J&K- ​'ऑपरेशन किया': उधमपुर में गुफा के अंदर जैश का टॉप कमांडर ढेर, किश्तवाड़ में भी एक आतंकी मारा गया

सुरक्षा बलों ने इस ऑपरेशन में अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया। घने जंगलों और गुफा के अंदर की हलचल जानने के लिए थर्मल इमेजिंग कैमरों से लैस UAV का इस्तेमाल किया गया।

Updated On 2026-02-04 22:10:00 IST

सुरक्षा बलों ने इस ऑपरेशन में अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया।

​उधमपुर: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर और किश्तवाड़ जिलों में सुरक्षाबलों ने जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ एक निर्णायक सफलता हासिल की है। बुधवार को हुए दो अलग-अलग ऑपरेशनों में कुल तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराया गया।

इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व सेना की CIF डेल्टा, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF के जॉइंट टास्क फोर्स ने किया।

​'ऑपरेशन किया': गुफा को ब्लास्ट से उड़ाकर आतंकियों का खात्मा

​उधमपुर में मंगलवार शाम 4 बजे मुठभेड़ शुरू हुई थी, जिसे 'ऑपरेशन किया' नाम दिया गया।



ड्रोन और स्निफर डॉग्स का इस्तेमाल

​सुरक्षा बलों ने इस ऑपरेशन में अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया। घने जंगलों और गुफा के अंदर की हलचल जानने के लिए थर्मल इमेजिंग कैमरों से लैस UAV का इस्तेमाल किया गया।

साथ ही, गुफा के अंदर जाने के लिए स्निफर डॉग्स को भी तैनात किया गया था ताकि किसी भी आईईडी खतरे का पता लगाया जा सके।

​मुठभेड़ की शुरुआत: घेराबंदी के दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी को गोली लगी, लेकिन वह अपने साथी के साथ पास की एक गहरी गुफा में छिप गया।

​ग्रेनेड लॉन्चर का इस्तेमाल: बुधवार को सुरक्षाबलों ने गुफा में छिपे आतंकियों पर UBGL का इस्तेमाल किया। विस्फोट के जरिए गुफा के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया गया, जिसमें दोनों आतंकी मारे गए।

​जैश कमांडर का अंत: मारे गए आतंकियों में जैश-ए-मोहम्मद का टॉप कमांडर रूबानी उर्फ अबू माविया शामिल है। वह पिछले कई सालों से इस इलाके में सक्रिय था और सुरक्षाबलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था।


​किश्तवाड़ में 'ऑपरेशन त्राशी-1' जारी: एक और आतंकी ढेर

​उधमपुर के साथ-साथ किश्तवाड़ के चतरू इलाके में भी सुरक्षाबलों ने बड़ी कामयाबी हासिल की है।

बुधवार शाम को चतरू इलाके में हुए मुठभेड़ में सेना ने एक और आतंकवादी को मार गिराया।

​18 दिनों से सर्च ऑपरेशन: किश्तवाड़ के मडराल-सिंहपोरा और सोनार गांव के जंगलों में 'ऑपरेशन त्राशी-1' पिछले 18 जनवरी से चल रहा है। पिछले 15 दिनों में यहाँ चार बार मुठभेड़ हो चुकी है।

​हथियारों का जखीरा बरामद: अमेरिकी M4 राइफल का मिला सुराग​ मुठभेड़ स्थल से सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया है।

​इससे पहले 23 जनवरी को कठुआ में मारे गए जैश कमांडर उस्मान के पास से भी अमेरिकी M4 राइफल मिली थी, जो इस इलाके में जैश के आधुनिक हथियारों के नेटवर्क की पुष्टि करती है।

​शहीद जवान का लिया बदला

​किश्तवाड़ में चल रहे इस लंबे ऑपरेशन की शुरुआत 18 जनवरी को हुई थी, जब आतंकियों के ग्रेनेड हमले में 8 जवान घायल हुए थे। इलाज के दौरान हवलदार गजेंद्र सिंह शहीद हो गए थे।

​CIF डेल्टा: जम्मू क्षेत्र की विशेष सुरक्षा दीवार

​यह पूरा ऑपरेशन CIF डेल्टा के कुशल नेतृत्व में हुआ। यह भारतीय सेना की एक विशेष फोर्स है जो विशेष रूप से जम्मू क्षेत्र के संवेदनशील इलाकों में तैनात रहती है।

आतंकवादियों के लोकल नेटवर्क और ओवरग्राउंड वर्कर्स पर कार्रवाई करना और घुसपैठ रोकना। इसमें सेना की अलग-अलग इन्फैंट्री यूनिट्स की तैनाती जरूरत के अनुसार की जाती है।

विशेष गठन: CIF डेल्टा कोई अलग रेजिमेंट नहीं है, बल्कि इसमें भारतीय सेना की अलग-अलग इन्फैंट्री यूनिट्स के जवानों को तैनात किया जाता है।

​यूनिट्स में बदलाव: ऑपरेशनल जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार समय-समय पर इस फोर्स की यूनिट्स को बदला जाता रहता है।

​मुख्य जिम्मेदारी: इस फोर्स का मुख्य काम संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा सुनिश्चित करना और सीमा पार से होने वाली घुसपैठ को रोकना है।

​इंटेलिजेंस और जॉइंट ऑपरेशन: यह यूनिट जम्मू-कश्मीर पुलिस, CRPF और अन्य खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर जॉइंट ऑपरेशन को अंजाम देती है।

​OGW नेटवर्क पर प्रहार: आतंकवादियों के खिलाफ सीधी लड़ाई के अलावा, यह फोर्स उनके लोकल नेटवर्क और ओवरग्राउंड वर्कर्स को खत्म करने के लिए भी काम करती है।

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