मु्ंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। आरबीआई की ड्राफ्ट गाइडलाइंस में अपर लेयर NBFC की पहचान के तरीके को बदलने की बात कही गई है। अब तक यह वर्गीकरण कई पैरामीटर के आधार पर किया जाता था। लेकिन नए प्रस्ताव में इसे सरल बनाते हुए एसेट साइज पर आधारित करने की योजना है। इस कदम का उद्देश्य पारदर्शिता और स्पष्टता बढ़ाना बताया गया है। यह प्रस्ताव NBFC सेक्टर के लिए अहम बदलाव माना जा रहा है।
₹1 लाख करोड़ एसेट पर तय होगी कैटेगरी
ड्राफ्ट के अनुसार, जिन NBFC कंपनियों की कुल संपत्ति ₹1 लाख करोड़ या उससे अधिक होगी, उन्हें अपर लेयर में रखा जाएगा। यह एक निश्चित और स्पष्ट मानदंड होगा, जिससे वर्गीकरण आसान हो जाएगा। पहले की तुलना में यह प्रणाली अधिक सरल और पारदर्शी मानी जा रही है। RBI का कहना है कि इससे नियामकीय प्रक्रिया में एकरूपता आएगी। नई व्यवस्था से बड़ी कंपनियों की निगरानी और सख्त हो सकती है। इससे वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकारी NBFCs को शामिल करने का प्रस्ताव
एक बड़ा बदलाव यह है कि अब सरकारी NBFC कंपनियों को भी अपर लेयर में शामिल किया जा सकता है। अभी तक सरकारी स्वामित्व वाली NBFCs को बेस या मिडल लेयर में रखा जाता था। RBI ने ओनरशिप न्यूट्रल नीति के तहत यह प्रस्ताव रखा है। इसका मतलब है कि कंपनी निजी हो या सरकारी, नियम सभी पर समान लागू होंगे। इससे कई बड़ी सरकारी कंपनियां भी कड़े नियामकीय दायरे में आ सकती हैं। यह कदम प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
टाटा संस व अन्य कंपनियों पर पर होगा असर
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर चर्चा चल रही है। RBI के नियमों के अनुसार, अपर लेयर की शीर्ष 15 कंपनियों को लिस्ट होना जरूरी है। टाटा संस, जिसकी एसेट वैल्यू मार्च 2025 में करीब ₹1.75 लाख करोड़ थी, अब तक लिस्ट नहीं हुई है। नई गाइडलाइंस से इस मामले पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा कई बड़ी सरकारी कंपनियां भी अब इस सूची में शामिल हो सकती हैं। इससे NBFC सेक्टर में प्रतिस्पर्धा का नया दौर शुरू हो सकता है।
RBI गवर्नर ने दिए थे सुधार के संकेत
ड्राफ्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि अपर लेयर NBFCs को राज्य सरकार की गारंटी का उपयोग करने की अनुमति दी जाए। इसे क्रेडिट रिस्क ट्रांसफर के रूप में बिना सीमा के इस्तेमाल किया जा सकेगा, हालांकि कुछ शर्तें लागू होंगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में इस नए ढांचे की घोषणा की थी। उन्होंने संकेत दिया था कि NBFC सेक्टर के लिए व्यापक सुधार लाए जाएंगे। अब इस ड्राफ्ट पर सुझाव और प्रतिक्रियाएं आमंत्रित की गई हैं। अंतिम नियम लागू होने के बाद NBFC सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
पारदर्शी बनेगा फाइनेंशियल सिस्टम
अब तक NBFCs को अलग-अलग पैरामीटर से वर्गीकृत किया जाता था, नए नियम लागू हुए तो सिर्फ एसेट साइज (₹1 लाख करोड़) को मुख्य आधार बनाया जाएगा। बड़ी कंपनियां सीधे अपर लेयर में आ जाएंगी। पहले सरकारी कंपनियों को थोड़ी छूट मिलती थी। अब सरकारी और निजी दोनों के लिए एक जैसे नियम होंगे। इससे पीएसयू कंपनियों पर भी ज्यादा निगरानी बढ़ेगी। अपर लेयर की टॉप NBFCs को शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी होगा। इससे टाटा सन्स जैसी कंपनियों पर भी असर पड़ सकता है।










