haribhoomi hindi news
SIP Tips: मार्च में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में 40450 करोड़ का निवेश, 56% की तेज बढ़त। एसआईपी निवेश रिकॉर्ड 32087 करोड़ पर पहुंचा। निवेशकों का भरोसा बरकरार।

नई दिल्ली. शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा म्यूचुअल फंड्स पर बना हुआ है। मार्च 2026 में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में 40450 करोड़ का शुद्ध निवेश (नेट इनफ्लो) दर्ज किया गया, जो फरवरी के मुकाबले करीब 56% ज्यादा है। यह जुलाई 2025 के बाद सबसे बड़ा मासिक निवेश।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह उछाल मुख्य रूप से एसआईपी (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए लगातार निवेश, साल के अंत में पोर्टफोलियो एडजस्टमेंट और बाजार में आई गिरावट को मौके के रूप में देखने की वजह से आया है। मार्च में एसआईपी निवेश भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और 32087 करोड़ हो गया, जो फरवरी के 29845 करोड़ से अधिक है।

इक्विटी कैटेगरी में फ्लेक्सी कैप फंड्स सबसे आगे रहे, जहां 10000 करोड़ से ज्यादा का निवेश आया। इसके बाद स्मॉल कैप फंड्स में 6263 करोड़ और मिड कैप फंड्स में 6063 करोड़ का इनफ्लो दर्ज किया गया। हालांकि डिविडेंड यील्ड्स और ईएलएसएस फंड्स में हल्की निकासी देखी गई, जिसे मुनाफावसूली का असर माना जा रहा। हालांकि, पूरे म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की तस्वीर थोड़ी अलग रही। 

मार्च में कुल मिलाकर 2.4 लाख करोड़ की शुद्ध निकासी हुई। इसकी सबसे बड़ी वजह डेट फंड्स से भारी पैसा निकलना रहा, जहां 2.95 लाख करोड़ का आउटफ्लो दर्ज किया गया। खासकर लिक्विड फंड्स से 1.35 लाख करोड़, ओवरनाइट फंड्स से 40228 करोड़ और मनी मार्केट फंड्स से 29207 करोड़ की निकासी हुई।

विशेषज्ञ बताते हैं कि मार्च में इस तरह की निकासी आम बात है, क्योंकि कंपनियां वित्तीय वर्ष के अंत में अपनी जरूरतों के लिए लिक्विड फंड्स से पैसा निकालती हैं। इसी वजह से यह गिरावट अस्थायी मानी जा रही है।

इसी बीच, हाइब्रिड फंड्स में भी करीब 16500 करोड़ का आउटफ्लो देखा गया, जिसमें आर्बिट्राज फंड्स का बड़ा योगदान रहा। वहीं, मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स में 5000 करोड़ से ज्यादा का निवेश आया, जो बताता है कि निवेशक अनिश्चितता के दौर में विविध निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

गोल्ड ईटीएफ में भी 2266 करोड़ का निवेश आया, हालांकि यह जनवरी और फरवरी की तुलना में कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सामान्यीकरण का संकेत है, क्योंकि साल की शुरुआत में गोल्ड में काफी ज्यादा निवेश हुआ था।

मार्च के अंत तक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल AUM घटकर 73.73 लाख करोड़ रह गया, जो फरवरी में 82.03 लाख करोड़ था। हालांकि जानकारों का कहना है कि यह गिरावट बाजार के उतार-चढ़ाव का असर है, न कि निवेशकों के भरोसे में कमी। कुल मिलाकर, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लगातार 61वें महीने सकारात्मक निवेश यह संकेत देता है कि लंबी अवधि के लिए निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।

(प्रियंका कुमारी)

7