International Gita Festival Bali: धार्मिक जुड़ाव को इंडोनेशिया ने कुरुक्षेत्र में मांगी जमीन, सदन में रखा प्रस्ताव
हरियाणा के कुरुक्षेत्र की धरा से शुरू हुआ गीता का संदेश अब पूरी दुनिया में फैल रहा है। इंडोनेशिया में भी इसकी गूंज सुनाई दी। वहां गए प्रतिनिधिमंडल से इंडोनेशिया के नेताओं ने कुरुक्षेत्र में जमीन की मांग की।
Internation Gita festival Bali : पूरी दुनिया में गीता का संदेश फैलाने के लिए तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का इंडोनेशिया के बाली में आगाज हुआ। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड व जियो गीता के संयुक्त तत्वावधान में यह आयोजन किया जा रहा है। बाली की प्रांतीय विधायिका द्वारा प्रस्ताव रखा गया कि ऐतिहासिक कुरुक्षेत्र की धरती पर उन्हें जमीन उपलब्ध करवाई जाए, जिससे इंडोनेशिया मूल के नागरिक इस तपोभूमि से सीधा जुड़ाव हासिल कर सकें। इसके लिए हरियाणा के पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने भरोसा दिलाया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से चर्चा करते हुए बाली के जनप्रतिनिधियों की भावना से अवगत करवाते हुए सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
2016 में हुई अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की शुरुआत
प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रतिनिधि के तौर पर विरासत व पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे हैं। शुक्रवार को बाली के ऐतिहासिक क्षेत्रीय जन प्रतिनिधि परिषद में प्रांतीय विधायिका द्वारा कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेंद्र सिंहल सहित सभी प्रतिनिधियों का भव्य स्वागत किया और उन्होंने सदन में पवित्र गीता को सदन प्रतिस्थापित किया। सदन में डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के अमर गीता संदेश को वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने की परंपरा को शुरू किया गया था, जिसे आज वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व की हरियाणा सरकार गीता ज्ञानानम संस्थानम व गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के मार्गदर्शन में आगे बढ़ा रही है। भारत-इंडोनेशिया के मध्य भले ही 90 नाटिकल मील की दूरी हो, लेकिन दोनों देशों के सांस्कृतिक एवं धार्मिक संबंध सदियों से प्रगाढ रहे हैं। भारतीय महाकाव्य रामायण, महाभारत के प्रभाव और संस्कृत भाषा के उपयोग से दोनों देशों की घनिष्ठता दुनिया के सामने एक विशिष्ट उदाहरण पेश करती है।
अब तक इन देशों में हुए गीता जयंती उत्सव
पहली बार भारत के बाहर इस महोत्सव का आयोजन 2019 में मॉरीशस और लंदन में किया गया था। सितंबर 2022 में कनाडा में यह आयोजन किया गया। इसके बाद अप्रैल 2023 में महोत्सव ऑस्ट्रेलिया में आयोजित किया गया। 2024 में इस महोत्सव का आयोजन श्रीलंका में किया गया। इस वर्ष इंडोनेशिया में अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती उत्सव मनाया जा रहा है।
हरियाणा कृष्णा सर्किट का 175 करोड़ से विकास
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में स्वदेश दर्शन योजना के तहत मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व की सरकार महापर्यटक स्थल के तौर पर विकसित कर रही है। हरियाणा कृष्णा सर्किट की पहचान करते हुए 175 करोड़ रुपये की लागत से महाभारत युद्ध से जुड़े 134 स्थानों को पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित किया जा रहा है। कुरुक्षेत्र में महाभारत अनुभव केंद्र का निर्माण 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है, जहां महाभारत से जुड़े हर पहलु को नजदीकी से महसूस करवाया जाएगा, ताकि पूरी दुनिया सरल तरीके से गीता ज्ञान को समझते हुए आत्मसात कर सके। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता अपने आप मे सम्पूर्ण ग्रन्थ है, क्योंकि जो कुरुक्षेत्र की धरती पर भगवान श्री कृष्ण जी ने कहा वो ज्यों का त्यों इसमें है और सम्पूर्ण है।
युद्ध रोकने में गीता निभाएगी अहम भूमिका
हरियाणा के पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा है कि भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मजबूती प्रदान करने में गीता स्थली कुरुक्षेत्र की अहम भूमिका रहेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा भगवान श्रीकृष्ण के गीता संदेश को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में दुनिया भर में चल रहे संघर्षों के समाधान में गीता की अहम भूमिका है। भारत इसके लिए वैश्विक समुदाय को जागरूक करने की हरसंभव कोशिश कर रहा है, जिसमें बाली में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव प्रकाश पुंज की भांति योगदान देगा। डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि गीता के संदेश को यदि विश्व के सारे लोग समझ लें तो फिर सारे झगड़े ही मिट जाएं और संसार एक परिवार के तौर पर एकजुटता व भाईचारे के सूत्र में बंध जाए। इस अवसर पर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज, विदेश मंत्रालय सचिव दक्षिण डॉ. नीना मल्होत्रा, भारत के महावाणिज्य दूत, बाली डॉ. शशांक विक्रम, केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंहल, केडीबी सीईओ पंकज सेतिया, 48 कोस तीर्थ निगरानी समिति के चेयरमैन मदन मोहन छाबड़ा, विदेश मंत्रालय संयुक्त सचिव अंजु रंजन, केडीबी सदस्य डॉ. एमके मुदिग्ल, बाली राज्य सदन के वाइस चेयरमैन नोवा सेवीपुत्रा, बाली राज्य सदन के हेड कमीशन न्योमन बुदिउतामा, डॉ. मेड सुर्पाथा, करनाल महापौर रेणु बाला गुप्ता, डॉ. सोमबीर आदि उपस्थित रहे।