जनकपुरी सड़क हादसा: दिल्ली जल बोर्ड के तीन अधिकारियों पर गिरी गाज, प्रवेश वर्मा बोले- किसी को बख्शा नहीं जाएगा

दिल्ली की पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने भरोसा दिलाया कि पाइपलाइन पुनर्वास परियोजना का कार्य संभाल रही कंपनी के खिलाफ भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उधर, आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को लेकर आक्रामक है।

Updated On 2026-02-06 17:08:00 IST
पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने दिल्ली जल बोर्ड के तीन अधिकारियों को किया सस्पेंड। 

दिल्ली के जनकपुरी सड़क हादसे को लेकर दिल्ली जल बोर्ड के तीन अधिकारियों पर गाज गिरी है। दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि एरिया के जेई, कार्यकारी अभियंता और एई को निलंबित कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पाइपलाइन पुनर्वास परियोजना का कार्य संभाल रही कंपनी के खिलाफ भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली के 25 वर्षीय कमल ध्यानी की गुरुवार रात एक गड्ढे में गिरने से मौत हुई है। यह गड्ढा दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खुदवाया गया था। दिल्ली के पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि सड़क के ऊपर तीन महीने से काम चल रहा था। दोनों तरफ 100 मीटर की दूरी पर बैरिकेड लगाए गए थे। पिछले दो दिनों में यहां एक बड़ा गड्ढा खोदा गया था। इस तरफ की इस लेन में यातायात पूरी तरह ठप था। उन्होंने कहा कि कल की घटना बेहद दुख है। दिल्ली जल बोर्ड को इस घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। निदेशक स्तर के अधिकारियों की समिति इस मामले की जांच कर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी।

उन्होंने बताया कि मैंने मृतक के मित्र से बात की। उन्होंने बताया कि कल रात करीब 11:45 बजे कमल ने घर फोन किया और कहा कि 10 मिनट में घर पहुंच जाएगा। उसके बाद वह सड़क के इस हिस्से की लेन पर पहुंचा और गड्ढे में गिर गया। उन्होंने कहा कि जनकपुरी पुलिस ने उसके परिवार के साथ मिलकर कल रात दो घंटे तक उसकी तलाश की। उन्होंने कहा कि हम यहां दिल्ली जल बोर्ड के तीन अधिकारियों, जेई, कार्यकारी अभियंता और एई को निलंबित कर रहे हैं। साथ ही काम कर रही कंपनी के खिलाफ भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेंगे।

सौरभ भारद्वाज ने बीजेपी सरकार पर साधा निशाना
इस हादसे पर आम आदमी पार्टी दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जनकपुरी में जो हुआ है, उसने दिल्ली में भाजपा सरकार, दिल्ली पुलिस आयुक्त और पूरी दिल्ली पुलिस को बेनकाब कर दिया है। आज 25 वर्षीय युवक की मौत हो गई है। पुलिस पर गंभीर आरोप लगे हैं। रात करीब 12 बजे परिवार अपने बेटे की तलाश में एक नहीं बल्कि छह पुलिस स्टेशन गए, लेकिन किसी ने उनकी शिकायत दर्ज नहीं की। उनके बच्चों के फोन की लोकेशन जल्दबाजी में जानबूझकर डिलीट कर दी गई।

आप नेता ने पूछा कि उन्होंने ऐसा क्यों किया? पुलिस क्या छिपाने की कोशिश कर रही है? जब लड़के का फोन चालू था, तब पुलिस के पास उसकी लोकेशन थी। अगर वे चाहते, तो उसे ढूंढ सकते थे। शायद उसे बचाया जा सकता था, लेकिन किसी ने उसे नहीं बचाया। सुबह आशीष सूद वहां गए और उचित व्यवस्था होने का झूठ बोला। अगर उचित व्यवस्था थी, तो क्या उस लड़के ने आत्महत्या करने के लिए छलांग लगाई? उन्होंने कहा कि यह सरकार और पुलिस की बेशर्मी है, जो झूठ बोल रही है। आज ठोस सबूतों के साथ यह बात पूरे देश के सामने उजागर हो गई है।

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