वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके घर में घुसकर पकड़ने के बाद अब अमेरिका की नजरें क्यूबा पर टिक गई हैं। शनिवार
को अमेरिकी नौसेना का सबसे उन्नत और महंगा टोही ड्रोन MQ-4C ट्राइटन क्यूबा के दक्षिणी तट पर करीब 6 घंटे तक चक्कर लगाता रहा। इस ड्रोन ने सैंटियागो डी क्यूबा और राजधानी हवाना के आसपास के इलाकों की गहन निगरानी की।
दिलचस्प बात यह है कि यह वही ड्रोन मॉडल है जिसका इस्तेमाल वेनेजुएला में 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' से पहले खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया गया था।
डोनाल्ड ट्रंप का 'क्यूबा' मिशन और पेंटागन की तैयारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने बयानों से क्यूबा प्रशासन की नींद उड़ा दी है। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि "उन्हें क्यूबा को वापस लेने का सम्मान मिलेगा।" इस बयान के बाद पेंटागन और अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों ने क्यूबा पर किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन की संभावनाओं पर काम तेज कर दिया है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह अमेरिका ने वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन और मादुरो की गिरफ्तारी को अंजाम दिया, वैसी ही रणनीति क्यूबा के लिए भी बनाई जा रही है।
वेनेजुएला जैसा 'सोनिक वेपन' और हाई-टेक रणनीति
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेनेजुएला में मादुरो को पकड़ने के दौरान अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने एक रहस्यमयी 'सोनिक वेपन' का इस्तेमाल किया था। इस हथियार के प्रभाव से दुश्मन सैनिकों की नाक से खून बहने लगा और वे जमीन पर गिर पड़े। अब क्यूबा के तट पर अमेरिकी ड्रोन की लगातार उड़ानें इस बात का संकेत दे रही हैं कि अमेरिका वहां के सैन्य ठिकानों और एयर डिफेंस सिस्टम की कमजोरियों को मैप कर रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर वेनेजुएला जैसी ही सर्जिकल स्ट्राइक की जा सके।
क्यूबा हमेशा से रूस और चीन का करीबी रहा है। अमेरिका की इस बढ़ती सैन्य सक्रियता ने मॉस्को और बीजिंग को भी सतर्क कर दिया है। क्यूबा के ऊपर टोही ड्रोन की उड़ानों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताते हुए इसे उकसावे वाली कार्रवाई करार दिया जा रहा है।
हालांकि, अमेरिका का तर्क है कि वह अपने समुद्री हितों और क्षेत्रीय सुरक्षा की निगरानी कर रहा है। लेकिन 'ऑपरेशन मादुरो' की सफलता के बाद ट्रंप प्रशासन का बढ़ता आत्मविश्वास क्यूबा में किसी बड़े सियासी या सैन्य बदलाव की ओर इशारा कर रहा है।
क्या है 'ऑपरेशन मादुरो' का क्यूबा कनेक्शन?
'ऑपरेशन मादुरो' उस अमेरिकी मिशन का नाम है जिसके तहत निकोलस मादुरो को पकड़कर अमेरिका ले जाया गया। अब विशेषज्ञ इसे एक 'टेम्पलेट' मान रहे हैं जिसे क्यूबा जैसी कम्युनिस्ट सरकारों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है।
क्यूबा के तट पर 6 घंटे की यह सर्विलांस उड़ान केवल एक रूटीन चेक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सैन्य ब्लूप्रिंट का हिस्सा नजर आती है। आने वाले दिनों में कैरिबियाई सागर में अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है।










