभीर रहती थीं। दरअसल, वह पढ़ाई की महत्ता को समझती थीं क्योंकि वह अपने जमाने की ग्रेजुएट थीं, जबकि उनके समय में कम ही लड़कियां उच्च शिक्षा हासिल कर पाती थीं।

मां हमेशा समझातीं कि आत्मनिर्भर होने की राह शिक्षा से होकर गुजरती है। चाहे आप संपन्न परिवार से हो, लेकिन शिक्षित होना, आत्मनिर्भर बनना बहुत जरूरी है। यानी, आज मेरी अलग पहचान है तो उसका कारण मां ही हैं।

मां के अनुशासन ने ही मुझे यहां तक पहुंचाया है। कई बार जीवन में ऐसी भी परिस्थितियां आईं, जब मैं बहुत निराश हुई, तब मां ही मेरा संबल बनीं। वह हमेशा कहती हैं-एक असफलता से निराश मत हो जाओ, निरंतर मेहनत करो, आगे तुम्हें और भी बड़ा मुकाम, बड़ी सफलता मिलेगी।

मां की ये बातें हमेशा मुझे प्रोत्साहित करती हैं। आज तो मैं चाहती हूं कि उनके व्यक्तित्व के हर गुण को स्वयं में समाहित कर लूं। मैं इन सब बातों के लिए मां का आभार भी व्यक्त करना चाहती हूं।

मैं सभी पाठिकाओं से भी कहना चाहूंगी कि मदर्स-डे को जरूर सेलिब्रेट करें। अपनी मां को उनके दिए प्यार, समर्पण और त्याग के लिए शुक्रिया जरूर कहें। मां के साथ वक्त बिताइए, इससे मां को ही नहीं, आपको भी बहुत खुशी मिलेगी।

रीता गंगवानी, पर्सनालिटी डेवलपमेंट मेंटर

मेरी मां (रजनी उत्तम सिंह मीरचंदानी) एक जीवंत महिला थीं। वह हार्ट पेशेंट थीं, इसके बावजूद हमेशा घर के कामों में एक्टिव रहती थीं। हम अकसर उनसे कहा करते थे कि मां आप आराम करो।

लेकिन वह कहतीं, ‘अगर काम करना छोड़ दिया, तो जिंदगी रुक जाएगी, ठहर जाएगी, निराशा हमें घेर लेगी।’ जीवन के किसी मोड़ पर हारने पर निराश होना स्वाभाविक है।

लेकिन मेरी मां ने मुझे सिखाया कि जिंदगी में कितनी भी परेशानियां आएं, कितनी भी असफलताएं मिलें, हिम्मत कभी मत हारो। लाइफ में अप्स एंड डाउंस आते रहेंगे, लेकिन जिंदगी दोबारा नहीं मिलेगी।

उनकी इन्हीं बातों से मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। मैं अपने करियर में सफल हुई, उसकी वजह मां ही हैं। मेरी हाइट कम थी, लेकिन मैं ग्लैमर इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाना चाहती थी। ऐसे में कई बार निराश हो जाती थी, तब मां मुझे समझातीं, ‘अपनी इनर ब्यूटी में बिलीव करो।’ मैंने ऐसा ही किया।

धीरे-धीरे लोगों को भी मेरी इनर ब्यूटी, टैलेंट नजर आने लगा। मैं ग्लैमरस इंडस्ट्री में बतौर पर्सनालिटी डेवलपमेंट एक्सपर्ट के तौर पर फेमस हो गई। यह सब मां की अनमोल सीख, नसीहतों के कारण मुमकिन हुआ।

आज भी जब कोई एचीवमेंट मुझे मिलती है, तो मां की बहुत याद आती है। कई बार मैं सोचती हूं कि मां का जीवन के प्रति जो संतुष्ट रहने वाला नजरिया था, वैसा ही नजरिया मैं भी रखूं। इसके लिए कोशिश जरूर करती हूं।

आज मां मेरे साथ नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें साथ हैं। ऐसे में मदर्स-डे मेरे लिए बहुत मायने रखता है। मैं अपने जीवन को संवारने के लिए हमेशा मां की आभारी रहूंगी।

मैं सभी लोगों से भी कहना चाहूंगी कि हम मां के प्यार और समर्पण का कर्ज नहीं चुका सकते हैं। लेकिन हमें कोशिश करनी चाहिए कि जब भी मां को हमारे साथ, अपनेपन की जरूरत हो, तो हम उनके पास हों। यही मां के लिए सबसे कीमत उपहार होगा।

स्नेह गंगल, पेंटर

हम एक छोटे शहर के मध्य वर्गीय परिवार से ताल्लकु रखते हैं। हमारे पास जीवनयापन के साधन बहुत कम थे। इसके बावजूद मेरी मां (विजय लक्ष्मी गंगल) ने कभी हमें किसी कमी का अहसास नहीं होने दिया।

