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दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' को लेकर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तकरार बढ़ गई है। ईरान ने जलमार्ग खोलने के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों में फंसे फंड की वापसी और IRGC की मंजूरी जैसी शर्तें रख दी हैं।

​मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' को लेकर वैश्विक तनाव चरम पर पहुँच गया है। ईरान ने इस रास्ते को व्यापारिक जहाजों के लिए फिर से खोलने का संकेत तो दिया है, लेकिन इसके साथ ही कुछ ऐसी कड़ी शर्तें रख दी हैं जिन्होंने अमेरिका और यूरोपीय देशों के होश उड़ा दिए हैं। गौरतलब है कि यह जलमार्ग वैश्विक कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति की जीवन रेखा माना जाता है, जो फरवरी के अंत से ही सैन्य झड़पों के कारण लगभग ठप पड़ा है।

​ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही केवल ईरान की शर्तों के अधीन ही संभव होगी। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने ऐलान किया है कि इस मार्ग से गुजरने वाले हर जहाज को उनसे अनुमति लेनी होगी और उनकी निगरानी में ही आगे बढ़ना होगा।

इसके अलावा ईरान ने मांग की है कि अमेरिका द्वारा फ्रीज किए गए उसके अरबों डॉलर के फंड को तुरंत मुक्त किया जाए और ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी हटाई जाए। ईरान का तर्क है कि वह अपनी समुद्री संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।

​ईरान की इन शर्तों को पश्चिमी देशों ने सीधे तौर पर चुनौती माना है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इस संकट से निपटने के लिए अगले हफ्ते लंदन में एक उच्चस्तरीय सैन्य योजना सम्मेलन बुलाने का निर्णय लिया है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलमार्ग में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय रक्षा मिशन तैयार करना है।

स्टारमर ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की स्वतंत्रता किसी एक देश की मर्जी पर निर्भर नहीं रह सकती और इसके लिए एक साझा सैन्य रणनीति की जरूरत है।

​भले ही राजनीतिक गलियारों में बातचीत का दौर चल रहा हो, लेकिन धरातल पर अमेरिकी नौसेना अभी भी बेहद सतर्क है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को आशंका है कि ईरान ने जलमार्ग में बड़े पैमाने पर समुद्री सुरंगें बिछा रखी हैं, जो व्यापारिक जहाजों के लिए घातक साबित हो सकती हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी है, लेकिन नौसेना के विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पूरे रास्ते का क्लियरेंस नहीं मिल जाता, तब तक किसी भी बड़े तेल टैंकर को वहां से गुजारना एक बड़ा जोखिम होगा।

​शिपिंग और ट्रेड विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट में मामूली सी देरी भी दुनिया भर में ईंधन की कीमतों को आसमान पर पहुँचा सकती है। वैश्विक इकोनॉमी पहले से ही सप्लाई चेन की चुनौतियों से जूझ रही है और अब इस जलमार्ग पर ईरान की नई शर्तों ने अनिश्चितता का माहौल बना दिया है।

लंदन में होने वाली सैन्य बैठक से ही यह तय होगा कि पश्चिमी देश ईरान की शर्तों के आगे झुकते हैं या फिर सैन्य बल के जरिए इस रास्ते को सुरक्षित कराने की दिशा में कोई कड़ा कदम उठाते हैं।

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