फर्जी लेटर के सहारे सालों नौकरी: सेवा समाप्ति के बाद अब आठ पर एफआईआर

राज्य शिक्षा आयोग के फर्जी लेटर के सहारे नौकरी करने वाले जिले के चार और मोहला मानपुर जिले के चार कर्मचारियों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने एफआईआर दर्ज कराया है।

Updated On 2026-02-06 11:52:00 IST

File Photo 

खैरागढ़-मोहला। राज्य शिक्षा आयोग के फर्जी लेटर के सहारे सरकारी नौकरी करने वाले जिले के चार और मोहला मानपुर जिले के चार कर्मचारियों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने एफआईआर दर्ज कराया है। जानकारी अनुसार 2021 मे टीकम चंद साहू, फगेंद्र सिंहा, रजिया अहमद और अजहर अहमद जिले के अलग-अलग शालाओं में सहायक ग्रेड 3 के पद पर कार्य कर रहे थे जबकि डोलामणी मटारी, शादाब उस्मान, आशुतोष कछवाहा, अमीन शेख मोहला मानपुर जिले के अलग-अलग शालाओं में कार्यरत थे।

अगस्त 25 को दो जिलो में फैला फर्जी नियुक्ति का नेटवर्क हेडिंग से हरिभूमि में समाचार प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया। सभी की नियुक्ति को लेकर पड़ताल के दौरान पता चला कि राज्य शिक्षा आयोग के सचिव डॉ. ओपी मिश्रा के आदेश पर डाटा एंट्री आपरेटर के पद पर तीन और पांच सहायक ग्रेड तीन के पद पर सितंबर 2021 से काम कर रहे है। दोनों जिलों में शिक्षा विभाग के अवर सचिव द्वारा जारी मई 22 के आदेश के परिपालन में उन्हे ज्वाइंनिंग दी गई। इस संबंध में डीईओ कार्यालय से राज्य शिक्षा आयोग द्वारा जारी आदेश की सत्यता को लेकर जानकारी लेने पर पता चला कि उक्त क्रमांक का पत्र विभाग ने बैंक ऑफ बड़ौदा की विवेकानंद नगर शाखा को जारी किया है।

हाई और हायर में मिली थी पदस्थापना
आयोग द्वारा सितंबर 21 मे जारी पत्र के आधार पर जिले में शिक्षा विभाग द्वारा मई 22 में टीकम चंद साहू को हाई स्कूल मोहगांव, फगेंद्र सिंहा को उमा शाला बकरकट्टा, रजिया अहमद को उमा शाला पैलीमेटा में सहायक ग्रेड तीन के रूप में और अजहर अहमद डाटा एंट्री ऑपरेटर को छुईखदान बीईओं में पदस्थापना आदेश जारी किया गया था। हालांकि इन चारों के अलावा सुश्री सी एच एंथोनी को भी ठाकुरटोला उमा शाला में सहायक ग्रेड 3 के रूप में पदस्थापना आदेश जारी किया गया था। लेकिन उसने अपनी उपस्थिति ही नही दी जिसके चलते पांच में से चार को पहले विभाग ने बर्खास्त किया फिर एफआईआर कराया है। इसी तरह डोलामणी मटारी, शादाब उस्मान, आशुतोष कछवाहा और मोहम्मद अमीन शेख भी मोहला मानपुर जिले के अलग-अलग शालाओं में काम कर रहे थे।

कलेक्टोरेट मे भी किया काम
जिला गठन के बाद रजिया अहमद को कलेक्टोरेट के डीएमएफ शाखा में अजहर अहमद को अभियोजन शाखा में संलग्न किया गया था, वही फगेंद्र सिंहा और टीमक सिंहा से डीईओ ऑफिस में काम लिया जा रहा था। मामले का खुलासा होने के बाद से ही चारों कर्मचारी अलग-अलग कारण बताकर अवकाश पर चले गए थे। तत्संबंध में कार्यालय द्वारा प्रतिरक्षा को लेकर दिया जवाब संतुष्टिजनक और दस्तावेज प्रमाणित नहीं पाया गया जिसके चलते उनकी नियुक्ति को वाजिब ठहराया जा सके। आखिरकार विभाग ने अगस्त में हुए खुलासे पर जांच परीक्षण सहित अन्य प्रक्रिया पूरी करने के बाद राज्य शिक्षा आयोग के फर्जी आदेश के सहारे सालों से नौकरी करने वालों के खिलाफ एफआईआर कराया है।

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