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अमेरिका में कच्चे तेल (WTI) की कीमत करीब 8 प्रतिशत बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमत 7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 102.29 डॉलर प्रति बैरल हो गई।

वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता के विफल होने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मच गई है। वार्ता टूटने के तुरंत बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है।

अमेरिका में कच्चे तेल (WTI) की कीमत करीब 8 प्रतिशत बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमत 7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 102.29 डॉलर प्रति बैरल हो गई। इससे पहले कीमतें घटकर लगभग 95 डॉलर तक आ गई थीं, लेकिन वार्ता विफल होने के बाद यह राहत खत्म हो गई।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरानी बंदरगाहों के आसपास नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा की। इस कदम का उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात को सीमित करना बताया जा रहा है, जिससे वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का व्यापार होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है और कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

इस घटनाक्रम का असर अन्य बाजारों पर भी देखा गया। डॉलर मजबूत हुआ है, जबकि शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और ब्रिटिश पाउंड जैसी जोखिम वाली मुद्राओं में कमजोरी आई है। वहीं, सोने की कीमतों में मुनाफावसूली के चलते गिरावट देखी गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर दबाव बढ़ेगा।
 

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