Vitamin D Deficiency: मूड स्विंग, जोड़ों में दर्द...विटामिन डी की कमी से दिख सकते हैं ये 6 लक्षण
Vitamin D Deficiency: विटामिन डी हमारे शरीर के लिए बेहद आवश्यक है। हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ ही इसके कई अन्य फायदे हैं।
Vitamin D Deficiency: आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में धूप से दूरी और बदलती लाइफस्टाइल के कारण विटामिन डी की कमी एक आम समस्या बनती जा रही है। खासकर शहरों में रहने वाले लोग, बच्चे, महिलाएं और बुज़ुर्ग इस कमी से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
विटामिन डी न सिर्फ हड्डियों को मजबूत बनाता है, बल्कि इम्यून सिस्टम, मांसपेशियों और मानसिक स्वास्थ्य में भी अहम भूमिका निभाता है। शरीर में इसकी कमी कई छोटे-बड़े संकेतों के जरिए सामने आती है, जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है।
विटामिन डी की कमी के संकेत
बार-बार थकान और कमजोरी महसूस होना: विटामिन डी की कमी का सबसे आम संकेत लगातार थकान रहना है। पर्याप्त नींद लेने के बाद भी शरीर में एनर्जी की कमी महसूस होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि विटामिन डी मांसपेशियों की ताकत और एनर्जी मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करता है।
हड्डियों और जोड़ों में दर्द: अगर बिना किसी चोट के हड्डियों या जोड़ों में दर्द बना रहता है, तो यह विटामिन डी की कमी का संकेत हो सकता है। यह विटामिन कैल्शियम को शरीर में अवशोषित करने में मदद करता है। इसकी कमी से हड्डियां कमजोर और दर्दनाक हो सकती हैं।
बार-बार बीमार पड़ना: कमजोर इम्यून सिस्टम भी विटामिन डी की कमी का बड़ा लक्षण है। ऐसे लोगों को सर्दी-खांसी, वायरल या इंफेक्शन जल्दी हो जाते हैं। विटामिन डी इम्यून सेल्स को एक्टिव रखता है, जिससे शरीर बीमारियों से लड़ पाता है।
मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन: विटामिन डी की कमी से मांसपेशियों में दर्द, जकड़न और ऐंठन की समस्या हो सकती है। कई बार चलने-फिरने या सीढ़ियां चढ़ने में भी परेशानी होती है। यह संकेत खासतौर पर बुज़ुर्गों में ज्यादा देखा जाता है।
बालों का ज्यादा झड़ना: अगर बाल जरूरत से ज्यादा झड़ रहे हैं और कोई अन्य कारण नजर नहीं आता, तो विटामिन डी की कमी जिम्मेदार हो सकती है। यह विटामिन हेयर फॉलिकल्स को मजबूत बनाता है। लंबे समय तक कमी रहने पर बाल पतले और कमजोर हो सकते हैं।
मूड स्विंग और डिप्रेशन: विटामिन डी का सीधा संबंध मानसिक स्वास्थ्य से भी है। इसकी कमी से चिड़चिड़ापन, उदासी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। धूप में समय न बिताने वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।
क्यों जरूरी है समय पर जांच?
अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो ब्लड टेस्ट के जरिए विटामिन डी लेवल की जांच कराना जरूरी है। सही समय पर डॉक्टर की सलाह से धूप, डाइट और सप्लीमेंट्स के जरिए इस कमी को पूरा किया जा सकता है।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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