Physical Gold vs ETF: फिजिकल गोल्ड या गोल्ड ETF? 2026 में किस तरह का सोने में निवेश समझदारी

Physical Gold vs ETF: निवेश के लिहाज से फिजिकल गोल्ड में कई छिपे खर्च होते हैं। गोल्ड ETF कम खर्च, ज्यादा सुविधा और बेहतर कंट्रोल देता है। 2026 में निवेश के लिए गोल्ड ETF ज्यादा समझदारी भरा विकल्प हो सकता है।

Updated On 2026-01-11 14:21:00 IST

Physical Gold vs ETF: दोनों में से क्या बेहतर है? 

Physical Gold vs ETF: भारत में सोने का रिश्ता सिर्फ निवेश से नहीं, बल्कि भावनाओं से भी जुड़ा है। पीढ़ियों से लोग गहनों,सिक्कों और बार के रूप में सोना संभालकर रखते आए हैं। यह सुरक्षित लगता है,जाना-पहचाना है और जरूरत के वक्त काम आने वाला माना जाता। लेकिन जैसे-जैसे फाइनेंशियल मार्केट परिपक्व हो रहे, वैसे-वैसे सोने में निवेश के नए और ज्यादा स्मार्ट तरीके सामने आए हैं, जिनमें सबसे अहम है गोल्ड ईटीएफ।

2026 में जब वैश्विक अनिश्चितता, जियोपॉलिटिकल तनाव और शेयर बाजार की उठापटक बनी हुई है, सोना फिर से निवेशकों की बातचीत में लौट आया है। सवाल अब यह नहीं है कि पोर्टफोलियो में सोना होना चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि फिजिकल गोल्ड बेहतर है या ईटीएफ?

फिजिकल गोल्ड भावनाओं से जुड़ा निवेश

फिजिकल गोल्ड की सबसे बड़ी ताकत है, उसका आपके हाथ में होना है। गहने पहने जाते हैं, गिफ्ट किए जाते हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते हैं। कई परिवार इसे इमरजेंसी फंड की तरह देखते हैं। लेकिन निवेश के नजरिए से देखें तो इसकी कमियां साफ हैं। गहनों पर मेकिंग चार्ज,शुद्धता को लेकर शक,स्टोरेज और चोरी का डर- ये सब रिटर्न को कम कर देते हैं। बेचते वक्त भी अक्सर बाजार भाव नहीं मिलता, खासकर ज्वेलरी में कटौती तय है।

गोल्ड ETF क्या देता है?

गोल्ड ईटीएफ असल में इलेक्ट्रॉनिक सोना है,जो आपके नाम पर सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है। आप स्टॉक की तरह इसे खरीद-बेच सकते हैं। इसमें न मेकिंग चार्ज है,न स्टोरेज की टेंशन और न ही प्योरिटी का झंझट। खर्च कम और पारदर्शी होते हैं। खरीद-बिक्री का फर्क भी बहुत कम होता है। जो लोग सोने को भावनाओं से नहीं,पोर्टफोलियो के एक हिस्से के तौर पर देखते हैं,उनके लिए ईटीएफ ज्यादा साफ और असरदार विकल्प है।

रिटर्न को लेकर भ्रम

अक्सर कहा जाता है कि असली सोना ज्यादा रिटर्न देता है लेकिन हकीकत में दोनों एक ही गोल्ड प्राइस को ट्रैक करते हैं। फर्क बस इतना है कि ETF में छिपे हुए खर्च नहीं होते,इसलिए लंबे समय में रिटर्न थोड़ा बेहतर भी हो सकता है। अब फिजिकल गोल्ड और गोल्ड ETF पर टैक्स नियम लगभग एक जैसे हैं। यानी फैसला टैक्स नहीं,आपकी जरूरत और सुविधा तय करेगी।

अगर गहने पहनने या पारिवारिक जरूरत के लिए हैं,तो फिजिकल गोल्ड ठीक है। लेकिन अगर मकसद निवेश,रिस्क बैलेंस और स्थिरता है, तो गोल्ड ईटीएफ ज्यादा समझदारी है। ज्यादातर एक्सपर्ट मानते हैं कि कुल पोर्टफोलियो का 5–10% सोने में काफी है। सोना सुरक्षा देता है, रेस नहीं जीतता। 2026 में सोने का चुनाव भावना नहीं,समझदारी से होना चाहिए। पहनने के लिए फिजिकल गोल्ड,निवेश के लिए गोल्ड ईटीएफ, यही समझदारी भरा फैसला हो सकता है।

(प्रियंका कुमारी)

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