Trump on Hotline: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पिछले 21 घंटों से चल रही शांति वार्ता केवल एक बैठक नहीं, बल्कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच 'आर-पार' की कूटनीतिक जंग थी। इस पूरी चर्चा के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पल-पल की जानकारी 'हॉटलाइन' के जरिए सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दे रहे थे।
21 घंटे के इस महामंथन में दर्जनों बार ट्रंप और वेंस के बीच बातचीत हुई, लेकिन तमाम कोशिशों और दबाव के बावजूद मेज पर बैठा गतिरोध नहीं टूटा। वार्ता के बेनतीजा खत्म होने के बाद अब ईरानी मीडिया ने अमेरिका पर 'शांति से भागने' और 'बहानेबाजी' करने का बड़ा आरोप लगाया है।
VIDEO | Washington, DC: On Islamabad talks, US President Donald Trump says, “They have been meeting for many hours, but regardless of what happens in the talks, we win."
— Press Trust of India (@PTI_News) April 12, 2026
A US delegation led by US Vice President JD Vance held face-to-face talks with top Iranian negotiators in… pic.twitter.com/VEWfQoFO5u
इस्लामाबाद की इस विफलता ने न केवल मिडिल-ईस्ट की शांति को खतरे में डाला है, बल्कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक तेल संकट की आशंका को और भी बढ़ा दिया है।
'हॉटलाइन' पर ट्रंप: 21 घंटे की कूटनीति का रिमोट कंट्रोल
इस्लामाबाद के सेरेना होटल में जब जेडी वेंस ईरानी प्रतिनिधियों के साथ मेज पर बैठे थे, तो उनका सीधा संपर्क वॉशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बना हुआ था। जेडी वेंस ने खुद खुलासा किया कि इस 21 घंटे लंबी मैराथन चर्चा के दौरान उन्होंने दर्जनों बार 'हॉटलाइन' के जरिए ट्रंप से बात की और हर छोटी-बड़ी जानकारी साझा की।
🚨🇺🇸🇮🇷 | El vicepresidente JD Vance comentó que estuvieron en contacto directo con Donald Trump durante las negociaciones con el régimen iraní en Pakistán.
— La Derecha Diario (@laderechadiario) April 12, 2026
"Estuvimos negociando de buena fe. Nos vamos de acá con una propuesta sencilla: un entendimiento de que es nuestra mejor y… pic.twitter.com/VunkJfXQTM
वेंस न केवल ट्रंप, बल्कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और एडमिरल ब्रैड कूपर के साथ भी लगातार संपर्क में थे। अमेरिका की पूरी टीम इस वार्ता को किसी ठोस नतीजे पर ले जाने के लिए पूरी ईमानदारी और ताकत के साथ जुटी थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन की 'रेड लाइन्स' और ईरान की 'जिद' के बीच तालमेल बैठना असंभव हो गया।
ईरानी मीडिया का पलटवार: 'शांति नहीं, भागने का बहाना चाहिए था'
जैसे ही जेडी वेंस खाली हाथ वॉशिंगटन के लिए रवाना हुए, ईरानी मीडिया ने उन पर और ट्रंप प्रशासन पर तीखा हमला बोला। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी 'फार्श' ने दावा किया कि अमेरिका इस शांति वार्ता को लेकर कभी गंभीर था ही नहीं।
ईरानी मीडिया का आरोप है कि अमेरिका ने जानबूझकर ऐसी 'असंभव' शर्तें मेज पर रखीं जिन्हें कोई भी संप्रभु राष्ट्र स्वीकार नहीं कर सकता था, ताकि वह बातचीत तोड़कर वापस जाने का दोष ईरान पर मढ़ सके। तेहरान की तरफ से आए इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की भारी कमी है और ईरान फिलहाल अमेरिका के साथ अगले दौर की किसी भी बातचीत का कोई इरादा नहीं रखता है।
जेडी वेंस की 'कड़वी हकीकत' और खाली हाथ वापसी
अमेरिका को उम्मीद थी कि इस महावार्ता के बाद वे दुनिया के सामने अपनी जीत का ढोल पीटेंगे और हॉर्मुज का रास्ता खुलवा लेंगे, लेकिन अब उनके पास अपनी साख बचाने का कोई ठोस रास्ता नहीं बचा है। वेंस ने स्वीकार किया कि वे बहुत 'खुले दिमाग' के साथ इस्लामाबाद आए थे ताकि शांति का कोई रास्ता निकल सके, लेकिन ईरान ने अमेरिकी शर्तों को स्वीकार नहीं किया। अब हॉर्मुज का रास्ता अभी भी बंद है और दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुका है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता को झटका और भविष्य का संकट
इस पूरी घटना में पाकिस्तान की भूमिका काफी अहम रही, जिसने दोनों धुर विरोधियों को एक मेज पर लाने की पूरी कोशिश की। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने कूटनीतिक स्तर पर शानदार काम किया, जिसकी सराहना जेडी वेंस ने भी की। हालांकि, इसके बावजूद बातचीत का नाकाम होना पाकिस्तान की कोशिशों के लिए एक बड़ा झटका है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगे क्या होगा? फिलहाल दो ही रास्ते नजर आ रहे हैं—या तो दोनों देश अपने रुख में नरमी लाएं और पर्दे के पीछे से बातचीत जारी रखें, या फिर यह टकराव एक नई जंग की चिंगारी बन जाए। हॉर्मुज के बंद रहने का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है।










