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भोपाल में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और जेपी आंदोलन से जुड़ी अनुराधा सिंह का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे जल, जंगल और बड़े बांधों से जुड़े आंदोलनों में सक्रिय रहीं और पर्यावरण संरक्षण के लिए लंबे समय तक काम किया।

 भोपाल। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अनुराधा सिंह का रविवार सुबह 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके जाने से सामाजिक आंदोलनों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े क्षेत्रों में एक बड़ा खालीपन पैदा हो गया है। वे अपने जीवनभर जनहित के मुद्दों के लिए सक्रिय रहीं और समाज के कमजोर वर्गों की आवाज बनने का काम करती रहीं। अनुराधा सिंह का संबंध एक प्रतिष्ठित सामाजिक और वैचारिक परिवार से था। वे सर्वोदय विचारधारा के प्रमुख नेता आचार्य राममूर्ति की पुत्री थीं। 

पति सामाजिक क्षेत्र के जाने पहचाने नाम
उनके पति श्यामबहादुर नम्र भी मध्यप्रदेश में सामाजिक कार्य और शिक्षा के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम रहे हैं। इस पृष्ठभूमि ने उनके जीवन को सामाजिक सेवा की दिशा में प्रेरित किया। वे जेपी आंदोलन के समय से ही सामाजिक बदलाव की मुहिम से जुड़ गई थीं। इसके बाद उन्होंने जल, जंगल और बड़े बांधों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई। पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग के लिए उन्होंने कई आंदोलनों में भाग लिया और लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया।

15 साल से भोपाल में रह रही थीं 
पिछले लगभग 15 वर्षों से वह भोपाल में अपने छोटे बेटे अमन नम्र के साथ रह रही थीं, जो मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके बड़े बेटे अनुराग सिंह एक प्रसिद्ध डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता हैं। अनुराधा सिंह का जीवन सादगी, अनुशासन और प्रकृति के प्रति गहरे लगाव का प्रतीक था। उन्होंने हमेशा शांत और संयमित तरीके से अपने विचारों को आगे बढ़ाया। वे मानती थीं कि समाज में बदलाव के लिए धैर्य और निरंतर प्रयास जरूरी है।

भदभदा घाट पर होगा अंतिम संस्कार
उनके निधन को सर्वोदय आंदोलन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है। उनके योगदान को लंबे समय तक याद रखा जाएगा। उनकी अंतिम यात्रा सोमवार सुबह 10 बजे भोपाल के सलैया स्थित लीला अतुल्यम से निकलेगी। इसके बाद भदभदा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा, जहां उनके चाहने वाले और सहयोगी उन्हें अंतिम विदाई देंगे।

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