आरएईओ के पद पर सीधी भर्ती: 14 दिव्यांग सलेक्ट, प्रमाणपत्रों की जांच से पहले 13 गायब
फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर खुद को बहरा बताकर नौकरी पाने वालों पर शिकंजा कसने के बाद अब ये लोग जान बचाने जांच-पड़ताल के पहले ही डरकर इधर-उधर होने लगे हैं।
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर खुद को बहरा बताकर नौकरी पाने वालों पर शिकंजा कसने के बाद अब ये लोग जान बचाने जांच-पड़ताल के पहले ही डरकर इधर-उधर होने लगे हैं। ताजा मामला कृषि विभाग में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी यानी आरईएओ के 14 पदों पर भर्ती का है। व्यापमं की परीक्षा पास कर नौकरी पाए ऐसे लोगों को जब मूल प्रमाण पत्रों की जांच के लिए बुलाया गया तो इनमें से 13 गायब ही हो गए।
ये है मामला
राज्य सरकार के संचालनालय कृषि ने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के 321 पदों पर सीधी भर्ती के लिए व्यावसायिक परीक्षा मंडल के माध्यम से परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा पास करने वालों में से 14 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। ये सभी श्रवण बाधित श्रेणी (बहरे) के थे, लेकिन इनमें से केवल एक ही मूल प्रमाण पत्रों की जांच कराने पंहुचा। बाकी के 13 गैरहाजिर रहे। मूल प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बाद आवेदक के प्रमाणपत्रों के आधार पर उनकी पात्रता, अपात्रता की छानबीन करने के लिए बनी समिति ने सभी अनुपस्थित लोगों को अपात्र घोषित कर दिया है, लेकिन इसके साथ ही कहा गया है कि अपात्र हुए आवेदकों को यदि कोई आपत्ति है तो वे 23 जनवरी तक खुद पेश होकर दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। दावे के पक्ष में उन्हें वांछित दस्तावेज, अभिलेख सहित अभ्यावेदन पेश करना होगा। आशंका है ये सारे लोग फर्जी प्रमाण पत्र धारी हैं, इसलिए पकड़े जाने के डर से वे गैरहाजिर रहे।
ये हो सकते हैं फर्जी
छत्तीसगढ़ दिव्यांग संघ के प्रदेश अध्यक्ष बोहित राम चंद्राकर ने इस मामले में कहा है, हमें इस बार पूरी आशंका है कि ये मूल प्रमाण पत्रों की जांच से भागे 13 अभ्यर्थी फर्जी प्रमाण पत्र धारी हो सकते हैं, लेकिन ये केवल 13 ही नहीं हैं, प्रदेश में अब तक 153 मामले सामने आ चुके हैं और हम इन फर्जी प्रमाण पत्र धारियों के खिलाफ सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ रहे हैं।
आशंका इसलिए
मूल प्रमाण पत्रों की जांच से गायब होने वालों को फर्जी प्रमाण पत्र धारी के रूप में देखे जाने के पीछे दरअसल आशंका की वजह ये है कि राज्य में अब तक 153 लोगों के नाम फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने के मामले में सामने आ चुके हैं। जो लोग पकड़ में आए हैं, वे सुप्रीम कोर्ट की शरण में पहुंचे हैं। दूसरी तरफ राज्य में इस प्रकार के फर्जियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है।