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अमेरिकी नेवी ने ईरान का झंडा लगे एक मालवाहक जहाज को उस समय अपने कब्जे में ले लिया जब वह होर्मुज में लगी नाकेबंदी को चुनौती देते हुए आगे बढ़ रहा था।

रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। अमेरिकी नौसेना ने ईरान का झंडा लगे एक विशाल मालवाहक जहाज को अपने कब्जे में ले लिया है। बताया जा रहा है कि यह जहाज अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और होर्मुज में लगाई गई नाकेबंदी का उल्लंघन करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा था।

अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, यह जहाज चेतावनी के बावजूद अपने रास्ते से हटने को तैयार नहीं था, जिसके बाद नौसेना के विशेष दस्ते ने कार्रवाई करते हुए इसे घेर लिया।

​ईरान ने पिछले कुछ दिनों से होर्मुज के रास्ते होने वाली तेल और गैस की सप्लाई को बाधित करने की धमकियां दी थीं और एक तरह की नाकेबंदी लागू करने की कोशिश की थी। अमेरिकी नेवी का दावा है कि ईरानी झंडे वाला यह जहाज न केवल इस नाकेबंदी को 'आंख दिखा रहा था', बल्कि वह संदिग्ध गतिविधियों में भी संलिप्त था।

अमेरिका इसे 'फ्रीडम ऑफ नेविगेशन' का उल्लंघन मान रहा है और उसने साफ़ किया है कि वह वैश्विक व्यापार मार्ग को किसी भी कीमत पर रुकने नहीं देगा।

​जहाज के कब्जे में लिए जाने के बाद ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इसे 'समुद्री डकैती' करार दिया है और अंजाम भुगतने की चेतावनी दी है। तेहरान में सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब जवाबी कार्रवाई के तौर पर अमेरिकी या उसके सहयोगी देशों के जहाजों को निशाना बना सकता है।

खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आहट तेज हो गई है क्योंकि दोनों देशों के युद्धपोत इस समय आमने-सामने की स्थिति में हैं।

​होर्मुज की इस नाकेबंदी और अमेरिका-ईरान के टकराव का सीधा असर दुनिया भर के बाजारों पर पड़ने वाला है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका जताई जा रही है।

भारत जैसे देशों के लिए भी यह चिंता का विषय है, क्योंकि खाड़ी देशों से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

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