US-Iran Ceasefire: ईरान के 'सभ्यता विनाश' की धमकी देने वाले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को समय सीमा खत्म होने से कुछ ही मिनट पहले पूरी दुनिया को चौंका दिया। ट्रंप ने न केवल बमबारी रोकने का ऐलान किया, बल्कि दो हफ्तों के लिए सीजफायर पर भी मुहर लगा दी।
इस कूटनीतिक यू-टर्न ने जहां एक ओर शेयर बाजारों में दिवाली जैसा माहौल बना दिया है, वहीं अमेरिका के भीतर ट्रंप पर "ईरान के सामने सरेंडर" करने के आरोप भी लगने लगे हैं।
एक पोस्ट, एक मध्यस्थ और बारूद का थमना
दुनिया उस समय कांप रही थी जब ट्रंप ने कहा था कि "आज रात एक पूरी सभ्यता मर जाएगी"। लेकिन जैसे ही घड़ी की सुइयां डेडलाइन के पास पहुँचीं, ट्रंप का 'ट्रुथ सोशल' पोस्ट शांति का संदेश लेकर आया।
ट्रंप ने दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और जनरल आसिम मुनीर के साथ बातचीत के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। इस सीजफायर ने बारूदी धुएं को तो कम कर दिया है, लेकिन साथ ही कई ऐसे कूटनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं जिनका जवाब मिलना अभी बाकी है।
क्या ट्रंप ने ईरान के सामने किया सरेंडर? US सीनेटर का बड़ा आरोप
सीजफायर का ऐलान होते ही अमेरिका में राजनीतिक भूचाल आ गया है। डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने CNN से बात करते हुए ट्रंप पर तीखा हमला बोला। मर्फी ने दावा किया कि ट्रंप ने ईरान के सामने पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं।
No President in control of his senses would publicly promise to eradicate an entire civilization.
— Chris Murphy 🟧 (@ChrisMurphyCT) April 8, 2026
That's why I agree with Republicans who have put the 25th Amendment on the table. Trump seems to be taking us on a path to mass war crimes. That's a path we cannot accept. pic.twitter.com/hUZN60o6T1
उन्होंने कहा, "यह अमेरिका के लिए विनाशकारी है कि ट्रंप ने ईरान को 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर नियंत्रण देने और उनके 10-सूत्रीय एजेंडे को बातचीत का आधार बनाने पर सहमति दे दी।" अमेरिकी विपक्ष इसे 47 साल की कूटनीति की सबसे बड़ी हार बता रहा है।
होर्मुज का 'टोल' और $2 मिलियन की शर्त: क्या ईरान वसूलेगा टैक्स?
ईरान ने सीजफायर के लिए जो 10-सूत्रीय प्रस्ताव दिया है, उसमें सबसे चौंकाने वाली बात 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को लेकर है। ईरान ने प्रस्ताव दिया है कि वह होर्मुज से जहाजों को गुजरने तो देगा, लेकिन इसकी निगरानी और नियंत्रण ईरानी सेना के पास होगा। ईरान भविष्य में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से भारी टैक्स वसूलने की तैयारी में है।
अगर ऐसा होता है, तो ईरान इस जलडमरूमध्य का इस्तेमाल अपनी अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने के लिए एक 'दुधारू गाय' की तरह करेगा।
इस्लामाबाद में महा-पंचायत: कुशनर और जेडी वेंस की एंट्री
दो हफ्तों के इस सीजफायर का उपयोग एक स्थायी समझौते के लिए किया जाएगा। खबर है कि ट्रंप के खास दूत स्टीव विटकॉफ, दामाद जेरेड कुशनर और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस आने वाले शुक्रवार को पाकिस्तान के इस्लामाबाद जा रहे हैं।
यहा ईरान के टॉप डेलिगेशन के साथ आमने-सामने की बातचीत होगी। पाकिस्तान इस ऐतिहासिक शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा है, जहा ट्रंप के 15-सूत्रीय और ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्तावों के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश होगी।
ग्लोबल मार्केट में दिवाली: जापान से कोरिया तक शेयरों ने भरी उड़ान
सीजफायर की खबर का सबसे सकारात्मक असर ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ा है। जैसे ही ट्रंप ने बमबारी रोकने का ऐलान किया, जापान का Nikkei 225 और दक्षिण कोरिया का KOSPI इंडेक्स 5% से ज्यादा उछल गए।
कच्चे तेलकी कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे भारत सहित दुनिया भर के शेयर बाजारों में तेजी की उम्मीद है। निवेशकों ने राहत की सांस ली है कि कम से कम अगले 14 दिनों तक ऊर्जा आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आएगी।
ईरान का 10-सूत्रीय 'विक्ट्री प्लान': मुआवजे से लेकर परमाणु छूट तक
ईरान के प्रस्ताव ने वाशिंगटन में खलबली मचा दी है। ईरान ने स्पष्ट कहा है कि वह तभी झुकेगा जब:-
- अमेरिका उसके यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) कार्यक्रम को स्वीकार करे।
- सभी प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंध तुरंत हटाए जाएं।
- युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए ईरान को भारी मुआवजा दिया जाए।
- क्षेत्र से अमेरिकी सेना की पूरी तरह से वापसी हो।
ट्रंप ने इसे "कामकाजी आधार" बताया है, जो दर्शाता है कि वे समझौते के लिए काफी उत्सुक हैं।
इजरायल का रुख: क्या नेतन्याहू ट्रंप के फैसले से खुश हैं?
इजरायल ने फिलहाल हमले रोकने पर सहमति तो जता दी है, लेकिन तेल अवीव में हलचल तेज है। इजरायली सेना के सूत्रों का कहना है कि वे सीजफायर का पालन करेंगे, लेकिन यदि ईरान ने इन 14 दिनों का उपयोग अपनी सेना को फिर से संगठित करने के लिए किया, तो इजरायल दोबारा हमला करने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप की यह 'शांति पहल' इजरायल के भीतर भी मिश्रित प्रतिक्रियाएं पैदा कर रही है।
अब देखना होगा की क्या इस्लामाबाद की बातचीत मध्य पूर्व में 47 साल के संघर्ष को खत्म करेगी, या ये 14 दिन केवल एक बड़े तूफान से पहले की शांति हैं? पूरी दुनिया अब शुक्रवार को होने वाली बैठक की ओर देख रही है।










