Delhi BMW Accident: 'अगर नवजोत सिंह...,' दिल्ली धौला कुआं हादसे में 400 पेज की चार्जशीट में खुलासा

Delhi Dhaula Kuan BMW Accident: दिल्ली के धौला कुआं BMW हादसे मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है...

Updated On 2026-01-01 13:11:00 IST

दिल्ली के धौला कुआं BMW हादसे में चार्जशीट दाखिल। 

Delhi Dhaula Kuan BMW Accident: दिल्ली में धौला कुआं के पास पिछले साल सितंबर में सड़क हादसा हुआ था। हादसे में वित्त मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी 52 साल नवजोत सिंह की मौत हो गई थी। पुलिस ने इस मामले को लेकर पटियाला हाउस कोर्ट में 400 पेज की चार्जशीट दाखिल की है। पुलिस ने चार्जशीट के माध्यम से दावा करते हुए कहा है कि हादसे के बाद नवजोत कम से कम 15 मिनट तक जिंदा रहे, लेकिन अगर उन्हें समय पर मेडिकल सेवा मिल जाती तो उनकी जान बच सकती थी।

बता दें कि 14 सितंबर को दोपहर करीब 1 बजकर 30 मिनट पर धौला कुआं के पास यह हादसा हो गया था। गुरुग्राम के रहने वाले गगनप्रीत मक्कड़ की BMW तेज स्पीड में मेट्रो पिलर से टकराई, पलटी खाई और नवजोत सिंह की मोटरसाइकल से टकरा गई। हादसे में नवजोत और उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके बाद नवजोत को वेंकटेश्वरा अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

BMW की स्पीड रिपोर्ट में सामने आया कि रिंग रोड पर 50 किमी प्रति घंटे की लिमिट होने के बावजूद कार 100-110 किमी की रफ्तार चल रही थी। चार्जशीट में सामने आया है कि इतनी स्पीड में गाड़ी को कंट्रोल करना असंभव था, टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि BMW बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी।

आरोपी ने की देर-पुलिस

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर लिखा गया है कि हादसे के बाद नवजोत 15 मिनट तक जिंदा रहे थे। पुलिस ने आरोप लगाया है कि गगनप्रीत मक्कड़ ने जानबूझकर इलाज में देरी की, जिसके चलते नवजोत की मौत हो गई। पुसलि का आरोप है कि हादसे के पास दिल्ली कैंट हॉस्पिटल और AIIMS ट्रॉमा सेंटर जैसे बड़े अस्पताल केवल 15 मिनट की दूरी पर है, लेकिन आरोपी गगनप्रीत नवजोत और उनकी घायल पत्नी को 20 किमी दूर GTB नगर के नुलाइफ हॉस्पिटल ले गए, जहां पहुंचने में 23 मिनट लग गए थे। पुलिस ने संदेह जताया है कि नुलाइफ हॉस्पिटल गगनप्रीत के दूर के रिश्तेदारों का है। जांच में सामने आया है कि आरोपी के पिता जाविंदर सिंह नुलाइफ से जुड़ी कंपनियों के डायरेक्टर हैं।

चार्जशीट में मेडिकल डॉक्यूमेंट्स के साथ गड़बड़ी और सबूत इकट्ठा करने की बात सामने आई है। ऐसा भी कहा जा रहा है कि हादसे के दौरान एम्बुलेंस के ड्राइवर और पैरामेडिक ने मदद करने का प्रयास किया, लेकिन आरोपी ने साफ मना कर दिया था। पुलिस ने उनका बयान दर्ज करने के बाद कहा कि एम्बुलेंस स्टाफ पर कोई दोष नहीं है, मदद को जानबूझकर रोका गया था।

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