Insurance Policy Fraud: बीमा पॉलिसी लेते वक्त अक्सर लोग एजेंट की बातों पर भरोसा कर लेते हैं, लेकिन कई बार सालों बाद पता चलता है कि जो बताया गया था, असल में पॉलिसी वैसी है ही नहीं। इसे ही मिस-सेलिंग कहा जाता और यह समस्या आज काफी आम हो गई।
अक्सर ऐसा होता है कि मार्केट से जुड़ी पॉलिसी को 'गारंटीड रिटर्न' बताकर बेच दिया जाता है। या फिर कहा जाता है कि सिर्फ 3-5 साल प्रीमियम देना होगा, जबकि असल में भुगतान की अवधि 10 साल या उससे ज्यादा होती है। ऐसे में जरूरी है कि आप समय रहते अपनी पॉलिसी को खुद समझें।
पॉलिसी डॉक्यूमेंट को ध्यान से पढ़ना जरूरी
सबसे पहला कदम है पॉलिसी डॉक्यूमेंट को ध्यान से पढ़ना। यही असली कॉन्ट्रैक्ट होता है, जिसमें सभी शर्तें साफ लिखी होती हैं। इसमें पॉलिसी की अवधि, प्रीमियम कितने साल देना है, मैच्योरिटी पर कितना पैसा मिलेगा और बीच में बंद करने पर क्या होगा ये सब साफ लिखा होता है।
गारंटीड रिटर्न के बारे में पूरी जानकारी लें
इसके बाद यह याद करें कि एजेंट ने आपको क्या बताया था। अगर उसने गारंटीड रिटर्न का वादा किया था, लेकिन डॉक्यूमेंट में लिखा है कि रिटर्न मार्केट पर निर्भर है, तो समझिए कुछ गड़बड़ है। ऐसी छोटी-छोटी बातें ही मिस-सेलिंग की पहचान होती हैं।
प्रीमियम पेमेंट टर्म को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम होता है। कई लोग सोचते हैं कि उन्हें कुछ साल ही पैसा देना है, लेकिन बाद में पता चलता है कि लंबी अवधि तक प्रीमियम देना पड़ेगा। अगर बीच में भुगतान रोक दिया तो पॉलिसी लैप्स हो सकती है या नुकसान हो सकता।
यह भी समझना जरूरी है कि हर पॉलिसी का रिटर्न एक जैसा नहीं होता। कुछ में फिक्स्ड बेनिफिट मिलता है, जबकि कुछ पूरी तरह मार्केट पर निर्भर होते हैं। अगर रिटर्न मार्केट से जुड़ा है, तो उसमें कोई गारंटी नहीं होती, ये बात साफ समझनी चाहिए।
फ्री लुक पीरियड पर नजर रखें
एक अहम बात जिसे लोग नजरअंदाज कर देते हैं, वह है 'फ्री-लुक पीरियड'। पॉलिसी मिलने के बाद आमतौर पर 15 दिन का समय मिलता है, जिसमें आप पॉलिसी को पढ़कर संतुष्ट न होने पर कैंसल कर सकते हैं। लेकिन ज्यादातर लोग इस दौरान डॉक्यूमेंट चेक ही नहीं करते और मौका निकल जाता है।
अगर आपको लगता है कि आपकी पॉलिसी गलत तरीके से बेची गई है, तो सबसे पहले बीमा कंपनी से संपर्क करें और अपनी शिकायत दर्ज कराएं। अगर वहां से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो आप इंश्योरेंस रेगलुेटरी अथॉरिटी के ग्रिवांस सिस्टम या इंश्योरेंस ओम्बड्समैन के पास जा सकते हैं।
ध्यान रखें, बीमा तभी फायदेमंद है जब आप उसे पूरी तरह समझकर लें। पॉलिसी खरीदने के बाद उसे समय रहते पढ़ना और समझना आपको बड़े नुकसान से बचा सकता है।
(प्रियंका कुमारी)