कोई भी समस्या आती, तो मां बड़े धैर्य से उनका सामना करतीं। साथ ही वह हमेशा कहतीं, ‘अगर जीवन में कुछ पाना चाहते हो तो हमेशा हौसला बनाए रखो।’ इस तरह का संबल, आत्मविश्वास बचपन से ही मां ने दिया।

आज उनकी वजह से मैं चित्रकार के रूप में इतनी सफल हो पाई हूं। मुझे याद है, जब मैं एमए करने के लिए दूसरे शहर जाना चाहती थी, तो ज्यादातर रिश्तेदारों ने आपत्ति जताई।

सब यही कह रहे थे कि लड़कियों को शहर से बाहर भेजना सही नहीं है। लेकिन मेरी मां को अपनी परवरिश पर पूरा भरोसा था, इसलिए उन्होंने मुझे पढ़ने के लिए बाहर भेजा। इसके बाद धीरे-धीरे मेरी राह अपने आप बनती चली गई।

आज सोचती हूं, तो लगता है कि मां ने मेरा साथ न दिया होता, तो मैं कहां होती? मैं मां के संघर्ष को नमन करती हूं। मैंने हमेशा कोशिश की है कि मैं मां जैसी बन सकूं। लेकिन मुझमें उनके जैसा धैर्य नहीं है।

हां, मेरे भीतर मां का एक गुण पूरी तरह मौजूद है, वह है सबके सामने अपनी बात रखना। मेरी मां भी अपनी बात किसी के सामने रखने से हिचकती नहीं हैं और मैं भी ऐसी ही हूं।

इस तरह देखा जाए, तो मां के गुणों को अपनाकर मैंने अपने जीवन को बेहतर बनाया है। इन बातों के लिए मैं मां का आभार व्यक्त नहीं कर सकती हूं। आभार व्यक्त करना मां के प्यार, त्याग के सामने बहुत छोटा भाव है।

लेकिन मुझे जब भी मौका मिलता है, तो मां के पास जाती हूं, उनके साथ बैठती हूं। उस समय वह अपने मन का कुछ ड्रॉ करती हैं और मैं उनकी ड्रॉइंग को कलर करती हूं। यही मेरा उनके लिए प्यार जताने का तरीका है।

इस मदर्स-डे पर मैं पाठिकाओं से कहना चाहूंगी कि आप लोग जब भी अपनी मां से मिलें, उन लम्हो को हमेशा खास बनाएं, क्योंकि मां का साथ, प्यार खुशकिस्मत लोगों को मिलता है। हैप्पी मदर्स-डे।

श्रेणु पारिख, टीवी आर्टिस्ट

आज टीवी पर बतौर एक्ट्रेस मैं एक पहचान बना पाई हूं, मुझे दर्शकों का प्यार मिल रहा है, तो इसकी वजह मेरी मां हैं। अगर उन्होंने मुझे सपोर्ट ना किया होता, तो मैं यह मुकाम हासिल नहीं कर पाती। मां मेरे लिए दुनिया में सबसे खास हैं। उन्होंने ही मेरे जीवन को सफल बनाया है।

मेरी मां एक इंडिपेंडेंट वूमेन हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी के फैसले खुद लिए हैं। उनकी इसी बात ने मुझे सबसे ज्यादा मोटिवेट किया है। मैंने मां से ही सीखा है कि अपनी पहचान बनाना बहुत जरूरी है।

साथ ही मां की पर्सनालिटी की कई बातें हैं, जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा है। वह हर सिचुएशन में पॉजिटिव रहती हैं। जैसे मैं कभी ऑडिशन के लिए नर्वस होती हूं तो मां कहती है, ‘डोंट वरी, ऑडिशन ठीक हो जाएगा, सीरियल मिल जाएगा।’

उनकी इन बातों से मुझमें पॉजिटिविटी आती है। भगवान पर भी मां की बहुत श्रद्धा है। भगवान पर वह बहुत भरोसा करती हैं, किसी मुसीबत में हों तो प्रार्थना करती हैं, उनकी प्रार्थना सच में असर करती है।

हमारे जीवन की समस्याएं दूर होने लगती हैं। मां कहती हैं, ‘ईश्वर पर विश्वास का मतलब है, खुद पर विश्वास। जब ऐसा होता है, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।’

मैं मां को ढेर सारी बातों के लिए थैंक्स कहना चाहती हूं, उनके लिए हमेशा कुछ स्पेशल करना चाहती हूं, लेकिन कितना भी करूं, मां के लिए कम ही होगा। उनका त्याग, समर्पण बहुत ही बड़ा है। फिर भी मदर्स-डे के दिन मैं उन्हें बताना चाहती हूं कि मां, मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं।

पाठिकाओं से भी मैं यही कहूंगी कि मां हमारे लिए जो भी करती हैं, उसके बदले में कुछ नहीं मांगतीं, बस उन्हें अपने बच्चों से थोड़ा सा प्यार चाहिए होता है। लेकिन हम हैं कि उन्हें थोड़ा सा प्यार भी नहीं दे पाते हैं।

