कर्नाटक में कृष्णा नदी तट पर चमत्कार!: पुल बनाते वक्त मिली 'रामलला' जैसी 1 हजार साल पुरानी भगवान विष्णु की प्रतिमा, शिवलिंग भी बरामद

Centuries-Old Vishnu Idol Found In Karnataka: भगवान विष्णु की मूर्ति और शिवलिंग को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अपने कब्जे में लिया है। मूर्ति और शिवलिंग का परीक्षण किया जाएगा। फिर भी अनुमान है कि दोनों करीब एक हजार साल पुराने हैं। 

Updated On 2024-02-07 10:21:00 IST
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Centuries-Old Vishnu Idol Found In Karnataka: तेलंगाना-कर्नाटक बॉर्डर के पास कृष्णा नदी के किनारे सदियों पुरानी विष्णु की मूर्ति और एक शिवलिंग बरामद किया गया है। यह बरामदगी कर्नाटक के रायचूर में एक पुल निर्माण के दौरान की गई थी। ऐसा माना जाता है कि मूर्तियां 11वीं या 12वीं सदी की हो सकती हैं। भगवान विष्णु की प्रतिमा अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित रामलला जैसी है। दशावतार प्रतिमा के चारों तरफ एक आभामंडल है, जिस पर भगवान विष्णु के सभी अवतारों को उकेरा गया है।  

फिलहाल भगवान विष्णु की मूर्ति और शिवलिंग को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अपने कब्जे में लिया है। मूर्ति और शिवलिंग का परीक्षण किया जाएगा। फिर भी अनुमान है कि दोनों करीब एक हजार साल पुराने हैं। 

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शायद हमले में बचाने के लिए नदी में डाला गया
रायचूर यूनिवर्सिटी में प्राचीन इतिहास और पुरात्व की प्रोफेसर डॉक्टर पद्मजा देसाई ने कहा कि भगवान विष्णु की प्रतिमा मंदिर के गर्भगृह का हिस्सा रही हो। यह भी आशंका है कि मंदिर पर हमला और तोड़फोड़ के बाद इसे बचाने के लिए भक्तों ने नदी में डाल दिया हो। विग्रह प्रतिमा की नाक थोड़ी क्षतिग्रस्त है। 

प्रोफसर ने कहा कि यह प्रतिमा रामलला जैसी है। इसके आभामंडल पर भगवान विष्णु के 10 अवतार- मत्स्य, कूर्म, नरसिंह, वामन, राम, परशुराम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि अवतार को खूबसूरती से उकेरा गया है। खड़ी प्रतिमा के चार हाथ हैं, जिसमें दो ऊपर उठे हाथ शंख और चक्र से सुशोभित हैं। नीचे की ओर किए दो हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में हैं। इस प्रतिमा पर भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ का चित्रण नहीं है। 

Ayodhya Ram Mandir

रामलला की प्रतिमा को योगीराज ने बनाया
कर्नाटक के मैसूर के रहने वाले मूर्तिकार अरुण योगीराज ने अयोध्या में राममंदिर के लिए प्रतिमा बनाई थी। 6 महीने की कड़ी मशक्कत के बाद उन्होंने 5 साल के रामलला की मूर्ति को फाइनल किया। उनके हाथों बनी प्रतिमा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने गर्भगृह में प्राण प्रतिष्ठा के चयनित किया था।  

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