हरियाणा के प्रमुख औद्योगिक केंद्र गुरुग्राम के आईएमटी मानेसर (IMT Manesar) में श्रमिकों का असंतोष गहराता जा रहा है। होंडा कंपनी में हुए हालिया विवाद के बाद अब क्षेत्र की 6 से अधिक अन्य कंपनियों के कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। वेतन वृद्धि और काम करने की बेहतर परिस्थितियों की मांग को लेकर अनुबंध श्रमिक (Contract Workers) सड़कों पर उतर आए हैं। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प भी देखने को मिली।
पुलिस की रिकॉर्डिंग पर भड़का श्रमिकों का गुस्सा
आंदोलन के दौरान उस समय तनाव चरम पर पहुंच गया जब ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू की। पुलिस की ओर से वीडियो बनाए जाने से आक्रोशित श्रमिकों ने पुलिसकर्मियों को घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कर्मचारियों ने पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की और उनके मोबाइल फोन छीनने का प्रयास किया। कर्मचारियों का आरोप है कि पुलिस रिकॉर्डिंग के जरिए उन्हें डराने की कोशिश कर रही है। हालांकि, पुलिस प्रशासन का कहना है कि वे केवल स्थिति पर नजर रखने के लिए वीडियोग्राफी कर रहे थे और श्रमिकों को शांति बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।
वेतन वृद्धि और महंगाई को बनाया मुख्य मुद्दा
हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से उनके पारिश्रमिक में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। एक ओर जहां दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतें और महंगाई लगातार बढ़ रही है, वहीं उनकी आय स्थिर बनी हुई है। इसी आर्थिक तंगी से परेशान होकर श्रमिक अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। विभिन्न कंपनियों के गेट पर श्रमिकों का जमावड़ा लगा हुआ है और वे प्रबंधन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर रहे हैं।
शोषण के खिलाफ एकजुट हुए श्रमिक
श्रमिक नेताओं ने आरोप लगाया है कि मानेसर के औद्योगिक क्षेत्र में अनुबंध पर काम करने वाले मजदूरों का लंबे समय से शोषण किया जा रहा है। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं।
• न्यूनतम मजदूरी के नियमों का पालन।
• समयोपरि (Overtime) का उचित भुगतान।
• कार्यस्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम।
• लंबे समय से कार्यरत कर्मियों का स्थायीकरण।
गौरतलब है कि होंडा की हड़ताल समाप्त होने के बाद अब सत्यम, मुंजाल शोवा और रिको जैसी बड़ी कंपनियों के कर्मचारी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं। इससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन ठप होने का डर सताने लगा है।
प्रबंधन की तरफदारी का पुलिस पर आरोप
प्रदर्शनकारी श्रमिकों ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। श्रमिकों का कहना है कि यह विवाद उनके और कंपनी प्रबंधन के बीच का है, लेकिन पुलिस अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस निष्पक्ष रहने के बजाय प्रबंधन का पक्ष ले रही है। कुछ कर्मचारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग और लाठीचार्ज करने का भी आरोप लगाया, जिसे पुलिस ने सिरे से खारिज कर दिया है। फिलहाल क्षेत्र में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
ऑटोमोबाइल और गारमेंट सेक्टर पर संकट
मानेसर का यह क्षेत्र देश के ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल (गारमेंट) उद्योग की रीढ़ माना जाता है। उद्यमियों का मानना है कि यदि सरकार और प्रशासन ने जल्द ही हस्तक्षेप कर बातचीत का रास्ता नहीं निकाला, तो यह आंदोलन अन्य छोटी-बड़ी इकाइयों में भी फैल सकता है। इसका सीधा नकारात्मक प्रभाव ऑटोमोबाइल सेक्टर की सप्लाई चेन पर पड़ेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर नुकसान हो सकता है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
श्रमिक संगठनों ने साफ किया है कि उनका यह संघर्ष शांतिपूर्ण है और वे केवल अपनी जायज मांगों के लिए लड़ रहे हैं। एक कर्मचारी प्रतिनिधि ने चेतावनी दी कि यदि प्रबंधन ने हठधर्मी रवैया नहीं छोड़ा और प्रशासन ने दमनकारी नीतियां बंद नहीं कीं तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा। वर्तमान में प्रशासन और कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक समझौता वार्ता शुरू नहीं हो पाई है, जिससे अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
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