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एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक इस्तेमाल बनेगा घातक, केमिस्ट शॉप पर कसा जाएगा शिकंजा

डब्ल्यूएचओ को यह ध्यान रखना होगा कि एंटीबायोटिक दवाओं को डाक्टर अनावश्यक रूप से नहीं लिखने पाएं।

एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक इस्तेमाल बनेगा घातक, केमिस्ट शॉप पर कसा जाएगा शिकंजा
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नई दिल्ली. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने परामर्श देते हुए कहा है कि एंटीबायोटिक दवाओं का अंधाधुंध इस्तेमाल न करें। इस सम्बंध में संगठन का मत है कि इन दवाओं के अत्यधिक इस्तेमाल से दवाओं के प्रति प्रतिरोध बढ़ रहा है और उपचार विफल हो रहा है। इस बाबत डब्ल्यूएचओ ने ऐसी दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल को लेकर भारत समेत दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों को सचेत किया है।

इस मौके पर संगठन की दक्षिण एशियाई प्रमुख पूनम खेत्रपाल ने सदस्य राष्ट्रों के स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि वे एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल को सीमित करें वर्ना माइक्रोबियल प्रतिरोध के कारण होने वाली मौतों में भारी इजाफा हो सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल से उनके खिलाफ प्रतिरोध माइक्रोबियल पैदा हो रहे हैं।
यदि इस पर उचित कदम नहीं उठाए गए तो 2050 तक दुनिया में एंटी माइक्रोबियल प्रतिरोध से मरने वालों की संख्या एक करोड़ तक पहुंच जाएगी। जिसका एक बड़ा हिस्सा भारत समेत दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में होगा। इससे सकल घरेल उत्पाद का 2 से 3.5 फीसदी तक का नुकसान हो सकता है। दूसरे, हम इन एंटीबायोटिक दवाओं से भी हमेशा के लिए हाथ धो बैठेंगे जो कि आज हमारे पास उपचार का एक बेहतर जरिया हैं।
कई ऐसी एंटीबायोटिक दवाएं हैं जिनका अब तक कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने सभी राष्ट्रों को आगाह किया कि वे एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर नजर रखने के लिए तंत्र विकसित करें। अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण के लिए सुधार लाना होगा। दवाओं के उचित इस्तेमाल को लेकर नियम बनाने होंगे ताकि एंटीबायोटिक दवाओं को डाक्टर अनावश्यक रूप से नहीं लिखने पाएं। इसके लिए केमिस्टों के साथ-साथ मरीजों के लिए भी व्यापक जागरुकत अभियान चलाना होगा।
केमिस्ट बिना डाक्टर की अनुमति के एंटीबायोटिक दवा दें और मरीज अपने मन से दवा खरीदकर नहीं खाएं और एंटीबायोटिक दवाओं का कोर्स पूरा करें तथा उसे बीच में नहीं छोड़ने पाएं। उन्होंने कहा, ‘सामान्य संक्रमण और मामूली चोटें भी एक बार फिर लाखों की संख्या में लोगों की जान ले सकती हैं जो दशकों से इलाज योग्य रहीं हैं। एंटीबायोटिक्स का प्रतिरोध जटिल सर्जरी और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के प्रबंधन को अधिक मुश्किल बना देगा।’
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