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DNPA Conclave: आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया कंपनियों से निष्पक्ष रेवेन्यू शेयरिंग की मांग की। डीपफेक और फर्जी कंटेंट से संस्थानों पर भरोसा कमजोर हो रहा है। स्वेच्छा से सुधार नहीं हुआ तो कानूनी रास्ता अपनाने की चेतावनी।

DNPA Conclave: नई दिल्ली में आयोजित डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन यानी डीएनपीए कॉन्क्लेव में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कंटेंट बनाने वालों- फिर चाहें वो बड़े मीडिया संस्थान हों, दूरदराज इलाकों में बैठे स्वतंत्र क्रिएटर हों, प्रोफेसर हों या रिसर्चर, सबके साथ रेवेन्यू का बंटवारा बिल्कुल निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए।

मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, 'अब समय आ गया है कि प्लेटफॉर्म्स अपने रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल पर दोबारा सोचें। सिद्धांत को सही करना होगा।' उनका कहना था कि अगर मूल कंटेंट को उचित भुगतान नहीं मिलेगा तो विज्ञान, तकनीक, कला और साहित्य की रफ्तार थम जाएगी। बौद्धिक संपदा ही समाज की प्रगति की असली ताकत रही है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि यदि प्लेटफॉर्म्स खुद से सुधार नहीं करते, तो कई देशों ने कानूनी रास्ता दिखाया है कि इस तरह की व्यवस्था कैसे लागू कराई जा सकती। उनका इशारा उन देशों की ओर था, जहां टेक कंपनियों को न्यूज पब्लिशर्स के साथ रेवेन्यू शेयर करने के लिए कानून बनाए गए हैं।

अपने संबोधन में वैष्णव ने भरोसे के संकट पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समाज के स्तंभ- मीडिया, विधायिका और न्यायपालिका- सदियों से भरोसे के आधार पर टिके हैं, लेकिन आज यह भरोसा चुनौती के दौर से गुजर रहा है। इसकी बड़ी वजह सोशल मीडिया पर फैल रहे डीपफेक, फर्जी वीडियो और भ्रामक सूचनाएं हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि सिंथेटिक तरीके से बनाए गए वीडियो और तस्वीरें आम लोगों के मन में संस्थानों को लेकर संदेह पैदा कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी चीजें जो कभी हुई ही नहीं, उन्हें सच की तरह पेश किया जा रहा है। जब यह कंटेंट आम जनता तक पहुंचता है तो वे समाज की बुनियादी संरचना पर सवाल उठाने लगते हैं।

वैष्णव ने सोशल मीडिया कंपनियों से साफ कहा कि उन्हें अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट की जिम्मेदारी लेनी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा, 'प्लेटफॉर्म्स को समझना होगा कि मानव समाज ने हजारों साल में जो संस्थाएं बनाई हैं, उनके प्रति भरोसा बनाए रखना जरूरी है। जो कंटेंट वे होस्ट कर रहे हैं, उसकी जिम्मेदारी भी उन्हें ही लेनी होगी।'

कुल मिलाकर, संदेश साफ था कि डिजिटल कंटेंट इकोसिस्टम में संतुलन जरूरी है। कंटेंट क्रिएटर को उसका हक मिले और समाज का भरोसा भी बना रहे।

(प्रियंका कुमारी)

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