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ईपीएफ में नौकरी बदलने से 5 साल की सेवा नहीं टूटती, अगर पीएफ नई कंपनी में ट्रांसफर किया जाए। नॉन कॉन्ट्रिब्यूटिंग पीरियड पेंशन के 10 साल के नियम और राशि पर असर डाल सकते हैं।

PF Tips: नई नौकरी के साथ अक्सर लोग अपना पीएफ अकाउंट भी बदलते रहते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्या बार-बार नौकरी बदलने से ईपीएफ की 5 साल की निरंतर सेवा टूट जाती है? और क्या इसका असर पेंशन पर पड़ता है?। दरअसल, ईपीएफ में नॉन-कॉन्ट्रिब्यूटरी पीरियड अहम फैक्टर है। ये वे दिन होते हैं जब आपके खाते में पीएफ का योगदान नहीं होता—जैसे बिना वेतन छुट्टी, अनुपस्थिति या नौकरी बदलने के बीच का छोटा गैप।

ईपीएफ से टैक्स-फ्री निकासी के लिए 5 साल (यानी 60 महीने) की लगातार सेवा जरूरी मानी जाती। लेकिन यहां लगातार का मतलब यह नहीं कि आप एक ही कंपनी में काम करें। अगर आप नौकरी बदलते समय अपना पीएफ बैलेंस नई कंपनी में ट्रांसफर करते, तो आपकी सेवा निरंतर मानी जाती है। यानी जॉब-हॉपिंग से 5 साल का नियम नहीं टूटता।

विशेषज्ञों के अनुसार, 30-50 दिन के एनसीपी (नॉन-कॉन्ट्रिब्यूटरी पीरियड) गैप भी इस निरंतरता पर असर नहीं डालते, बशर्ते अकाउंट ट्रांसफर किया गया हो।

NCP दिनों का क्या असर होता है?
नॉन-कॉन्ट्रिब्यूटरी पीरियड दिन आपके ईपीएफ रिकॉर्ड में दर्ज होते हैं, लेकिन इन्हें वर्किंग डेज में नहीं गिना जाता। इसका मतलब यह है कि आपका अकाउंट तो चलता रहता है, लेकिन इन दिनों में कोई योगदान नहीं होता। आप अपने एनसीपी दिन, जॉइनिंग डेट और कुल अनुभव ईपीएफओ पोर्टल के पासबुक सेक्शन में देख सकते।

पेंशन के लिए 10 साल जरूरी
EPF के साथ जुड़ी पेंशन योजना के लिए कम से कम 10 साल की योगदान वाली सेवा जरूरी होती है। यहां एक अहम बात है कि एनसीपी दिन और नौकरी के गैप इस 10 साल की गणना में शामिल नहीं होते। यानी अगर आपके कुल योगदान वाले साल 10 से कम रह जाते हैं, तो आपको पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसी स्थिति में कर्मचारी को मासिक पेंशन की जगह एकमुश्त रकम निकालनी पड़ती।

पेंशन राशि पर भी पड़ता है असर
पेंशन की राशि आखिरी 60 महीनों की औसत सैलरी पर आधारित होती है। अगर इस दौरान ज्यादा एनसीपी दिन हैं, तो आपकी औसत सैलरी और योगदान दोनों प्रभावित होते हैं। इससे आपकी अंतिम पेंशन राशि कम हो सकती है।

ईडीएलआई स्कीम में थोड़ी राहत
ईपीएफ से जुड़ी EDLI (बीमा योजना) में एक राहत जरूर है। इसमें 60 दिन तक का गैप कंटीन्युअस सर्विस माना जाता है, लेकिन यह सुविधा सिर्फ बीमा क्लेम तक सीमित है, पेंशन पर लागू नहीं होती।

क्या करना चाहिए?
नौकरी बदलते समय हमेशा अपना पीएफ ट्रांसफर करना चाहिए। इसके अलावा नॉन-कॉन्ट्रिब्यूटरी पीरियड पर नजर रखनी भी जरूरी है। 10 साल की योगदान सेवा पूरी करने का लक्ष्य रखें। जॉब बदलने से ईपीएफ की 5 साल की निरंतरता नहीं टूटती, अगर आप सही तरीके से अकाउंट ट्रांसफर करते हैं। लेकिन एनसीपी डे और गैप पेंशन की पात्रता और राशि दोनों को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए प्लानिंग जरूरी है।

(प्रियंका कुमारी)

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