पिछले कई हफ्तों से बारूद के ढेर पर बैठी दुनिया ने आखिरकार चैन की सांस ली है। डोनाल्ड ट्रंप की विनाशकारी समय-सीमा खत्म होने से ठीक पहले हुए इस युद्धविराम ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की ताकत को साबित कर दिया है।
जहां एक दिन पहले तक ईरान के नक्शे से मिटने की आशंका जताई जा रही थी, वहीं अब दुनिया के शक्तिशाली देश इस सीजफायर को स्थायी शांति में बदलने की अपील कर रहे हैं।
मलेशिया: "धोखे वाला न हो शांति समझौता"मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने इस समझौते का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया के लिए शांति का एक अच्छा संकेत है।
I wholeheartedly welcome the latest development in the current US-Iran war, in respect of the ten-point plan as proposed by Iran and positively received by the US.
— Anwar Ibrahim (@anwaribrahim) April 8, 2026
This proposal augurs well for the restoration of peace and stability, not only to the region but also the rest of… pic.twitter.com/Gyy9vtjJPD
हालांकि, उन्होंने एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी दी कि बातचीत की प्रक्रिया पूरी तरह ईमानदार होनी चाहिए। उनके अनुसार, शांति वार्ता तभी सफल होगी जब इसमें कोई "दोहरा खेल" या "धोखा" न हो। इब्राहिम ने यह भी मांग की कि इस 10-सूत्रीय योजना का विस्तार इराक, लेबनान और यमन तक किया जाए ताकि पूरे क्षेत्र में स्थिरता आए।
कजाकिस्तान: "पाकिस्तान की कूटनीति को शाबाशी"
कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव ने इस सीजफायर को वैश्विक व्यापार के लिए संजीवनी बताया। उन्होंने इस मुश्किल दौर में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर द्वारा निभाई गई मध्यस्थ की भूमिका की विशेष रूप से सराहना की। टोकायेव को उम्मीद है कि यह समझौता लंबा चलेगा और इससे वैश्विक आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
मिस्र (Egypt): "रचनात्मक संवाद का अवसर"
मिस्र के विदेश मंत्रालय ने सीजफायर को एक "अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर" करार दिया है। मिस्र ने जोर दिया है कि इस 14 दिन के ब्रेक का उपयोग रचनात्मक संवाद और कूटनीति के लिए किया जाना चाहिए।
मिस्र की मांग है कि सैन्य कार्रवाई को अब पूरी तरह से रोक देना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता, विशेषकर होर्मुज क्षेत्र में, बहाल होनी चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया: "ऊर्जा संकट से मिलेगी राहत"ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस समझौते का स्वागत किया। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने और तेल-गैस सुविधाओं पर हमलों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को जो "अभूतपूर्व झटका" लगा था, अब उससे राहत मिलेगी। ऑस्ट्रेलिया ने इस संघर्ष को स्थायी रूप से खत्म करने की मांग की है ताकि ईंधन की बढ़ती कीमतों पर लगाम लग सके
— Anthony Albanese (@AlboMP) April 8, 2026
दक्षिण कोरिया: "क्षेत्रीय स्थिरता की उम्मीद"
दक्षिण कोरिया ने इस कूटनीतिक जीत पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत सफलतापूर्वक पूरी होगी। दक्षिण कोरिया के लिए होर्मुज स्ट्रेट के जरिए सुरक्षित आवाजाही सबसे बड़ी प्राथमिकता है, क्योंकि उनकी ऊर्जा जरूरतें इसी मार्ग पर टिकी हैं। उन्होंने मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता की जल्द बहाली की कामना की।
जापान: "सकारात्मक कदम का स्वागत"जापान ने भी इस युद्धविराम का स्वागत करते हुए इसे एक "सकारात्मक कदम" बताया है। जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने कहा कि वे इस घोषणा का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे तनाव कम करने में मदद मिलेगी। जापान उन देशों में शामिल है जिन्हें होर्मुज बंद होने से सबसे ज्यादा आर्थिक चोट पहुँच रही थी।
न्यूजीलैंड: "स्थायी शांति के लिए अभी काम बाकी"
न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इस खबर को उत्साहजनक बताया, लेकिन साथ ही एक सतर्कता भरा संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि हालांकि यह सीजफायर राहत देने वाला है, लेकिन आने वाले दिनों में इसे "स्थायी शांति" में बदलने के लिए अभी बहुत गंभीर कूटनीतिक काम किया जाना बाकी है।
New Zealand welcomes the announcements by the United States and Iran over the past few hours - as we welcome all efforts to bring an end to this conflict.
— Winston Peters (@NewZealandMFA) April 8, 2026
While this is encouraging news, there remains significant important work to be done in the coming days to secure a lasting…
संयुक्त राष्ट्र (UN): "बातचीत के लिए एक खिड़की"
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस सीजफायर का स्वागत किया है। उनके प्रवक्ता के अनुसार, यह समझौता कूटनीति के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। यूएन का मानना है कि इस अंतराल का उपयोग मानवीय सहायता पहुँचाने और एक ठोस शांति समझौते की रूपरेखा तैयार करने के लिए किया जाना चाहिए।










