Yuvraj Mehta Death Case: 'मैंने उन्हें विस्तार से...,' युवराज मेहता केस में फ्लिपकार्ट एजेंट मोहिंदर ने SIT के सामने खोली सिस्टम की पोल
Yuvraj Mehta Death Case: सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता केस को लेकर फ्लिपकार्ट एजेंट मोहिंदर का बयान सामने आया है।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता केस में फ्लिपकार्ट एजेंट मोहिंदर ने बयान दिया है।
Yuvraj Mehta Death Case: ग्रेटर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। लेकिन अब इस मामले को लेकर युवराज के शव को नाले से बाहर निकालने वाले फ्लिपकार्ट एजेंट मोहिंदर का बयान सामने आया है। मोहिंदर ने SIT के सामने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
मीडिया से बात करते हुए फ्लिपकार्ट एजेंट मोहिंदर ने कहा कि उन्होंने SIT को साफ-साफ बता दिया है कि हादसे की रात क्या-क्या हुआ था, किस तरह से युवराज को मौत के मुंह से बाहर निकाला जा सकता था। मोहिंदर ने SIT से यह भी कहा है कि उन्होंने कभी भी अपना बयान नहीं बदला है, वह हमेशा, अपने बयान पर कायम रहे हैं, आज भी वह अपने बयान पर कायम हैं।
मोहिंदर ने SIT को क्या बताया ?
मोहिंदर के मुताबिक, हादसे वाले दिन वह करीब 30 से 40 मिनट तक घने अंधेरे और गंदे पानी से भरे नाले में रहे थे। इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों को हर वो जानकारी दी थी, जिसके तहत युवराज को सुरक्षित बचाया जा सकता था। फ्लिपकार्ट एजेंट मोहिंदर कहते हैं कि, 'मुझसे वही सवाल पूछे गए जो मैंने पहले बताए थे, और मैंने उन्हें दोहरा दिया। किसी भी बयान में बिल्कुल कोई बदलाव नहीं हुआ है।
SIT जांच में उन्होंने मुझसे सारे सवाल पूछे, मैंने उन्हें घटना के बारे में सब कुछ बताया। मैंने किसी भी तरह से कुछ भी मनगढ़ंत बनाने की कोशिश नहीं की, मैं 30 से 40 मिनट तक नाले के अंदर रहा। मैंने विस्तार से बताया कि लड़के को कैसे बचाया जा सकता था। उन्होंने मुझे दोबारा बुलाने के बारे में कुछ नहीं कहा।' फ्लिपकार्ट एजेंट मोहिंदर अपनी जान को खतरे में डालकर युवराज को बचान नाले में उतर गए, इसके बावजूद बचाव दल केवल तमाशबीन बनी हुई थीं।
मेरा बेटा मौत से 2 घंटे तक लड़ता रहा-पिता राजकुमार
27 साल के युवराज के मेहता के पिता राजकुमार मेहता के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं था। पिता के सामने उसके बच्चे की मौत हो जाना बेहद डरा देने वाला मंजर है। आखिरी पलों में भी युवराज जान बचाने के लिए मदद मांगता रहा। इसके बावजूद घटनास्थल पर भारी संख्या में मौजूद कर्मचारी कुछ भी नहीं कर सके।
युवराज 2 घंटे तक मौत से लड़ता रहा, मोबाइल की टॉर्च जलाकर मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन प्रशासन की लापरवाही ने उसकी जान ले ली। मृतक के पिता का कहना है कि मेरे बेटे युवराज को अब कोई वापस नहीं ला सकता, लेकिन मैं चाहता हूं कि 80 लापरवाह कर्मियों और दोषी विभागों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य किसी दूसरे के साथ ऐसा ना हो।
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