इस मदर्स-डे आप सब अपनी मां के लिए कुछ स्पेशल कीजिए, उनके साथ वक्त बिताइए, उनकी मन की सुनें। इस तरह मदर्स-डे को मां के लिए खास बनाइए।

आश्मीन मुंजाल, मेकअप आर्टिस्ट

मैं आज जो भी हूं, मां की वजह से हूं। वह बहुत स्ट्रॉन्ग और सेल्फ मेड महिला थीं। मां बताया करती थीं कि अपनी पढ़ाई का खर्च तक उन्होंने खुद उठाया था। इसके लिए वह सिलाई का काम करती थीं।

पढ़ाई के बाद मेहनत और लगन से दिल्ली पुलिस में नौकरी हासिल की। पुलिस की नौकरी करने के बावजूद उन्होंने कभी घर की जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ा। मां ने घर संभाला, तीन बच्चों की परवरिश की।

इसके अलावा घर ही नहीं, आस-पड़ोस के लोगों की समस्याएं भी मां दूर करती थीं। इस तरह मां की हर बात ने मुझे इंस्पायर किया। मैंने मां से सीखा कि अपनी जिंदगी में छोटे-बड़े हर फैसले खुद लेने चाहिए।

आज मैं एक सेलिब्रिटी मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर पहचानी जाती हूं तो उसके पीछे भी मां का सपोर्ट रहा है। दरअसल, शादी के बाद मैं न्यूक्लियर फैमिली से ज्वाइंट फैमिली में आई थी। एक साल बाद ही मेरी बेटी हो गई।

लाइफ में बदलाव हो रहे थे, फिर भी मुझे लग रहा था कि कुछ तो है, जिसकी कमी खलती है। तब मां ने कहा, ‘घर-परिवार के साथ-साथ अपने जीवन को भी दिशा दो। मैं तुम्हारा साथ हूं।’

इसके बाद मैंने घर-परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपना करियर भी बनाना शुरू किया। धीरे-धीरे मुझे सफलता मिलने लगी। आज इस मुकाम पर हूं। इस बात के लिए मैं हमेशा मां की थैंकफुल रहूंगी।

पाठिकाओं से भी कहना चाहती हूं कि कई बार हमें लगता है कि मां हमारे लिए ज्यादा स्ट्रिक्ट हैं, लेकिन वह जो भी कहती हैं या करती हैं, वह सही होता है, हमारे भले के लिए होता है। इसलिए उनकी बातों से नाराज न हों। उनकी बातों को फॉलो करें। हैप्पी मदर्स डे!

सोनाली कुलकर्णी, फिल्म एक्ट्रेस

मुझे एक्टिंग फील्ड में काम करते हुए बीस साल हो गए हैं। लेकिन ऐसा न हो पाता, अगर मुझे मां का साथ न मिला होता। दरअसल, मैं पुणे शहर की एक मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हूं। जब मैंने अपनी फैमिली के सामने एक्ट्रेस बनने की बात जाहिर की, तो घर में मानो हड़कंप मच गया।

मेरे पिता चाहते थे कि मैं 9 से 5 वाली जॉब करूं और अपने घर परिवार को समय दूं। जबकि फिल्म इंडस्ट्री में न तो काम फिक्स था और न ही समय। ऐसे में एक्ट्रेस बनने के मेरे सपने का विरोध होना तय था।

लेकिन उस समय मां ही थीं, जिन्होंने मेरा विरोध नहीं किया। मुझे सपोर्ट किया, मेरा साथ दिया। इसी तरह मां जिंदगी के हर पड़ाव पर मेरा संबल बनीं। सच कहूं मां के समर्पण को मैं खुद तभी महसूस कर पाई, जब खुद मां बनी।

इस दौरान ही मैंने मां जैसा धैर्य रखना सीखा। सच, मां का साथ न होता, तो मैं कभी भी जिंदगी में सफल नहीं हो पाती। उन्हीं से मैंने सीखा कि जिंदगी को कैसे सकारात्मक सोच के साथ जिया जाता है।

इन दिनों वक्त की कमी के चलते मैं मां से नहीं मिल पाती हूं, गप-शप नहीं कर पाती हूं। इसलिए इस मदर्स-डे मैं जरूर उनके पास पुणे जाऊंगी। साथ ही मां से कहना चाहूंगी कि आपने मुझे जो कुछ दिया, मेरे लिए जो कुछ किया, उन सब बातों के लिए थैंक्स।

मैं सहेली की पाठिकाओं को यही कहूंगी कि मां के लिए थोड़ा सा समय जरूर निकालें। उनके ऋण को तो हम कभी भी चुका नहीं सकते, लेकिन थोड़ा सा प्यार देकर उन्हें खुश तो रख सकते हैं।

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