India reaction US Iran ceasefire: भारत सरकार ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया युद्धविराम (सीजफायर) समझौते का गर्मजोशी से स्वागत किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इसे मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है। भारत ने उम्मीद जताई है कि यह समझौता क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता का मार्ग प्रशस्त करेगा।
शांति और कूटनीति पर भारत का जोर
विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि भारत हमेशा से ही संवाद और कूटनीति का पक्षधर रहा है। मंत्रालय ने कहा, "हम इस सीजफायर का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में शांति स्थापित होगी। जैसा कि हमने पहले भी कहा है, किसी भी संघर्ष को समाप्त करने के लिए तनाव कम करना और बातचीत करना अनिवार्य है।"
Statement on the recent development in West Asia ⬇️
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) April 8, 2026
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हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ग्लोबल ट्रेड
भारत ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के महत्व को भी रेखांकित किया। मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि इस समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और तेल की सप्लाई बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चलेगी। भारत के मुताबिक, इस संघर्ष ने पहले ही वैश्विक व्यापार और आम लोगों को काफी नुकसान पहुंचाया है।
2 हफ्ते टले हमले
इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान पर होने वाले संभावित सैन्य हमलों को दो सप्ताह के लिए टालने का बड़ा ऐलान किया। ट्रंप ने इसे "डबल-साइडेड सीजफायर" करार दिया है। ट्रंप का यह फैसला ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की सहमति के बाद आया है, जो वैश्विक तेल परिवहन के लिए सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है।
ईरान का 10 सूत्री प्रस्ताव
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी साझा किया कि वाशिंगटन को तेहरान की ओर से एक 10 सूत्री प्रस्ताव मिला है। ट्रंप के अनुसार, इस प्रस्ताव में उन मुख्य मुद्दों का समाधान किया गया है जिनकी वजह से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर था। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान में अपने प्राथमिक सैन्य उद्देश्यों को पहले ही पूरा कर लिया है, इसलिए अब कूटनीति को मौका दिया जा रहा है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल दो हफ्तों के लिए युद्ध का खतरा टल गया है, जिससे वैश्विक बाजार और कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि इस 14 दिनों के 'पॉज' के बाद दोनों देश किसी ठोस नतीजे पर पहुंच पाते हैं या नहीं। भारत इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।










