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मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव को खत्म करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक परमाणु वार्ता होने जा रही है।

मिडिल-ईस्ट में जारी भारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल शुरू हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर मुद्दे पर बातचीत का नया दौर शुरू होने वाला है, और इस बार भी मंच बना है पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद।

ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के उच्चस्तरीय प्रतिनिधि रविवार तक पाकिस्तान पहुँच सकते हैं और सोमवार 20 अप्रैल को औपचारिक बातचीत शुरू होने की संभावना है। पूरी दुनिया की नजरें इस मीटिंग पर टिकी हैं क्योंकि यह वार्ता क्षेत्र में युद्ध की आहट को टालने का आखिरी मौका मानी जा रही है।

​अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वार्ता को सकारात्मक संकेत दिए हैं। ट्रंप ने भरोसा जताया है कि दोनों देश एक बड़े समझौते के काफी करीब हैं और ईरान कुछ अहम मुद्दों पर झुकने को तैयार है।

हालांकि, दूसरी तरफ ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने ट्रंप के इन दावों पर सवाल उठाए हैं। तेहरान का कहना है कि अभी तक कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है और कई बुनियादी मुद्दों पर मतभेद बरकरार हैं। साफ़ है कि दोनों पक्षों के बीच भरोसे की भारी कमी इस बातचीत में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

​इस पूरे संकट का सबसे अहम केंद्र 'होर्मुज स्ट्रेट' बना हुआ है, जो दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऑयल रूट है। हालांकि ईरान ने दावा किया है कि यह रास्ता कमर्शियल जहाजों के लिए खुला है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

ईरान की संसद के स्पीकर ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने अपना नौसैनिक ब्लॉकेड नहीं हटाया, तो इस स्ट्रेट को फिर से पूरी तरह बंद किया जा सकता है। इससे वैश्विक ऊर्जा संकट और गहराने का खतरा पैदा हो गया है, जो इस वार्ता की मेज पर सबसे बड़ा मुद्दा होगा।

​इस वार्ता के पीछे लेबनान का फैक्टर भी काफी अहम है। फिलहाल इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच 10 दिन का सीजफायर लागू है, लेकिन लेबनान की तरफ से इजरायल पर उल्लंघन के आरोप लगाए जा रहे हैं।

चूंकि ईरान हिज्बुल्लाह का प्रमुख समर्थक है, इसलिए क्षेत्रीय शांति के लिए लेबनान का मोर्चा भी अमेरिका-ईरान बातचीत में एक अनिवार्य कड़ी बन गया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में हो रहा दो हफ्तों का यह 'बैकचैनल' सीजफायर अब खत्म होने के करीब है, ऐसे में सोमवार की वार्ता का विफल होना क्षेत्र में फिर से तनाव भड़का सकता है।

​भले ही वाशिंगटन और तेहरान ने अभी तक इस बैठक की आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से न की हो, लेकिन 'सीएनएन' ने ईरानी सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इस्लामाबाद में सोमवार को होने वाली बैठक की तैयारी पूरी हो चुकी है।

पिछले वीकेंड पर हुई घंटों की बातचीत बेनतीजा रही थी, जिससे इस बार की वार्ता और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। यदि सोमवार को कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता है, तो मिडिल-ईस्ट में एक बड़े सैन्य टकराव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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